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कैबिनेट बैठक में हो सकती है, महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी, कर्मचारियों को होगा बड़ी फ़ायदा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक होगी. यह कैबिनेट मीटिंग दोपहर 1 बजे से शुरू होगी. अभी तक इस कैबिनेट मीटिंग के एजेंडा के बारे में ठीक जानकारी नहीं मिली है लेकिन, कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मीटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार द्वारा होली (Holi 2022) से पहले बड़ा तोहफा दिया जा सकता है.
आज सरकार कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को बढ़ाने का फैसला ले सकती है. अभी केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 31 प्रतिशत के हिसाब से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है. लेकिन, सरकार इसे 3 प्रतिशत बढ़ाकर 34 प्रतिशत कर सकती है.
यह अहम कैबिनेट मीटिंग बजट सत्र के दूसरे दौर में रखी गई है. अगर आज सरकार 3 प्रतिशत महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी करती है तो केंद्रीय कर्मचारियों को 73,440 से लेकर 2,32,152 20 रुपये तक के एरियर का लाभ मिलेगा.
कर्मचारियों को होगा जबरदस्त फायदा- AICPI के द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबित देश में दिसंबर 2021 में देश में मंदगाई दर करीब 34.04% तक पहुंच गई थी.
अगर आज सरकार 3 प्रतिशत की मंहगाई भत्ते में बढ़ोतरी का फैसला लेती है तो ऐसी स्थिति में कर्मचारियों को 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी का फायदा मिल सकता है. इससे पहले सरकार ने अक्टूबर में डीए को 28 से बढ़ाकर 31 प्रतिशत तक कर दिया था. पहले यह माना जा रहा था कि सरकार साल की शुरुआत में ही डीए बढ़ोतरी का एलान कर सकती है लेकिन, जनवरी में इस पर फैसला नहीं दिया गया. अब जनवरी और फरवरी के महीने की सैलरी में बढ़त एरियर के रूप में दिया जाएगा.
Minimum बैसिक सैलरी पर मिलेगी इतना लाभ- बेसिक सैलरी-18,000 पहले का डीए-31% पर 5,580 रुपये महीना अब का डीए-34% पर 6,120 रुपये महीना हर महीने होने वाली बढ़ोतरी- 6,120 – 5,580 = 540 रुपये एक साल में बढ़ने वाली सैलरी-540×12= 6,480 रुपये कुल डीए एक साल का- 73,440 रुपये Maximum बेसिक सैलरी पर मिलेगी इतना लाभ- बेसिक सैलरी-56,900 पहले का डीए-31% पर 17,639 रुपये प्रति महीना अब का डीए-34% पर 19,346 रुपये प्रति महीना हर महीने होने वाली बढ़ता-19346-17639 = 1707 रुपये महीना एक साल में बढ़ने वाली सैलरी- 1707 x 12 = 20,484 रुपये कुल डीए एक साल का- 19346 X 12 = 2,32,152 रुपये

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मंथली इतने पैसा निवेश करके 30 साल में करें 5 करोड़ रुपये,ये रही निवेश मंत्र

