देश - दुनिया
नस्लीय विवाद के बाद : रश्मि सामंत को देना पड़ा इस्तीफा
विश्व की सबसे मशहूर यूनिवर्सिटीज में से एक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय मूल की प्रेसिडेंट बनीं रश्मि सामंत (Rashmi Samant) ने इस्तीफा दे दिया है. रश्मि ने ये इस्तीफा नस्लीय टिप्पणी के बाद दिया है. अपने इस्तीफे की घोषणा उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए की.
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद
रश्मि भारत के मणिपाल से हैं. हाल ही में उन्हें ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन का अध्यक्ष चुना गया था. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट डाली थी जिसके बाद विवाद हुआ और रश्मि ने पद त्यागने का फैसला किया.
दरअसल, रश्मि सामंत ने कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं जिसमें वह मलेशिया के बुद्ध मंदिर के बाहर खड़ी हैं. इसके कैप्शन में उन्होंने लिखा था- चिंग चांग. उनका ये लिखना ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे चीनी स्टूडेंट्स को पसंद नहीं आया और इसी को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद रश्मि सामंत ने ओपन लेटर लिखकर सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी.
ओपन लेटर में लिखकर दिया इस्तीफा
रश्मि सामंत ने अपने ओपन लेटर में लिखा, ‘अगर किसी को मेरी पोस्ट से तकलीफ पहुंची है, तो मैं माफी चाहती हूं. मैं हर किसी का सम्मान करती हूं. आने वाले समय में मैं यूनिवर्सिटी के हर स्टूडेंट से बात करेंगी और अपनी भावनाओं को उनके सामने रखेंगी. ‘
इस पूरे विवाद पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन की तरफ से बयान जारी किया गया है और कहा गया है कि मामले में जीरो टॉलरेंस नीति को अपनाते हुए रश्मि सामंत का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.
स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट पद को पाने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं रश्मि
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय छात्र संघ की अध्यक्ष चुनीं गईं रश्मि सामंत इस पद को पाने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं.
सामंत विश्वविद्यालय के लिनाक्रे कॉलेज से ऊर्जा प्रणाली विषय पर एमएससी कर रही हैं. चुनाव में उन्होंने 3,708 मतों में से 1,966 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी. सामंत ने कर्नाटक में मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पढ़ाई की है. छात्र संघ की 2021-22 के लिए निर्वाचित अध्यक्ष सामंत की टीम में कुछ और भारतीय भी हैं जिनमें देविका वाइस-प्रेसिडेंट ग्रेजुएट्स इलेक्ट तथा धीति गोयल स्टूडेंट ट्रस्टीज इलेक्ट पद के लिए चुनी गई हैं.


देश - दुनिया
Corona Update: देश में बीते 24 घंटे में मिले 13 हजार नए केस, 302 की हुई मौत…

देश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हो गई है। बीते 24 घंटे में 13 हजार से ज्यादा नए संक्रमित पाए गए वहीं, 302 मौतों की खबर है। इस दौरान 26,988 संक्रमित स्वस्थ हुए हैं। देश में कोरोना के सक्रिय केस की संख्या फिलहाल 1,34,235 है। वहीं दैनिक सकारात्मकता दर 1.28 फीसदी है। अब तक कुल 4,22,884 लोग महामारी से स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं कुल मृतक संख्या 5,13,226 हो गई है। टीकाकरण भी तेजी से जारी है। अब तक 1,76,86,89,266 खुराक देश के लोगों को दी जा चुकी है।
देश
इतने रुपये तक महंगा बढ़ सकता है पेट्रोल-डीजल,चुनाव बाद; जानें ये बड़े कारण…
रूस की तरफ से यूक्रेन पर हमला किये जाने के बाद वैश्विक स्तर पर इसका अलग-अलग तरह से असर पड़ रहा है. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल सात साल के हाई लेवल 103.78 डॉलर पर पहुंच गया है. इससे पहले अगस्त 2014 में क्रूड ऑयल का दाम 105 डॉलर प्रति बैरल तक गया था. तेल के दामों में तेजी का असर आने वाले समय में घरेलू बाजार में देखने को मिलेगा.मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जानकारों का कहना है कि 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल और डीजल के रेट में 15 रुपये तक की बढ़ोतरी संभव है.
हालांकि इसमें राहत वाली बात यह रहेगी कि कीमतों में बढ़ोतरी तेल कंपनियों की तरफ से दो से तीन चरण में लागू की जाएगी. आइए जानते हैं वो तीन बड़े कारण जिनकी वजह से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं.पिछले करीब ढाई महीने से कच्चे तेल की कीमत में 27 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है. क्रूड का दाम बढ़कर 103 डॉलर के पार पहुंच गया है. भारत अपनी तेल तेल जरूरत का 85 प्रतिशत आयात करता है. क्रूड ऑयल के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने के बाद पेट्रोल-डीजल के भाव में इजाफा तय माना जा रहा है.देश की बड़ी तेल कंपनियों ने दिवाली के बाद पेट्रोल और डीजल के रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है.
उस समय से अब तक कच्चा तेल 20 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा महंगा हो गया. कीमतें स्थिर रखने से कंपनियों के प्रॉफिट पर असर पड़ रहा है. फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल 95.41 रुपये और डीजल 86.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। इस कारण भी तेल कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं.रूस-यूक्रेन युद्ध से कच्चे तेल के उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ेगा. रूस दुनिया का बड़ा तेल उत्पादक देश है और प्राकृतिक गैस का निर्यातक है. भारत इन दोनों ही चीजों का आयात करता है. ऐसे में आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी का अनुमान है. जानकारों का कहना है
युद्ध लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर तक पहुंच सकती हैं.प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित होने से आने वाले समय में घरेलू बाजार में रसोई गैस और सीएनजी के दाम में भी तेजी आने की संभावना है. जानकारों का मानना है कि नेचुरल गैस और सीएनजी के रेट भी 10 से 15 रुपये तक बढ़ सकते हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक सरकारी अधिकारी ने दावा किया कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच भारत की तेल आपूर्ति व्यवस्था पर कोई असर नहीं हुआ है. उन्होंने दावा किया यदि लड़ाई तेज होती है तब भी आपूर्ति पर असर नहीं पड़ेगा. हमारे आपूर्तिकर्ता पश्चिम एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में हैं. उन पर इस हमले का असर नहीं है.
देश
यूक्रेन पर रूस के हमले तेज,137 यूक्रेन नागरिकों की मौत…

