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वास्तु शास्त्र: क्या आप भी है नींद नही आने से परेशान, तो करे ये असान सा उयाये…

Vastu Tips for Bedroom: तनाव भरी जिंदगी में आजकल नींद न आने की समस्या आम है। जबकि रोजाना अच्छी नींद लेने से मन-मस्तिष्क और शरीर स्वस्थ रहता है। नींद पूरी न होना और अनिद्रा की समस्या के चलते कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जानकार बताते हैं कि नींद पूरी ना होने के कारण शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि कई लोग इसकी वजह से नींद की दवा लेकर सोते हैं। जबकि कई बार नींद ना आने कारण तनाव ही नहीं बल्कि वास्तु दोष भी हो सकता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर में वास्तु दोष होने की वजह से परिवार के लोगों को सही से नींद नहीं आती है। वास्तु शास्त्र में अच्छी नींद के लिए कई तरह के उपाय बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने से नींद में आ रही समस्या खत्म हो सकती है। तो चलिए आज जानते हैं अच्छी नींद के लिए वास्तु के कुछ अचूक उपायों के बारे में…
इन चीजों को बेडरूम में न रखें
बेडरूम में आइना ना लगाएं। वास्तुशास्त्र के अनुसार बेडरूम में आइना लगाने से नींद में बाधा आती है। यदि बेडरूम में आइना है तो रात को सोते समय उसे किसी कपड़े से ढंक दें। इसके अलावा बेडरूम में कभी भी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक सामान
कई लोग अपने बेडरूम में इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे- टीवी या कंप्यूटर रखते हैं। जबकि वास्तु में इसे सही नहीं माना गया है। ऐसे में भूलकर भी इन चीजों को अपने बेडरूम में न रखें, क्योंकि ऐसा करने से नींद न आने की समस्या बढ़ने लगती है। बेड की दिशा हो सही
अपने कमरे में बेड का ध्यान रखें। वास्तुशास्त्र के अनुसार, बेडरूम में कभी भी बिस्तर उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से नींद में बाधा आ सकती है और आप ठीक से सो नहीं पाते हैं।बेड पर बैठकर न खाएं खाना
वास्तुशास्त्र की मानें तो बिस्तर पर बैठकर खाना नहीं खाना चाहिए। ऐसा करने से नींद में खलल पड़ती है और अच्छी नींद नहीं आती। वहीं घर के सभी सदस्यों को एक साथ भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से मन में शांति रहती है आप खुशी महसूस करते हैं, जिससे नींद अच्छी आती है।
घी का दीपक
यदि नींद बार-बार टूटती है, तो रात को सोते समय बेडरूम में देसी घी का दीपक जलाकर सोना चाहिए। ऐसा करने से अच्छी नींद आती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बेडरूम में पलंग लकड़ी का होना चाहिए। इसके साथ ही चौकोर आकार के पलंग पर सोना अच्छा माना जाता है। कहा जाता है कि इससे अच्छी नींद आती है।

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Heart Attack Treatment : हार्ट अटैक से बचना है तो करें,ये 5 काम..नहीं आयेगा कभी अटैक

Heart Attack Treatment: बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान के चलते आज के समय में अपने आपको फिट रख पाना मुश्किल होता जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि आपको ऐसे कौन-से काम करने चाहिए, जिससे हार्ट अटैक के जोखिम को कम किया जा सके.
Heart Attack Treatment For Healthy life: फिट रहने के लिए हार्ट को भी फिट रखना बेहद जरूरी है. सभी जानते हैं कि देश में ज्यादातर लोगों की जान हार्ट अटैक से जाती है. ऐसे में अपने आपको हेल्दी रखने के लिए विशेष ध्यान रखना पड़ता है. आइए जानते हैं कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए आपको ऐसे कौन-से 6 काम करने चाहिए, जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है.
