छतीसगढ़
कोरोनाकाल की स्तिथि में युवा हुए बेरोजगार युवाओ को जबरन नौकरी से निकाला सरकार से दोबारा नौकरी दिलवाने की अपील
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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 19 अप्रैल को स्वास्थ्य सेक्टर से जुड़ा एक ट्वीट किया। कमेंट बॉक्स में 57 कमेंट आए। उनमें से इन 3 को देखिए।
माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी यूपी के 9000 एंबुलेंस कर्मचारियों की मांग आपके समक्ष कई बार रखी गई लेकिन अभी तक हल नहीं हो पाया।
मान्यवर आप से हाथ जोड़कर निवेदन है एंबुलेंस कर्मचारियों के पेट पर लात न मारें, कर्मचारी आज भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
सर कुछ ध्यान 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारियों का भी कर लीजिए, न वेतन बढ़ा न समय पर सैलरी दे रहे और न ही झूठे आरोप में निकाले हुए कर्मचारियों की बहाली कर रही है। आपसे बहुत आस लगाए बैठे हैं।
ये तीनों ही कमेंट उन एंबुलेंस ड्राइवरों के हैं जिन्हें यूपी में एंबुलेंस सेवाओं को चलाने वाली कंपनी GVK EMRI ने 29 जुलाई 2021 को नौकरी से निकाल दिया था। निकाले जाने वालों की संख्या 9000 तक पहुंच गई है। इसमें एंबुलेंस ड्राइवर के साथ EMT यानी इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन भी शामिल हैं। ये सभी दोबारा नौकरी पर रखने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से गुहार लगा रहे हैं। क्योंकि इनके कह देने से कंपनी इन्हें दोबारा नौकरी पर रख लेगी। आइए पूरा मामला जानते हैं।
अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे नौकरी से निकाल दिए गए
यूपी में 14 सितंबर 2012 से एंबुलेंस सेवा को चलाने का काम तेलंगाना की GVK EMRI कंपनी करती आ रही है। 25 जुलाई 2021 को यूपी सरकार ने GVK EMRI का एएलएस यानी एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस सेवा का टेंडर रद्द करके जिगित्जा हेल्थ केयर नाम की कंपनी को दे दिया। नई कंपनी को टेंडर मिला तो उसने नई भर्ती शुरू कर दी। इससे इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा में काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी जाने का खतरा लगा और उन्होंने विरोध शुरू कर दिया।
26 जुलाई को हड़ताल का ऐलान करके लखनऊ के ईको गार्डेन में धरने पर बैठ गए। मामला इमरजेंसी सेवा के कर्मियों से जुड़ा था लेकिन इसमें 102 और 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हो गए। आंदोलनकारी कर्मचारियों से सरकार के प्रतिनिधियों ने बात की। सहमति बनी कि पुराने किसी कर्मचारी को निकाला नहीं जाएगा। कर्मचारियों के लिए यह राहत की बात थी लेकिन उनकी और भी मांग थी जिसे पूरा होना बाकी था।
नई कंपनी ट्रेंड लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए 20 हजार मांग रही थी
नई कंपनी ने पुराने कर्मचारियों को नौकरी पर रखने का तो फैसला कर लिया लेकिन सैलरी घटाकर देने की बात कही। पहले जो सैलरी 12,700 रुपए थी उसे 10,700 कर दिया गया। इसके अलावा 20 हजार रुपए का डिमांड ड्रॉफ्ट ट्रेनिंग के नाम पर जमा करने को कहा गया। कर्मचारियों का कहना था, “हम तो आलरेडी इतने सालों से काम कर रहे हैं, उसी काम की ट्रेनिंग के लिए पैसा क्यों मांगा जा रहा है?”
