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आंसू निकलना भी होता है फायदेमंद जानिए, कैसे
Eye Health: अभी तक आपने सुना होगा कि हंसना सेहत के लिए फायदेमंद होता है लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं कि रोने के भी बहुत से फायदे हैं.
Eye Care Tips: अगर हंसना-मुस्कराना सेहत (Health) के लिए अच्छा माना जाता है तो रोना भी कहीं से खराब नहीं. जितने ज्यादा फायदे हंसने के है, रोने के भी उतने ही फायदे (Benefits of Tears) माने जाते हैं. फिर चाहे आप किसी मूवी या सीरियल को देख इमोशनल हो रहे हैं या फिर प्याज काटते वक्त आपके आंसू निकल रहे हों.
रिसर्च कहती है कि आपकी हेल्दी आंखों के लिए आंसू काफी जरूरी है. यह आपकी आंखों को गीला और चिकना रखते हैं. इंफेक्शन और गंदगी से भी बचाते हैं. ये आपकी आंखों को साफ रखते हैं और हेल्दी भी बनाते हैं. तो यहां जानिए आखिर क्यों निकलते हैं आंसू और इसके क्या-क्या होते हैं फायदे..
आंसू क्यों निकलते हैं?
इंसान के रोने के पीछे पूरी तरह से साइंस (Science) काम करता है. जब हम या आप इमोशनल (Emotional) होते हैं, प्याज का कोई तीखी चीज काटते हैं, आंखों में कुछ चला जाता है तब आंसू निकलते हैं. आंसू आंख की अश्रु नलिकाओं से निकलने वाला तरल पदार्थ है, जो पानी और नमक के मिश्रण से बना होता है. इसमें तेल, बलगम और एंजाइम नामक केमिकल भी पाया जाता है, जो कीटाणु को मार हमारी आंखों को हेल्दी रखता है.
तीन तरह के होते हैं आंसू
आप नहीं जानते होंगे कि इंसान की आंखों से तीन तरह के आंसू निकलते हैं. चलिए बताते हैं
Basal Tears- इस तरह के आंसू आंखें झपकने पर निकलते हैं. ये आंखों में नमी बनाए रखने का काम करते हैं. ये नॉन-इमोशनल आंसू होते हैं.
Reflex Tears– ये भी नॉन-इमोशनल आंसू ही होते हैं. ये आंखों के हवा, धुएं, घूल के पड़ने से आते हैं.
Emotional Tears- दुख, निराशा, गम होने पर जो आंसू निकलते हैं वे इमोशनल आंसू होते हैं.
आंसुओं के फायदे ही फायदे
नीदरलैंड्स की स्टडी के मुताबिक रोने से आप रिलैक्स फील करते हैं और आपका मूड अच्छा होता है.
आंसू में लाइसोजोम (Iysozyme) नाम का फ्लूइड पाया जाता है, जिसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह हमारी आंखों को संक्रमण से बचाता है और आंखों को साफ करता है.
रोने से इमोशन कंट्रोल होती हैं और मानसिक तनाव से राहत मिलती है
रोने से बॉडी में ऑक्सीटोसिन और एंडोर्फिन हॉर्मोन बनते हैं जो शारीरिक और भावनात्मक दर्द से आराम दिलाते हैं.
आंसू निकलनेसे आंखें सूखती नहीं और उसकी नमी बरकरार रहती है, जिससे आखों की रोशनी बढ़ती है.
जब कोई शख्स आंखें झपकाता है, तो बेसल टियर निकलती हैं तो म्यूकस में ब्रेन को सूखने से बचाते हैं.
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क्या आप भी AC का टेंपरेचर 24 -25 से कम रखते है तो हो जाइये सावधान

Best Temperature For Ac: गर्मी में एसी चलाने से राहत मिल जाती है, लेकिन ज्यादा कम तापमान पर एसी चलाना सेहत को नुकसान देता है, जानिए कितने तापमान पर चलाना चाहिए AC और ज्यादा AC में रहने के नुकसान.
AC Temperatures Harmful: बारिश के मौसम में ह्यूमिडिटी सबसे ज्यादा परेशान करती है. ऐसे में पसीना और चिपचिपाहट से सिर्फ एसी में बैठने पर ही राहत मिलती है. कुछ लोगों को इतनी गर्मी लगती है कि वो एसी के ठीक सामने बैठना या सोना ही पसंद करते हैं और एसी का टेंपरेचर भी 18-20 ही रखते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो सावधान हो जाएं. एसी को बहुत कम टेंपरेचर पर चलाना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है. इससे आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. आइये जानते हैं एसी को किस टेंपरेचर पर चलाना चाहिए और ज्यादा कम पर एसी चलाने से क्या नुकसान होते हैं.