1. धूम्रपान न करें
धूम्रपान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपका हार्ट अटैक का जोखिम कम हो जाता है. यदि आपको धूम्रपान की बहुत ज्यादा आदत हो चुकी है तो धीरे-धीरे इस आदत को छोड़ दें.
2. रोज करें मेडिटेशन
मेडिटेशन को अपनी अपनी लाइफ में शामिल कर लें. क्योंकि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए मेडिटेशन करना बेहद जरूरी है. योग की मदद से स्ट्रेस लेवल कम होता है. रोजाना मेडिटेशन करने से माइंड भी शांत रहता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम भी कम होता है.
3. नींद पूरी लें
अगर आप नींद पूरी लेंगे तो आपको हार्ट अटैक का रिस्क कम हो जाता है. दरअसल, हार्ट को हेल्दी रखने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद पूरी करना चाहिए. नींद पूरी नहीं होने से भी तनाव बढ़ता है, जिससे हार्ट अटैक रिस्क भी बढ़ जाता है. ऐसे में कोशिश करें कि आप नींद पूरी लें.
4.वजन रखें कंट्रोल
वजन कंट्रोल करना भी बेहद जरूरी है. क्योंकि वजन बढ़ने से आपको कई तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं. ऐसे में कोशिश करें कि एक्स्ट्रा शुगर का सेवन न करें.
5. बीएमआई और हार्ट रेट नोट करें
इसके साथ ही बीएमआई और हार्ट रेट को नोट करते रहें. अगर आपका बीएमआई 25 से ज्यादा है और कमर 35 इंच से ज्यादा है तो आपको हार्ट हेल्थ का खतरा हो सकता है. ऐसे में आपको एक्सरसाइज करनी की आदती डालनी होगी.
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क्या आपका बच्चा भी सुनता नहीं सिर्फ देखता रहता है,तो हो सकती हैं मिर्गी का लक्षण….
पर्पल डे ऑफ एपिलेप्सी हर साल 26 मार्च को मनाया जाता है। इसका लक्ष्य लोगों को एपिलेप्सी यानी मिर्गी के बारे में जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में 5 करोड़ लोगों को मिर्गी के दौरे आते हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं इस बीमारी के 80% मामले लो और मिडिल इनकम देशों में पाए जाते हैं।
भारत की बात करें तो यहां एपिलेप्सी टॉप 3 न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स में से एक है। छोटे बच्चों में चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी होना आम है। ये बचपन में होने वाला एपिलेप्सी सिंड्रोम है। इस कंडीशन में बच्चों को कब और कैसे दौरे आते हैं, ये समझने के लिए हमने अपोलो हॉस्पिटल अहमदाबाद के कसल्टेंट पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आनंद अय्यर से बात की।
सवाल: चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी क्या है?
जवाब: चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी एक ऐसी कंडीशन है जिसमें स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को बार-बार मिर्गी के सीजर (दौरे) आते हैं। ये बचपन में होने वाला एक कॉमन डिसऑर्डर है।
सवाल: बच्चों को ये सीजर किस उम्र में आते हैं?
जवाब: एब्सेंस सीजर आमतौर पर 4 से 7 साल के बच्चों को आते हैं। इसकी ज्यादातर शिकार बच्चियां होती हैं। टीनएज में सीजर आने पर बच्चों को जुविनाइल सीजर के लिए जांचा जा सकता है।
सवाल: पेरेंट्स बच्चों में सीजर कैसे पहचान सकते हैं?
जवाब: एक सीजर 5 से 15 सेकंड तक चल सकता है। ये दिन में 30 से 40 बार तक भी हो सकता है। सीजर एकदम से शुरू होकर एकदम से खत्म भी हो जाता है। इसके बाद बच्चा ऐसा व्यवहार करता है जैसे कुछ हुआ ही न हो। बच्चा कुछ देर के लिए कंफ्यूज भी हो सकता है। ये सीजर बच्चों के दिमाग को डैमेज नहीं करते।
सवाल: चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी का क्या इलाज है?