एंबुलेंस ड्राइवरों ने गाड़ी की चाभी सौंपी और छह मांगो को लेकर आंदोलन में शामिल हो गए
26 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन अगले तीन दिन में पूरे प्रदेश में फैलता चला गया। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हनुमान पांडे के कहने पर जिलों में तैनात ड्राइवर और मेडिकल टेक्नीशियन एंबुलेंस खड़ी करके प्रदर्शन में शामिल हो गए। इसी दौरान एंबुलेंस की कमी से मरीजों के मौत की खबर आने लगी। सरकार ने धरना खत्म करने का अल्टीमेटम दिया लेकिन कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े रहे। पहले उनकी पांच मांगे देखिए…
ठेका प्रथा को बंद किया जाए
बार-बार कंपनियों का ठेका बदलकर नई भर्ती न की जाए
समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए
कोरोना संकट के बीच मरने वाले एंबुलेंस कर्मियों के परिजनों को 50 लाख की बीमा राशि दी जाए
102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन में शामिल किया जाए
इसके अलावा एक मांग के बारे में हमें जीवनदायनी एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार मिश्रा ने बताया। उन्होंने कहा, 25 सितंबर 2019 को कंपनी के साथ हमारी बैठक हुई तो तय हुआ था कि 8 घंटे की ड्यूटी और 2 घंटे का ओवर टाइम होगा। लेकिन आज तक ओवर टाइम का पैसा नहीं मिला और कंपनी 12 घंटे काम करवाती रही। हमारी मांग है कि श्रम विभाग के नियमों के अनुसार काम करवाया जाए।
सरकार ने 570 कर्मचारियों को तुरंत नौकरी से निकालने का आदेश दे दिया
आंदोलन बढ़ा तो मरीजों को दिक्कत होने लगी। सीतापुर में महिला की मौत हुई तो सरकार हरकत में आ गई। उस वक्त के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा, हमने एंबुलेंस कर्मियों की जरूरी मांगों को पूरा कर दिया है लेकिन वह अब तरह-तरह की मांगे रख रहे हैं। हमने GVK EMRI कंपनी से प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
GVK EMRI कंपनी ने 28 जुलाई को 570 ड्राइवर और ईएमटी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इसमें एंबुलेंस संघ के अध्यक्ष, प्रदेश प्रवक्ता, से लेकर हर जिले के पदाधिकारी शामिल थे। कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टीवीएसके रेड्डी ने कहा, “कल तक जो कर्मचारी ज्वाइन कर लेंगे उन्हें रखा जाएगा जो नहीं आएंगे उन्हें बाहर कर दिया जाएगा। बाकी ये 570 लोगों को कंपनी दोबारा नौकरी पर नहीं रखेगी।”
कंपनी के खिलाफ जिसने भी बोला उसे नौकरी से निकाल दिया गया
सरकार का सख्त रुख देखा तो GVK EMRI कंपनी ने सख्त फैसला लेना शुरू कर दिया। आशियाना थाने में एंबुलेंस संघ के अध्यक्ष मंत्री, महामंत्री, कोषाध्यक्ष सहित 11 लोगों के खिलाफ एस्मा के तहत एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस के जरिए आंदोलन करने वालों को हटाया गया। कंपनी ने धीरे-धीरे हर जिलों में उन लोगों को हटाना शुरू किया जो आंदोलन में शामिल थे या फिर आंदोलन के समर्थक थे। अभिषेक ने बताया कि ऐसे लोगों की संख्या इस वक्त 9 हजार पहुंच गई है।
कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया
एंबुलेंस कर्मचारियों की नौकरी गई तो उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री अनिल उपाध्याय 27 दिसंबर को एक प्रतिनिधिमंडल लेकर सीएम योगी से मुलाकात करने पहुंचे। नौकरी से निकाले गए लोगों की समस्याओं को सामने रखा। बताया कि 4 लोगों ने नौकरी जाने के बाद आत्महत्या कर ली। एंबुलेंस कंपनी की मनमानी को सीएम योगी के सामने रखा। उन्होंने सही फैसला लेने की बात कही है।
एंबुलेंस संघ के प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने कहा, “कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों को फर्जी केस के लिए दबाव बनाते हैं। मना करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं। कंपनी ऐसा करके सरकार के खजाने से हर महीने करोड़ों रुपए लूट रही है। सीएम योगी को कंपनी के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।”
यहां तक बात हमने कर्मचारियों की मांग और उनकी समस्याओं को लेकर बात की। अब कंपनी पर जो आरोप लग रहे हैं उसकी बात करते हैं।
एंबुलेंस कंपनी दबाव देकर फर्जी केस कैसे बनवाती है
