Lifestyle
वजन कम करने में फायदेमंद है ये ब्रेड, जानिए इसे सेवन करने का सही तरीका
बढ़ता वजन लोगों के लिए बड़ी समस्या का कारण बना हुआ है। वजन को कम करने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय करते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप भी अधिक वजन की समस्या के शिकार हैं तो इस समस्या को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। बढ़ा हुआ वजन कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, विशेषकर ऐसे लोगों में डायबिटीज और हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है। यही कारण है कि सभी लोगों को उचित वजन बनाए रखने पर ध्यान देते रहना चाहिए। इसके लिए आहार का विशेष ख्याल रखना बहुत आवश्यक हो जाता है।
क्या आप जानते हैं कि ब्रेड भी वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं? इसमें कोई दो राय नहीं है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी लोगों को सामान्य ब्रेड वाली चीजों से परहेज करने की सलाह देते है, पर कुछ प्रकार के ब्रेड आपकी सेहत के लिए फायदेमंद भी हो सकते हैं। कुछ प्रकार के ब्रेड का सेवन न सिर्फ आपको शक्ति प्रदान करने में सहायक हैं साथ ही वजन कम करने की कोशिश में लगे लोगों को भी इससे लाभ मिल सकता है।
आइए जानते हैं कि स्वस्थ शरीर और वजन के लिए किस तरह के ब्रेड का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है?
व्हाइट ब्रेड से करें परहेज
स्वास्थ्य विशेषज्ञ व्हाइट ब्रेड को शरीर के लिए नुकसानदायक मानते हैं। सामान्य तौर पर पिज्जा, सैंडविच या नाश्ते के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले व्हाइट ब्रेड शरीर के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकते हैं। असल में व्हाइट ब्रेड, रिफाइंड अनाज से तैयार किया जाता है और इसमें कार्ब्स की मात्रा अधिक होती है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स में भी इसे अधिक पाया गया है जो आपके ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ा सकता है। 9,267 लोगों के एक अध्ययन में पाया गया कि प्रतिदिन सफेद ब्रेड के दो स्लाइस (120 ग्राम) खाने से वजन बढ़ने और मोटापे का जोखिम 40% अधिक हो सकता है।
वजन कम करने के लिए क्या खाएं?
अगर आप वजन कम करने की कोशिश में लगे हुए हैं और नाश्ते में ब्रेड को शामिल करना चाहते हैं तो इसके लिए होल-ग्रेन ब्रेड का सेवन करना अच्छा विकल्प हो सकता है। होल-ग्रेन ब्रेड में अनाज और चोकर की मात्रा होती है जिससे शरीर को अधिक मात्रा में फाइबर प्राप्त हो सकता है। ऐसे में इसे आहार में शामिल करना आपके वजन को बढ़ने से रोकने में सहायक हो सकता है। वजन कम करने के लिए फाइबर वाली चीजों का सेवन करना फायदेमंद माना जाता है।
ओट ब्रेड भी अच्छा विकल्प
ओट ब्रेड भी वजन को कम करने की आपकी योजना में सहायक हो सकता है। यह फाइबर, मैग्नीशियम, विटामिन बी1, आयरन और जिंक से भरपूर होता है। इसमें मौजूद फाइबर की मात्रा रक्त शर्करा को नियंत्रित करने, उच्च रक्तचाप को कम करने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रबंधित करने में मदद करता है। ब्लड शुगर का स्तर कम रहने से वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
ब्रेड को लेकर विशेषज्ञों की सलाह
आहार विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रेड से सुबह का नाश्ता जल्दी बन जाता है, ऐसे में यह लोगों के लिए आसान और पसंदीदा रहे हैं, पर ब्रेड किस चीज से बने हैं इसपर विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। हमेशा अनाज वाले ब्रेड का ही सेवन करना चाहिए। सफेद ब्रेड में कार्ब्स और शुगर की मात्रा अधिक होती है ऐसे में इससे बचाव किया जाना चाहिए। वजन कम करने के लिए ब्रेड के साथ हरी सब्जियों और खूब सारे सलाद का नाश्ता करना बेहतर माना जाता है।

Lifestyle
त्रिफला चूर्ण खाने के तीन बड़े नुक्सान ये रहे जानिए
Triphala Churna side Effects: आयुर्वेदिक और हर्बल में उपचार के लिए त्रिफला का इस्तेमाल सदियों से किया जा रहा है. त्रिफला के अगर फायदे हैं, तो कुछ नुकसान भी, जो कई तरह के हो सकते हैं.