24-25 डिग्री पर ही एसी चलाएं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको एसी 24-25 डिग्री पर चलाना चाहिए. इससे कम एसी चलाकर रखना आपके स्वास्थ्य पर विरपरीत असर डालता है. सर्दी हो या गर्मी बाहर से तापमान से कमरे या घर के तापमान में एक्सट्रीम बदलाव नहीं होना चाहिए. हमारे शरीर के तापमान की तुलना में बहुत कम तापमान पर सेट किए गए एसी कमरे से नमी को गायब कर देते हैं. जिससे त्वचा को नुकसान होता है. ऐसे में त्वचा से पसीना कम निकलता है और ऑयल ज्यादा निकलने लगता है. इससे मुँहासे, समय से पहले झुर्रियाँ और त्वचा में जलन पैदा हो सकती है. एक्सट्रीम हाई टेंपरेचर में त्वचा के पोर्स बंद हो सकते हैं, जिससे स्किन के फंक्शन पर असर पड़ता है.
कम टेंपरेचर पर एसी चलाने के नुकसान
ज्यादा तापमान पर एसी चलाने से शरीर का थर्मल रेगुलेशन प्रभावित होता है.
ठंडी और ड्राई हवा में वायरस और जर्म्स जल्दी पैदा होते हैं और फैलते हैं.
ज्यादा कम एसी चलाने से अस्थमा और माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है.
जो लोग ज्यादा AC में रहते हैं वो समय से पहले बूढ़े लगने लगते हैं. ऐसे लोगों की त्वचा पर जल्दी झुर्रियां आने लगती हैं.
बालों का झड़ना, नाक बंद होना और गला सूखने जैसी परेशानियां होती हैं.
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स्वस्थ रहना चाहते है तो इतनी मात्रा में करे शराब का सेवन
Alcoholic Liver Disease: शराब लिवर के लिए बहुत खतरनाक है. अगर आप सीमित मात्रा में शराब पीते हैं तो इतना नुकसान नहीं पहुचता. जानिए कितनी मात्रा में पीनी चाहिए शराब.
Liver Damage From Alcohol: लिवर हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगो में से एक है. स्वस्थ रहने के लिए लिवर का हेल्दी रहना बहुत जरूरी है. लिवर के बिना कोई व्यक्ति जीवित नहीं रह सकता है. आपकी ओवरऑल हेल्थ को बनाए रखने में लिवर अहम भूमिका निभाता है. ऐसे में लिवर को स्वस्थ रखने की कोशिश करनी चाहिए. हालांकि आजकल की लाइफस्टाइल में शराब शामिल है. ज्यादातर लोग अल्कोहल का सेवन करते हैं, जो लिवर के लिए खतरनाक है.
शराब से लिवर संबंधी बीमारियां पैदा होती है. इससे लिवर में सूजन या लिवर फेल होने का खतरा रहता है. ज्यादा शराब पीने से लिवर में स्कार्स पड़ जाते हैं जिसे सिरोसिस के रूप में जाना जाता है. इसलिए अगर आप ड्रिंक करते हैं तो आपको ये जानना जरूरी है कि आपको कितनी मात्रा में शराब पीनी चाहिए, जिससे लिवर को नुकसान न पहुंचे.
कितनी मात्रा में शराब पीनी चाहिए?
ड्रिंकवेयर के अनुसार, शराब से संबंधित फैटी लीवर की बीमारी ऐसे 90 प्रतिशत लोगों में विकसित होती है, जो हर रोज 40 ग्राम या 4 यूनिट से ज्यादा शराब का सेवन करते हैं. ये करीब 12 प्रतिशत एबीवी के 2 मीडियम गिलास वाइन के बराबर और 4 प्रतिशत एबीवी रेगुलर स्ट्रेंथ के 2 पिंट्स से कम होगी.
शराब का लिवर पर असर
जब हम शराब पीते हैं तो लिवर अल्कोहल जैसे जहरीले पदार्थों को कम करने का काम करता है. लीवर में पाए जाने वाले एंजाइम अल्कोहल को तोड़ने का काम करते हैं और इसे शरीर से बाहर निकालने में मदद करते हैं. हालांकि लंबे समय तक ऐसा करने से लिवर पर असर पड़ने लगता है. इससे फैटी लिवर की समस्या शुरु होती है. लिवर पर सूजन आने लगती है और स्कार्स बनने लगते हैं.