नौकरी से निकाले गए एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कंपनी के अधिकारी फोन करके केसों की संख्या पूछते हैं, अगर उन्हें एक या दो केस बता दिया तो कहते थे कि इसे पांच करो। अब इसके बाद हम 108 नंबर पर फोन करवाते हैं और उससे दूर की लोकेशन बताने को बोल देते हैं। इसके लिए हमें कहीं जाना नहीं होता था। सारा काम रजिस्टर पर हो जाता था और कंपनी सरकार के सामने कागज दिखाकर पैसों का भुगतान करवा लेती थी।”
गैराज में खड़ी एंबुलेंस कागजों पर लगातार चल रही हैं
पिछले साल ही जून महीने में बहराइच से खबर आई कि 6 एंबुलेंस गैराज में बनने के लिए खड़ी हैं। 2 एंबुलेंस एकदम जर्जर हो चुकी थी। लेकिन फाइल पर ये सभी चल रही थी। इन एंबुलेंस के जरिए हर दिन 4-5 केस अस्पताल पहुंचाए जा रहे थे। कंपनी पर ये भी आरोप लगा कि गैराज को मुख्यालय से 40 किमी दूर इसीलिए बनाया गया है ताकि अधिकारियों की जांच से बचा जा सके।
कंपनी पर पैसा लेकर नौकरी देने का आरोप
GVK EMRI कंपनी पर पैसा लेकर नौकरी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। बस्ती के हल्लौर नगरा के मनोज कुमार को 108 एंबुलेंस सेवा में नौकरी का वादा करके 45 हजार रुपए लिए गए। लेकिन बाद में नौकरी नहीं दी गई। मनोज कुमार ने आशियाना थाने में कंपनी के डायरेक्टर, यूपी प्रभारी, सीएम हेड और एचआर के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया।
न सिर्फ विपक्ष के नेता बल्कि बीजेपी नेताओं ने भी नौकरी देने के लिए आवाज उठाई
सपा और कांग्रेस के नेताओं के अलावा बीजेपी के केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, यूपी सरकार की मंत्री नीलिमा कटियार, विधायक दिनेश खटिक, कुंवर नरेंद्र पाल सिंह, फतेह बहादुर सिंह, रमेश चंद्र मिश्र, संजू देवी जैसे नेताओं ने नौकरी से निकाले गए एंबुलेंस कर्मियों के कोरोना संकट के बीच किए गए कामों की तारीफ करते हुए सीएम योगी को पत्र लिखा। पत्र के जरिए सीएम से अपील की है कि वह कंपनी को आदेश दें जिससे इन्हें दोबारा नौकरी पर रखा जाए।
फिलहाल कंपनी भी सरकार के निर्देश के इंतजार में है। अगर सरकार दोबारा नौकरी पर रखने का निर्देश देती है तो कंपनी इन्हें नौकरी पर रख लेगी।

छतीसगढ़
पीएनबी की नई ब्याज दरों में हुई वृद्धि, जाने कितने बढ़े रेट…

PNB FD Interest Rate: पंजाब नेशनल बैंक ने 2 करोड़ रुपए से कम के फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में वृद्धि कर दी है।
PNB FD Interest Rate: भारतीय स्टेट बैंक के बाद पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने विभिन्न अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। नई दरें 14 जून से लागू होंगी। बैंक ने अपनी वेबसाइट पर एक आधिकारिक घोषणा में कहा, ‘संशोधित ब्याज दरें 14 जून 2022 से नए जमा और मौजूदा एफडी के नवीनीकरण पर लागू होगी।’ पीएनबी ने दो करोड़ रुपए से कम जमा पर एफडी दरों में बढ़ोती की है। आरबीआई के रेपो रेट में बदलाव करने के बाद बैंक ने कदम उठाया है।
पीएनबी की नई ब्याज दरें
बैंक ने 7 से 45 दिनों की अवधि के लिए ब्याज दर को 3 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। 46 से 90 दिनों में मैच्योर होने वाली एफडी की ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। इस अवधि के लिए 3.25 फीसदी ब्याज मिलेगा। 91 से 179 दिनों में मैच्योर होने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर 4 फीसदी ब्याज दर मिलती रहेगी। वहीं 180 दिन से लेकर 1 साल से कम की अवधि वाली एफडी पर 4.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। हालांकि 1 साल से अधिक और दस वर्ष से कम की अवधि के लिए जमा राशि पर बड़े बदलावों की घोषणा की गई है।
इस अवधि की ब्याज दरों में बदलाव
1 साल से 2 वर्ष के बीच मैच्योरिटी बकेट में 5.2 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। बैंक 2 साल से ज्यादा और 3 साल तक मैच्योर होने वाली एफडी पर ब्याज दर पर 5.30 फीसदी की दर से ब्याज देगी। वहीं तीन साल से ज्यादा और 5 साल से कम में मैच्योर होने वाली डिपॉजिट पर 5.50 फीसदी दर से ब्याज मिलेगा, जो पहले 5.25 फीसदी था। पीएनबी 5 साल से ज्यादा और 10 साल से कम मैच्योर होने वाली जमाओं पर 5.60 फीसदी की दर से ब्याज देगा।
छतीसगढ़
गौरेला-पेंड्रा-मारवाही जिले में जंगली हाथी के हमले से एक व्यक्ति की मौत, एवं चार लोगो की जान जा चुकी..