जवाब: एंटी-सीजर दवाओं से एपिलेप्सी को कंट्रोल किया जा सकता है। हर 10 में से 7 बच्चों के दौरे इसी तरह कंट्रोल में आते हैं। सीजर से पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए 2 से 2.6 सालों तक इलाज करना जरूरी है।
सवाल: क्या चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी से बच्चों में दूसरी समस्याएं हो सकती हैं?
जवाब: इस डिसऑर्डर से जूझ रहे ज्यादातर बच्चों का विकास नॉर्मल तरीके से होता है। हालांकि कुछ में ये बीमारी पढ़ने-लिखने में बाधा डाल सकती है। साथ ही उन्हें फोकस करने में परेशानी हो सकती है। उनकी पर्स्नालिटी भी हाइपरएक्टिव हो सकती है।
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खाने पीने की चीजो के सेवन से हो रही हमारे शरीर मे प्लास्टिक की एंट्री हो सकती है बड़ी परेशानी
प्लास्टिक को बंद करने और इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए दुनिया भर में अलग-अलग अभियान चलाए जा रहे हैं। कुछ समय पहले यह खबर आई थी कि समुद्री जीवों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच रहा है, जिससे उनकी मौत हो रही है।
अब नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली रिसर्च की है। उन्होंने इंसान के खून में भी प्लास्टिक के टुकड़े ढूंढ निकाले हैं। ऐसा दुनिया में पहली बार हुआ है। ये टुकड़े दिखने में बहुत छोटे यानी माइक्रोप्लास्टिक हैं। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 22 लोगों के नमूने लिए थे, जिनमें से 17 के खून में प्लास्टिक के पार्टिकल पाए गए। इस बात को बेहद चिंताजनक बताया जा रहा है।
पहले जान लें, क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक?
माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर या इससे कम आकार के छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं। यह इतने छोटे होते हैं कि बिना मैग्निफाइंग ग्लास के इन्हें आंखों से देख पाना मुश्किल है। वैज्ञानिक अभी भी इन छोटे पार्टिकल्स के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। ये पानी, खाने के सामान और जमीन की सतह जैसी जगहों में मौजूद रहते हैं। इनके जरिए ये शरीर में पहुंचते हैं।
खून में मिले 5 तरह के माइक्रोप्लास्टिक
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को इंसानों के खून में 5 तरह के प्लास्टिक मिले हैं। इनमें मुख्य रूप से पॉलीमेथाइल मेथैक्रिलेट (PMMA), पॉलीप्रोपाइलीन (PP), पॉलीस्टाइनिन (PS), पॉलीइथाइलीन (PE), और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) शामिल हैं।
शरीर में जा रहा बॉटल, फूड पैकेज का प्लास्टिक
इसके अलावा 23% लोगों में पॉलीइथाइलीन (PE) मिला, जो प्लास्टिक बैग में पाया जाता है। केवल एक व्यक्ति में पॉलीमेथाइल मेथैक्रिलेट (PMMA) मिला और किसी भी खून के नमूने में पॉलीप्रोपाइलीन (PP) नहीं था।
शरीर में ऐसे होती है प्लास्टिक की एंट्री
प्लास्टिक हवा के साथ-साथ खाने-पीने की चीजों से भी इंसान के शरीर में एंट्री कर सकता है। लोगों को यह पता ही नहीं होता कि प्लास्टिक के छोटे-छोटे पार्टिकल खाने, पानी पीने और सांस लेने के दौरान उनके शरीर के अंदर जा रहे हैं।
हो सकती हैं कई तरह की बीमारियां
कहते हैं एक्सपर्ट्स?
नीदरलैंड्स के व्रीजे यूनिवर्सिटी एम्स्टर्डम के प्रोफेसर डिक वेथाक ने कहा कि चिंतित होना उचित है क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक के ये पार्टिकल इंसान के पूरे शरीर में भी जा सकते हैं। ये एक जानलेवा बीमारी का कारण भी बन सकते हैं। अभी इस विषय पर और रिसर्च की जरूरत है।
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