वित्तीय लक्ष्य पूरा करने के लिए जीवन की शुरुआत में ही योजना बनानी चाहिए. इससे रिटायर्डमेंट की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते आप अच्छी रकम जमा कर सकते और उस पर अच्छा रिटर्न पा सकते हैं.मेरी उम्र 30 साल है और मैं हर महीने 90,000 रुपये कमाता हूं. मैं हाउसिंग हाउसिंग लोन के लिए 20,000 और व्हीकल लोन के लिए 10,000 रुपये की ईएमआई जमा करता हूं. मैं फिलहाल राष्ट्रीय पेंशन स्कीम (NPS) में 16,000 रुपये का निवेश कर रहा हूं.
निवेश की इस रकम में 10 फीसदी वार्षिक वृद्धि भी करता हूं.मैंने हाल ही में 5,000 रुपये का SIP भी शुरू किया है. मुझे 30 साल में 5 करोड़ रुपए पाने के लिए SIP में और कितना निवेश करना चाहिए? मैं एनपीएस में 6 साल से निवेश कर रहा हूं. मेरी 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर इसकी परिपक्वता वैल्यू क्या होगी?अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जीवन की शुरुआत में ही योजना बनाना अच्छी बात है.
यदि आप 30 साल की आयु में बचत करना शुरू करते हैं, तो आपको अगले 30 साल के लिए प्रति महीने 22,000 रुपये का निवेश होगा. इससे मूलधन के रूप में 79.2 लाख रुपये जमा हो जाएगा. यदि इस पर 10 फीसदी रिटर्न मानकर चलें, तो आप 5 करोड़ रुपए का लक्ष्य पा सकते हैं. इसमें समय के साथ निवेश की रकम में और वृद्धि पर विचार नहीं किया गया है.एनपीएस मामले में यदि एनुअल इंक्रीमेंट जैसी स्थिति के बावजूद यदि निवेश की रकम नहीं बढ़ाई जाती है, तो भी 30 साल में प्रति महीने 16,000 रुपये जमा करने पर मूलधन 57.6 लाख रुपए जमा होगा.
अर्निंग इंटरेस्ट 10 फीसदी मिलने की स्थिति में 30 साल में इसका कुल वैल्यु 3.6 करोड़ रुपए हो जाएगी. इसी प्रकार एनुअल सेविंग के लिए 10 फीसदी की बचत दर के साथ मूल राशि 3.15 करोड़ रुपये हो जाती है.
30 साल के के अंत में 10 फीसदी एनुअल अर्निंग के साथ कुल रकम 9 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी.मैंने पब्लिक प्रोविडेट फंड अकाउंट खुलवाया है. क्या मुझे इंप्लाई प्रोविडेंट फंड (EPF) में भी योगदान देना चाहिए?आप ईपीएफ और पीपीएफ दोनों अकाउंट रख सकते हैं.
ईपीएफ अकाउंट सुविधा केवल कर्मचारियों के लिए है, जबकि पीपीएफ अकाउंट कोई भी खुलवा सकता है. पीपीएफ के जरिये स्वरोजगार करने वाले भी दीर्घकालीन लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश कर सकते हैं. इसमें भी रिटर्न अच्छा मिलता है. दोनों खातों में निवेश कर टैक्स भी बचाया जा सकता है.
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दिनों दिन महंगाई आसमान छू रही है : पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बाद,आटा-चावल सहित कई चीजों की बढ़ी दाम..

देश में इन दिनों महंगाई आसमान छू रही है.कई दिनों से बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बाद अब घर की रसोई का भी खर्च बढ़ गया है. अब आम आदमी को आटा-चावल के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी. देश के कई राज्यों में आटा, चावल, रिफाइंड और मसाले समेत कई चीजों के दाम बढ़ गए हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ ही बढ़ गई महंगाई रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ही लगातार महंगाई बढ़ रही है. युद्ध शुरू होने के साथ ही खाद्य तेल खासतौर पर सूरजमुखी का तेल के दाम आसमान छूने लगे. इसके बाद आटा, जौ, चावल, धनिया, जीरा और हल्दी की कीमतों ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया.
इन मसालों की कीमतें सातवें आसमान पर रोजमर्रा के इस्तेमाल में प्रयोग होने वाले मसालों की कीमत सातवें आसमान पर पहुंच गई है. बाजार में हल्दी के दाम में 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
तो दूसरी और धनिए के दाम 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं. इसके अलावा जीरा का भाव तो पेट्रोल के भाव से भी ज्यादा तेज है. थोक बाजार में जीरा का रेट 230-235 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है. नींबू के भाव ने तोड़े रिकॉर्ड मसालों के अलावा सब्जियों की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है.
खासतौर पर गर्मियों में बढ़ते तापमान के बीच नींबू की डिमांड भी काफी बढ़ गई है, जिस कारण नींबू कहीं जगहों पर 300-400 रुपये प्रति किलो के पार हो गया है. हाल ये है कि कई जगहों पर 10-15 रुपये में सिर्फ एक नींबू ही मिल रहा है. इसमें सबसे बड़ा कारण डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को माना जा रहा है. ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण तथा मंडियों में आवक घटने के कारण नींबू के भावों में बढ़ोतरी हो रही है.
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RBI Monetary Policy : रिवर्स रेपो रेट में हुई बदलाव,बढ़ती महंगाई के बीच RBI का बड़ा फैसला..

RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मॉनिटरी पॉलिसी का ऐलान किया. MPC ने पॉलिसी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट (Repo Rate) 4 फीसदी पर बरकरार है. ये लगातार 10वीं बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. इससे पहले, रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को रेपो रेट में बदलाव किया था. रिवर्स रेपो रेट में हुई बढ़ोतरी RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि, रिवर्स रेपो रेट में 0.40% की बढ़ोतरी की गई है. अब यह बढ़कर 3.75% हो गया है. मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट 4.25 फीसदी रहेगा. पॉलिसी का रुख ‘अकोमोडेटिव’ रखा गया है. आगे चलकर अकोमोडेटिव रुख में बदलाव करेंगे
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