मारवाही संभागीय वन अधिकारी दिनेश पटेल ने कहा कि नवीनतम घटना कटरा वन क्षेत्र के बेलझरिया गांव में शनिवार शाम को उस समय हुई जब रामधन गोंड अपने रोजमर्रा के कामकाज से घर लौटे थे।छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मारवाही जिले में जंगली हाथी के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की उम्र 47 साल बताई जा रही है। इसी के साथ मध्य प्रदेश से सटे इस जिले में इस साल मार्च से अब तक चार लोग हाथियों के हमले में मारे जा चुके हैं।मारवाही संभागीय वन अधिकारी दिनेश पटेल ने कहा कि नवीनतम घटना कटरा वन क्षेत्र के बेलझरिया गांव में शनिवार शाम को उस समय हुई जब रामधन गोंड अपने रोजमर्रा के कामकाज से घर लौटे थे।
पटेल के अनुसार, गोंड अपने घर के पीछे हाथी को देखकर चिल्लाए कि तभी हाथी ने उन्हें सूंड़ से उठाकर जमीन पर पटक दिया और पैर से कुचल दिया। वन अधिकारी के अनुसार, गोंड की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनकी पत्नी वहां से भागने में कामयाब रही।अधिकारी ने कहा कि गोंड के परिवार को तत्काल 25,000 रुपये का राहत दी गई और 5.75 लाख रुपये का शेष मुआवजा जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दिया जाएगा।
छतीसगढ़
गर्मी में टुटा मौत का कहर, 4 डिग्री तापमान बढ़ने की आशंका..

इन दिनों गर्मी से राजस्थान सहित पूरा देश बेहाल है। ये स्थिति तो तब है जब देश में वर्ष 1991 से 2018 तक औसत तापमान में 0.7 डिग्री तापमान की वृद्धि हुई। माना जा रहा है कि 2022 में ये आंकड़ा 0.9 डिग्री बढ़ गया है। जरा सोचिए 31 साल में औसत तापमान में हुई 0.9 डिग्री की बढ़ोतरी ने गर्मी से इतना बेहाल कर दिया है तो तब क्या होगा, जब औसत तापमान 4 डिग्री तक बढ़ जाएगा।
गर्मी में लोग पहाड़ी इलाकों का रुख करते हैं, लेकिन अब वहां भी राहत नहीं मिलेगी। शिमला जैसी जगह 1 साल में हीटवेव के दिन दोगुना हो गए।
ग्रीनपीस इंडिया की ओर से हाल ही में जयपुर सहित देश के 10 बड़े शहरों में मौसम में आए बदलाव को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में कई डरावने खुलासे हुए हैं।
40 के बजाय अब साल में 100 दिन हीटवेव
भारत में 1950 में साल में 40 दिन हीटवेव चलती थी। 2020 में ये आंकड़ा 100 दिन तक पहुंच गया। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि हीटवेव का कहर इसी तरह बढ़ता रहा तो सदी के अंत पर औसत तापमान 4 डिग्री बढ़ जाएगा। कोई भी इतनी गर्मी झेल नहीं पाएगा। फसलें तबाह हो जाएंगी। हीटवेव इंसानों और जानवरों की मौत का कारण बनेगी।
हीटवेव में भारत की रैंक 5वीं, 50 सालों में 17000 मौतें
रिपोर्ट के अनुसार हीटवेव के मामले में भारत दुनिया में पांचवें नंबर पर है। भारत में पिछले 50 सालों में हीटवेव से 17 हजार से अधिक मौतें हुई हैं। वर्ष 1971 से वर्ष 2019 के बीच भारत में 706 दिन हीटवेव रही।
इस आधार पर तैयार की रिपोर्ट
रिपोर्ट में उन शहरों को शामिल किया गया, जहां जनसंख्या की वृद्धि सबसे तेजी से हो रही है। इन शहरों में अन्य शहरों के मुकाबले औद्योगिकरण भी बढ़ता जा रहा है। इनमें देश की राजधानी सहित राज्यों की राजधानियां शामिल हैं।
इन शहरों पर हीटवेव का प्रभाव जानने के लिए मौसम विभाग के ऑफिशियल डाटा का अध्ययन किया गया, जिनमें अप्रैल के रोजाना अधिकतम, न्यूनतम तापमान, ह्यूमिडिटी और मौसम विभाग के हीटवेव की चेतावनी शामिल हैं। इन शहरों में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि हो रही है और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान दे रहे हैं, जहां इन प्रभावों के चलते तापमान में अच्छा खासा उतार-चढ़ाव हो रहा है।
क्या है हीटवेव
मौसम विभाग के अनुसार जब पारा मैदानी इलाकों में 40 डिग्री या इससे अधिक हो जाए और पहाड़ों पर 30 डिग्री या इससे अधिक दर्ज हो तो हीटवेव की स्थिति कहलाती है।
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