Triphala Churna side Effects-त्रिफला का नाम तो हर किसी ने सुना होगा. कई तरह की बीमारी के दौरान भी इसे लेते हुए देखा होगा. सदियों से त्रिफला को आयुर्वेदिक और हर्बल उपचार के तौर में इस्तेमाल में लाया जा रहा है. आंवला, बिभिताकि और हरीताकी ये तीन फलों से मिलकर त्रिफला को तैयार किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, त्रिफला खाने से कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में किया जा सकता है. त्रिफला खाने से हेल्थ को कई फायदे मिल सकते हैं. त्रिफला बाजार में चूर्ण, कैप्सूल और जूस के अर्क के रूप में आसानी से मिल जाता है. त्रिफला चूर्ण के वैसे तो कई फायदे हैं, लेकिन इसे खाने से पहले अगर सावधानी नहीं बरती गई तो इसके नुकसान भी झेलने पड़ सकते हैं.
त्रिफला चूर्ण के नुकसान
हो सकता है ब्लड शुगर लो
स्टाइलक्रेज़ के मुताबिक, त्रिफला में डायबिटीज से लड़ने के गुण होते हैं. जो मरीज पहले से ही डायबिटीज कि दवाएं ले रहे हैं, उन्हें त्रिफला खाने से हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है, जो ब्लड शुगर को काफी लो कर सकता है. अगर डायबिटीज के मरीज हैं तो त्रिफला चूर्ण खाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें.
दवाओं का असर हो सकता है कम
त्रिफला कई तरह की दवाओं का असर कम कर सकता है, जिससे लिवर को नुकसान पहुंच सकता है. दवाओं के साथ त्रिफला का सेवन करने से पहरेज करना चाहिए. इसके अलावा मूड खराब, एनर्जी में कमी और नींद की समस्या भी हो सकती है.
प्रेगनेंसी में हो सकती है समस्या
प्रेगनेंसी के दौरान त्रिफला चूर्ण के सेवन से कई तरह की समस्याएं देखने को मिल सकती हैं. इससे मिसकैरेज तक हो सकता है. त्रिफला चूर्ण के सेवन से पहले महिलाओं को डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. त्रिफला चूर्ण को खाने से पहले इसकी सही मात्रा के बारे में जानकारी होना जरूरी है.
Lifestyle
आंसू निकलना भी होता है फायदेमंद जानिए, कैसे
Eye Health: अभी तक आपने सुना होगा कि हंसना सेहत के लिए फायदेमंद होता है लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं कि रोने के भी बहुत से फायदे हैं.
Eye Care Tips: अगर हंसना-मुस्कराना सेहत (Health) के लिए अच्छा माना जाता है तो रोना भी कहीं से खराब नहीं. जितने ज्यादा फायदे हंसने के है, रोने के भी उतने ही फायदे (Benefits of Tears) माने जाते हैं. फिर चाहे आप किसी मूवी या सीरियल को देख इमोशनल हो रहे हैं या फिर प्याज काटते वक्त आपके आंसू निकल रहे हों.
रिसर्च कहती है कि आपकी हेल्दी आंखों के लिए आंसू काफी जरूरी है. यह आपकी आंखों को गीला और चिकना रखते हैं. इंफेक्शन और गंदगी से भी बचाते हैं. ये आपकी आंखों को साफ रखते हैं और हेल्दी भी बनाते हैं. तो यहां जानिए आखिर क्यों निकलते हैं आंसू और इसके क्या-क्या होते हैं फायदे..
आंसू क्यों निकलते हैं?
इंसान के रोने के पीछे पूरी तरह से साइंस (Science) काम करता है. जब हम या आप इमोशनल (Emotional) होते हैं, प्याज का कोई तीखी चीज काटते हैं, आंखों में कुछ चला जाता है तब आंसू निकलते हैं. आंसू आंख की अश्रु नलिकाओं से निकलने वाला तरल पदार्थ है, जो पानी और नमक के मिश्रण से बना होता है. इसमें तेल, बलगम और एंजाइम नामक केमिकल भी पाया जाता है, जो कीटाणु को मार हमारी आंखों को हेल्दी रखता है.