यूक्रेन पर रूस के हमले का 25 फरवरी, गुरुवार को दूसरा दिन है। हमले तेज हो गए हैं। अब तक 137 यूक्रेन नागरिकों की मौत हो चुकी है। रूस को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच, युद्ध के दूसरे दिन यूक्रेन के लिए बुरी खबर आई। अमेरिका और नाटो देशों ने यूक्रेन में सेना भेजने से इन्कार कर दिया है। इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस द्वारा बड़े पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद पहले दिन 130 से अधिक यूक्रेनियन मारे गए हैं।
ऐसे हालात में पूरी दुनिया ने उन्हें जंग के मैदान में अकेला छोड़ दिया है।रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को 48 घंटों से अधिक का वक्त हो गया है और दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति के ताजा बयान से जंग जल्द खत्म होने की उम्मीद बढ़ी है। राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने ताजा बयान में झुकने के संकेत दिए हैं। राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि हम रूस से वार्ता को तैयार हैं। गुजारिश करते हैं कि सब कुछ खत्म हो, इससे पहले रूस राष्ट्रपति वार्ता के लिए तैयार हो जाएं।
अब रूस के जवाब की पूरी दुनिया को प्रतिक्षा है।रूसी सेनाओं ने बुधवार को ही बेलारूस के रास्ते यूक्रेन में प्रवेश कर लिया था। ताजा खबर है कि रूसी सैनिक यूक्रेन की राजधानी कीव तक पहुंच चुकी है।। कीव में लगातार हवाई हमले हो रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, आशंका है कि किसी भी वक्त यूक्रेन में सरकार को गिराया जा सकता है। रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुरू से यही चाहते हैं कि वहां उनके समर्थन वाली सरकार हो और रूस अपने इस लक्ष्य पर कभी भी पहुंच सकता है।हमले के खिलाफ रूस में ही भड़का गुस्सा: यूक्रेन पर हमले के बाद रूस में ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विरोध शुरू हो गया है।
यहां मास्को समेत 53 शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। लोग सड़कों पर उतर आए। पुलिस ने 1700 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है। वहीं जंग के मैदान में यूक्रेन की कोई मदद नहीं करने के खिलाफ अमेरिका में भी राष्ट्रपति जो बाइडन का विरोध शुरू हो गया है।इससे पहले यूक्रेन पर रूसी हमले के मुद्दे पर जी-7 देशों के साथ चर्चा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका यूक्रेन में अपनी सेनाएं नहीं भेजेगा। बाइडन ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन को हमलावर बताते हुए कहा कि उन्होंने युद्ध को चुना है। इस दौरान उन्होंने रूस के खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा भी की।
इनमें रूसी बैंकों और सरकारी कंपनियों के खिलाफ प्रतिबंधों से लेकर दुनिया की प्रमुख मुद्राओं में कारोबार करने की रूसी क्षमताओं को बाधित करना शामिल है।व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया रूस के खिलाफ एकजुट है। इस हमले का हम जबाव दिए बिना नहीं रहेंगे। अमेरिका स्वतंत्रता के साथ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रूस से कोई साइबर हमला हुआ तो अमेरिका उसका जवाब देने के लिए तैयार है। बाइडन ने नाटो सहयोगियों के खिलाफ रूसी हमले से बचाव के लिए और अमेरिकी सैनिक भेजने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यह पूरे यूरोप के लिए खतरनाक क्षण है और यह हमला रूस के लिए कभी भी सुरक्षा की वास्तविक चिंता के लिए नहीं था।
यूक्रेन के कई शहरों को रूसी टैंकों ने रौंदा, अब तक नहीं मिली विदेशी मदद
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा यह पूर्वनियोजित हमला है और पुतिन ने वार्ता के पश्चिम के प्रयासों को ठुकरा दिया और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया। उन्होंने बताया कि प्रतिबंध इस तरह के हैं कि उनका रूस पर दीर्घकालिक असर होगा। अमेरिका इस दिशा में और कार्रवाई करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों से रूस की डालर, यूरो, पौंड और येन में कारोबार करने की क्षमता बाधित होगी। इसके अलावा आगे के कदमों पर विचार के लिए शुक्रवार को नाटो देशों की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि पुतिन का यूक्रेन के खिलाफ आक्रमण रूस के लिए काफी महंगा साबित होगा। विश्व मंच पर पुतिन को बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
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