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Sri Lanka : श्रीलंका को डुबोने के पीछे इसका है हाथ,जानिए

Sri Lanka News : श्रीलंका में आर्थिक हालात खराब हैं। जो जनता अभी तक सड़कों पर परेशान घूम रही थी वह अब राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास में डेरा जमा चुकी है। लेकिन श्रीलंका इस हालात तक कैसे पहुंचा। श्रीलंका की बर्बादी में सबसे बड़ा कारण चीन और राजपक्षे परिवार रहा है। आइए जानते हैं कैसे?भारत के करीब का टापू देश श्रीलंका इन दिनों अपनी खराब आर्थिक स्थिति से जूझ रहा है। श्रीलंका के बर्बाद होने में उसके नेताओं के साथ-साथ चीन का भी हाथ है। श्रीलंका के हालात उन देशों के लिए भी वार्निंग हैं जो चीन की दोस्ती को शहद से भी मीठी समझ लेते हैं।
उन्हें ये समझना चाहिए कि उनकी ये मिठास उन्हें शुगर का मरीज बना सकती है। लेकिन श्रीलंका चीन के कारण कैसे बर्बाद हो गया? दरअसल श्रीलंका के बर्बाद होने के कई कारणों में चीन सबसे बड़ा कारण रहा है।एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी के मुताबिक लगभग दो दशक तक राजपक्षे परिवार ने श्रीलंका पर राज किया।
उन्होंने इसे एक देश की तरह नहीं बल्कि फेमली बिजनस की तरह चलाया। श्रीलंका में होने वाली भव्य निर्माण परियोजनाओं और खर्च करने के खराब तरीकों के साथ-साथ उन्होंने श्रीलंका को कर्ज के बोझ तले दबा दिया। इस कारण श्रीलंका आजादी के बाद से अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट पर पहुंच गया। 2005 में जब महिंदा राजपक्षे राष्ट्रपति बने तो बड़ी ही मजबूती के साथ 10 साल तक राज किया। लेकिन 2015 में वह चुनाव हार गए और राजपक्षे परिवार सत्ता से बेदखल हो गया।
भाई गोटबया राजपक्षे बने राष्ट्रपति
2015 की हार के बाद महिंदा के भाई गोटबया राजपक्षे राष्ट्रपति की उम्मीदवारी में आए। इसके लिए उन्होंने अपनी अमेरिकी नागरिकता तक छोड़ दी। वह एक बेहतर उम्मीदवार साबित हुए, क्योंकि 2009 में तमिल टाइगर विद्रोहियों को पूरी तरह खत्म करने के दौरान वह डिफेंस सेक्रेटरी थे। विद्रोहियों के खत्म होते ही राजपक्षे भाई देश के सिंहली समुदाय की नजर में एक हीरो बन गए। 2019 में गोटबया सत्ता में आ गए। उन्होंने अपने भाई और बेटों को मंत्री बनाया। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रीलंका को लगातार नरसंहार के मामले में घेरा जाने लगा। राजपक्षे परिवार के लोगों पर UN में युद्ध अपराध का मामला चलाने की बात आई, लेकिन चीन ने उन्हें बचा लिया।
चीन ने श्रीलंका को कैसे किया बर्बाद
चीन के अहसान का बदला चुकाने के लिए राजपक्षे परिवार पूरी तरह उसके आगे नतमस्तक हो गया। चीन को यहां बड़े-बड़े निर्णाण के ठेके मिले। इसके साथ ही चीन ने बड़ी ब्याज दरों पर श्रीलंका को कर्ज दिया। इसके अलावा राजपक्षे परिवार के गृह जिले हंबनटोटा में बड़े पैमाने पर बेफिजूल के निर्माण किए गए। जैसे दुनिया का सबसे खाली एयरपोर्ट, एक ऐसा क्रिकेट स्टेडियम जिसमें बैठने की क्षमता जिले की राजधानी की आबादी से भी ज्यादा है। इसके अलावा 1.4 बिलियन डॉलर की लागत से बना हंबनटोटा बंदरगाह जिसे चीन ने 2017 में 99 साल के लिए लीज पर ले लिया। इन सब के अलावा चीन के भारी भरकम कर्ज, जिसकी एक शर्त ये भी होती है कि उसकी डिटेल्स पब्लिक को नहीं बताई जा सकती।
चीन का श्रीलंका में क्या फायदा
चीन की कार्यप्रणाली देश के ताकतवर लोगों के साथ डील करना और उनकी बदौलत देश की कमजोरियों का फायदा उठाने की है। चीन श्रीलंका में घुस रहा है, इसे लेकर 2014 में ही चेतावनी दी गई थी, जब दो चीनी पनडुब्बियां बिना बताए अलग-अलग समय पर कोलंबो पहुंच गई थीं। यहां वह नए बने बंदरगाह पर रुकीं जिसे ज्यादातर चीनी कंपनियां कंट्रोल करती हैं। इसके अलावा श्रीलंका में घुसने से चीन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़त हासिल कर सकेगा।
चीन का श्रीलंका में क्या फायदा
चीन की कार्यप्रणाली देश के ताकतवर लोगों के साथ डील करना और उनकी बदौलत देश की कमजोरियों का फायदा उठाने की है। चीन श्रीलंका में घुस रहा है, इसे लेकर 2014 में ही चेतावनी दी गई थी, जब दो चीनी पनडुब्बियां बिना बताए अलग-अलग समय पर कोलंबो पहुंच गई थीं। यहां वह नए बने बंदरगाह पर रुकीं जिसे ज्यादातर चीनी कंपनियां कंट्रोल करती हैं। इसके अलावा श्रीलंका में घुसने से चीन दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़त हासिल कर सकेगा।
बर्बादी के ये भी रहे हैं कारण
श्रीलंका की बर्बादी का कारण चीन तो रहा है। लेकिन राजपक्षे परिवार की नीतियां भी इस टापू देश को डुबाने में पीछे नहीं रही हैं। 2019 में टैक्स में बड़ी कटौती की गई, जिससे देश का एक तिहाई कर सरकार के खजाने से गायब हो गया। इसके बाद महामारी के कारण श्रीलंका का टूरिज्म और कपड़ा उद्योग प्रभावित हुआ। जब इन समस्याओं से श्रीलंका जूझ रहा था, इसी बीच रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हो गया। ये वो कारण था जो श्रीलंका की अर्थव्यवस्था के ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ। तेल और अनाज की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिसके कारण श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो गया। अब जनता के सब्र का बांध टूट गया है। वह राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री भवन में कब्जा जमा चुकी है।
ज्योतिष
VASTU TIPS: इस सावन मास में तुलसी के पौधे के साथ लगाये ये पौधा, बनी रहेगी शिव जी की अपार कृपा…