हालांकि लिवर में रिजेनरेट होने की क्षमता होती है, लेकिन कई बार अल्कोहल को फिल्टर करते वक्त लिवर की कुछ सेल्स डेड हो जाती हैं. लंबे समय तक अल्कोहल का सेवन करने से लिवर धीरे-धीरे डैमेज होने लगता है. अगर आप शराब पीना बिल्कुल बंद कर देते हैं तो इससे लिवर में सुधार आने लगता है.
महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है अल्कोहल
अगर आप एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा में ड्रिंक लेते हैं और आपको पहले से कोई लिवर से संबंधित बीमारी है या फिर आप हेपेटाइटिस सी से प्रभावित रहे हैं तो ये लिवर के लिए खतरनाक हो सकता है. इससे एआरएलडी का खतरा बढ़ जाता है. वहीं पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में शराब पीने से लिवर से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखी गई है.
लिवर के लिए टेस्ट
अगर आप ड्रिंक करते हैं तो आपको समय-समय पर लिवर का टेस्ट करवाते रहना चाहिए. लिवर के टेस्ट के लिए आप कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC), लिवर फंक्शन टेस्ट जिसमें लिवर एंजाइम टेस्ट शामिल हो, एक एब्डोमिनल कंप्यूटेड टोमोग्राफी सीटी स्कैन (an abdominal computed tomography CT scan), एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड और लिवर बायोप्सी करा सकते हैं.
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Bhindi Benefits For Diabetes: डायबिटीज मरीजों के लिए भिंडी का सेवन कैसे फायदेमंद है जानिए
Bhindi Benefits For Diabetes आज हम बता रहे हैं कि कैसे भिंडी डायबिटीज़ और कैंसर के मरीज़ों के लिए किसी रामबाण से कम नहीं होती। इसे सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि यह पोटैशियम विटामिन-बी विटामिन-सी फॉलिक एसिड और कैल्शियम से भरपूर होती है।
नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Bhindi Benefits For Diabetes: भिंडी एक ऐसी सब्ज़ी है जिसे शायद ही कोई नापसंद करता हो। अगर आप भी भिंडी के फैन हैं, तो आपके लिए खुश ख़बरी है। भिंडी न सिर्फ डायबिटीज़ के मरीज़ों बल्कि कैंसर के लिए किसी रामबाण से कम नहीं। आप शायद ही जानते हों कि भिंडी को सुपरफूड माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें पोटेशियम, विटामिन-बी, विटामिन-सी, फॉलिक एसिड और कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है। यह कैलोरी में कम और फाइबर से भरी होती है।
डायबिटीज़ में कैसे लाभदायक है भिंडी
ऐसा देखा गया है कि अगर आपकी डायबिटीज़ शुरुआती स्तर पर है, तो भिंडी से आपको काफी फायदा हो सकता है। स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने भिंडी का पानी पिया उनका ब्लड शुगर स्तर नीचे जाने लगता है। यहां तक कि तुर्की में डायबिटीज़ के इलाज के लिए सदियों से भुनी हुई भिंडी का इस्तेमाल होता आ रहा है।
कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करती है भिंडी
शोध में पाया गया कि मधुमेह वाले लोगों में उच्च कोलेस्ट्रॉल होने की संभावना ज़्यादा होती है। इसलिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को मैनेज करने के लिए एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर फूड्स का सेवन बेहतर साबित होता है। मधुमेह की जटिलताओं को कम करने के लिए अच्छी हेल्थ बनाए रखना ज़रूरी है।
फाइबर से भरपूर होती है भिंडी
भिंडी में फाइबर काफी होता है, जो मधुमेह के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उच्च फाइबर के कारण इसे एंटी-डायबिटिक फूड भी माना जाता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को कंट्रोल में करता है। यह बेहतर ग्लाइसेमिक नियंत्रण को भी बढ़ावा देता है और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है। यह न सिर्फ डायबिटीज़ बल्कि, अपच, भूख कम करना और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखना स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है।
एंटीऑक्सीडेंट्स भी हैं खूब
भिंडी एंटीऑक्सिडेंट से भी भरपूर होती है, जो तनाव के स्तर को कम करती है। डायबिटीज़ में डाइट के साथ हमारी लाइफस्टाइल भी मायने रखती है। डायबिटीज़ के प्रबंधन के लिए तनाव पर कंट्रोल करना भी ज़रूरी है।
भिंडी को डाइट में कैसे शामिल करें?
– भिंडी को बनाने के कई तरीके हैं, इसमें प्याज़ और टमाटर मिलाकर तैयार किया जा सकता है।
– भिंडी को काटकर पानी में रात भर डुबोकर रख दें, फिर सुबह उठकर इसका पानी पिएं।
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