तीन तरह के होते हैं आंसू
आप नहीं जानते होंगे कि इंसान की आंखों से तीन तरह के आंसू निकलते हैं. चलिए बताते हैं
Basal Tears- इस तरह के आंसू आंखें झपकने पर निकलते हैं. ये आंखों में नमी बनाए रखने का काम करते हैं. ये नॉन-इमोशनल आंसू होते हैं.
Reflex Tears– ये भी नॉन-इमोशनल आंसू ही होते हैं. ये आंखों के हवा, धुएं, घूल के पड़ने से आते हैं.
Emotional Tears- दुख, निराशा, गम होने पर जो आंसू निकलते हैं वे इमोशनल आंसू होते हैं.
आंसुओं के फायदे ही फायदे
नीदरलैंड्स की स्टडी के मुताबिक रोने से आप रिलैक्स फील करते हैं और आपका मूड अच्छा होता है.
आंसू में लाइसोजोम (Iysozyme) नाम का फ्लूइड पाया जाता है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह हमारी आंखों को संक्रमण से बचाता है और आंखों को साफ करता है.
रोने से इमोशन कंट्रोल होती हैं और मानसिक तनाव से राहत मिलती है
रोने से बॉडी में ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन हॉर्मोन बनते हैं जो शारीरिक और भावनात्मक दर्द से आराम दिलाते हैं.
आंसू निकलनेसे आंखें सूखती नहीं और उसकी नमी बरकरार रहती है, जिससे आखों की रोशनी बढ़ती है.
जब कोई शख्स आंखें झपकाता है, तो बेसल टियर निकलती हैं तो म्यूकस में ब्रेन को सूखने से बचाते हैं.
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क्या आप भी AC का टेंपरेचर 24 -25 से कम रखते है तो हो जाइये सावधान

Best Temperature For Ac: गर्मी में एसी चलाने से राहत मिल जाती है, लेकिन ज्यादा कम तापमान पर एसी चलाना सेहत को नुकसान देता है, जानिए कितने तापमान पर चलाना चाहिए AC और ज्यादा AC में रहने के नुकसान.
AC Temperatures Harmful: बारिश के मौसम में ह्यूमिडिटी सबसे ज्यादा परेशान करती है. ऐसे में पसीना और चिपचिपाहट से सिर्फ एसी में बैठने पर ही राहत मिलती है. कुछ लोगों को इतनी गर्मी लगती है कि वो एसी के ठीक सामने बैठना या सोना ही पसंद करते हैं और एसी का टेंपरेचर भी 18-20 ही रखते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो सावधान हो जाएं. एसी को बहुत कम टेंपरेचर पर चलाना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. इससे आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. आइये जानते हैं एसी को किस टेंपरेचर पर चलाना चाहिए और ज्यादा कम पर एसी चलाने से क्या नुकसान होते हैं.
24-25 डिग्री पर ही एसी चलाएं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको एसी 24-25 डिग्री पर चलाना चाहिए. इससे कम एसी चलाकर रखना आपके स्वास्थ्य पर विरपरीत असर डालता है. सर्दी हो या गर्मी बाहर से तापमान से कमरे या घर के तापमान में एक्सट्रीम बदलाव नहीं होना चाहिए. हमारे शरीर के तापमान की तुलना में बहुत कम तापमान पर सेट किए गए एसी कमरे से नमी को गायब कर देते हैं. जिससे त्वचा को नुकसान होता है. ऐसे में त्वचा से पसीना कम निकलता है और ऑयल ज्यादा निकलने लगता है. इससे मुँहासे, समय से पहले झुर्रियाँ और त्वचा में जलन पैदा हो सकती है. एक्सट्रीम हाई टेंपरेचर में त्वचा के पोर्स बंद हो सकते हैं, जिससे स्किन के फंक्शन पर असर पड़ता है.
कम टेंपरेचर पर एसी चलाने के नुकसान
ज्यादा तापमान पर एसी चलाने से शरीर का थर्मल रेगुलेशन प्रभावित होता है.
ठंडी और ड्राई हवा में वायरस और जर्म्स जल्दी पैदा होते हैं और फैलते हैं.
ज्यादा कम एसी चलाने से अस्थमा और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है.
जो लोग ज्यादा AC में रहते हैं वो समय से पहले बूढ़े लगने लगते हैं. ऐसे लोगों की त्वचा पर जल्दी झुर्रियां आने लगती हैं.
बालों का झड़ना, नाक बंद होना और गला सूखने जैसी परेशानियां होती हैं.
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