Vastu Tips: सावन शुरू हो चुका है और वो मौसम आ चुका है जब आप जो भी पौधे लगाएं बारिश की वजह से आसानी से लग जाते हैं। इस मौके पर कुछ ऐसे पौधे हैं जिन्हें लगाने से न सिर्फ आपकी किस्मत खुल सकती है बल्कि आपके पास पैसों की कमी भी नहीं होती है। सावन बहुत ही पवित्र महीना है, इस महीने में तुलसी का पौधा लगाना बेहद शुभ होता है। लेकिन तुलसी के साथ कुछ और भी पौधे हैं जिन्हें अगर आप इस महीने में लगाते हैं तो ये आपके लिए बेहद शुभ होगा और सौभाग्य लेकर आएगा।
वास्तु शास्त्र के अनुसार सावन महीने में अगर आप तुलसी के साथ दूसरे पौधे लगाते हैं तो आपके घर में मां लक्ष्मी की कृपा होती है। तो आइए हम आपको बताते हैं वो कौन-कौन से पौधे हैं जिन्हें आप सावन के महीने में तुलसी के साथ लगाकर अपनी किस्मत बदल सकते हैं।
बेल का पौधा
बेल भगवान शिव का पसंदीदा फल है इसकी पत्तियां भी महादेव को अर्पित की जाती हैं। अगर आप घर में बेल का पेड़ लगाते हैं तो घर के वास्तु दोष मिट जाते हैं। इसलिए सावन के महीने में बेल का पौधा लगाएं और घर में अपार सुख और पैसा मिलेगा।
केले का पौधा
सावन में घर में केले का पौधा लगाना शुभ होता है। तुलसी और केले का पौधा साथ लगाने से घर की परेशानियां दूर होती हैं, बस इस बात का ध्यान रखें ये दोनों पौधे साथ न लगाएं, केले को दाहिनी और तुलसी के पौधे को बाईं ओर लगाएं।
शमी का पौधा
शमी का पौधा घर में लगाना बेहद शुभ होता है। इसे घर में लगाने से शिव के साथ शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं। तुलसी के साथ शमी का पौधा लगाने से दोगुनी कृपा मिलती है।
धतूरे का पौधा
शिव जी को धतूरा बहुत प्रिया है, अगर सावन में आप धतूरे का पौधा लगाते हैं तो भोलेनाथ की कृपा आपपर बरसेगी। सावन में रविवार या मंगलवार को धतूरे का पौधा लगाना चाहिए।
चंपा का पौधा
सावन के महीने में चंपा लगाने से भगवान की कृपा घर में होती है, वास्तु के अनुसार उत्तर-पश्चिम दिशा में इस पौधे को लगाने से घर में धन-दौलत आती है।
Tech & Auto
भारत के इस राज्य में शुरू होगी रॉकेट इंजन बनाने वाली फेक्ट्री, फैक्ट्री में 30-35 लोग करेंगे काम

फैक्ट्री में 30-35 के लगभग लोग काम करेंगे। इनमें से 90% लोग फैक्ट्री में पहले से ही काम पर लगा दिए गए हैं। Agnikul को रविचंद्रन ने आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर मॉइन एसपीएम और एस आर चक्रवर्ती के साथ मिलकर 2017 में बनाया था। कंपनी Agnibaan बनाने का काम करती है। Agnibaan एक 2-स्टेज लॉन्च व्हीकल है जो अपने साथ 100 किलो तक का पे-लोड 700 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर लेकर जा सकता है और उसे पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर सकता है।
अग्निकुल ने दिसंबर 2020 में ISRO के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता IN-SPACe के तहत हुआ था जिसमें इसरो की एक्सपर्टीज और फैसिलिटी का इस्तेमाल रॉकेट इंजनों का निर्माण करने के लिए किया जा सकता है। इसी के तहत अग्निकुल अब इसरो के साथ मिलकर रॉकेट इंजन बनाने की शुरुआत करने जा रही है।
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