प्रधानमंत्री से कांग्रेस का सवाल- सब कुछ बेच दे रहे हैं तो आत्मनिर्भर कैसे बनेगा भारत?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के 74वें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित किया. उनके संबोधन का मुख्य केंद्र बिन्दु आत्म निर्भर भारत था.
देश के 74वें स्वाधीनता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले (Red fort) के प्राचीर से देश को संबोधित किया. शनिवार को उनके संबोधन का मुख्य केंद्र बिन्दु आत्म निर्भर भारत (Aatma Nirbhar Bharat) था. उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आगे आएं. प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनना ही होगा. प्रधानमंत्री के संबोधन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सूरजेवाला ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत की बुनियाद पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों ने रखी थी. अब जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं तो यह सवाल पूछना पड़ेगा कि जो सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को बेच दे और रेलवे एवं हवाई अड्डों का निजीकरण कर रही हो, वो इस देश की आजादी को सुरक्षित रख पाएगी?’
पीटीआई के अनुसार सूरजेवाला ने सवाल किया, ‘हर भारतवासी सोच रहा है कि आज आजादी के मायने क्या हैं? क्या हमारी सरकार लोकतंत्र में विश्वास रखती है, जनमत और बहुमत में विश्वास रखती है? इस देश में बोलने, सोचने, कपड़ा पहनने और आजीविका कमाने की आजादी है या कहीं न कहीं इन पर अंकुश लग गया है?’
मोदी ने कहा- विश्व कल्याण के लिए भारत की आत्मनिर्भरता जरूरी
गौरतलब है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ को विश्व कल्याण के लिए भी जरूरी बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी भी इस संकल्प से देश को नहीं डिगा सकती है. ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से अपने सातवें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में मोदी ने कहा कि भारत की संप्रभुता का सम्मान सर्वोपरि है और जिसने भी इस पर आंख उठाई, देश व देश की सेना ने उसे उसकी ही भाषा में जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ का नारा दिया और ‘राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य अभियान’ की घोषणा की.
पारम्परिक कुर्ता-पायजामा और माथे पर साफा पहने प्रधानमंत्री ने 86 मिनट के अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब सिर्फ आयात कम करना ही नहीं, अपनी क्षमता, अपनी रचनात्मकता, अपने कौशल को बढ़ाना भी है.
पीएम ने कहा कि सिर्फ कुछ महीने पहले तक एन-95 मास्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर ये सब विदेशों से मंगवाये जाते थे लेकिन आज इन सभी में भारत न सिर्फ अपनी जरूरतें खुद पूरी कर रहा है, बल्कि दूसरे देशों की मदद के लिए भी आगे आया है. उन्होंने कहा कि पिछले साल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
उन्होंने कहा, ‘भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. आज दुनिया की बहुत बड़ी-बड़ी कंपनियां भारत का रुख कर रही हैं. हमें ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ ‘मेक फॉर वर्ल्ड’ के मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है.’प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच भारतीयों ने आत्म-निर्भर होने का संकल्प लिया है और यह केवल शब्द नहीं बल्कि सभी लोगों के लिए मंत्र है.


Lifestyle
Vastu Tips: आईने को गलत दिशा में रखने से हो सकती है परेशनी, जाने इसे सही दिशा में रखने के उपाये…

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में लगे शीशे का किस्मत से खास कनेक्शन है. अगर दर्पण को सही दिशा में नहीं रखा जाए तो व्यक्ति के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. वहीं अगर शीशे को सही दिशा में लगाया जाए तो घर-परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है. साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बरकरार रहती है.
आइए जानते हैं कि आईने से जुड़े वास्तु टिप्स
आईने से जुड़े ये वास्तु टिप्स हैं खास -वास्तु शास्त्र के मुताबिक ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की तरफ चलती है. ऐसे में शीशे को पूरब या उत्तर की दीवार पर इस तरह से लगाना चाहिए ताकि देखने वाले का चेहरा पूरब या उत्तर की ओर रहे. वास्तु शास्त्र के मुताबिक दर्पण लगाने के लिए सबसे अच्छी दिशा पूरब, उत्तर या पूर्वोत्तर दिशा मानी गई है. इस दिशा में आईना लगाने से घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि आती है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की तिजोरी या आलमारी के सामने दर्पण लगाने से धन में बरकत होती है. आईना लगाते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह कहीं से भी टूटा हुआ नहीं हो. दरअसल ऐसा आइना निगेटिव एनर्जी उत्पन्न करता है. -वास्तु के मुताबिक बेडरूम में आईना कमरे के तरफ ही लगाना चाहिए. सोते वक्त शरीर का कोई भी हिस्सा आईने में नहीं दिखाई देना चाहिेए. क्योंकि इससे सेहत से संबंधित परेशानियां हो सकती हैं. -अगर कमरा छोटा होने के कारण आईना बेड से सामने ही है तो रात को सोते वक्त उस आईने को किसी कपड़े से ढक दें. इससे नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है. -वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के दक्षिण या पश्चिम दिशा में आईना नहीं लगाना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने घर में क्लेश बढ़ने लगते हैं. इसके अलावा कमरे की दीवारों पर शीशा आमने-सामने नहीं रखना चाहिए. इससे घर में तनाव उत्पन्न हो सकता है.
देश - दुनिया
कपड़े की दुकान में लगी भीषण आग, मौके पर पहुँचकर दमकल की गड़िया ने बुझाई आग…

चूरू के गांव साहवा में एक कपड़ों की दुकान में भीषण आग लग गई। ग्रामीणों ने आग पर कड़ी मशक्कत के बाद काबू पाया लेकिन तबतक सारा माल जलकर खाक हो गया। गांव साहवा के मुख्य बाजार में एक रेडीमेट कपड़ो की दुकान में बुधवार की रात आग लग गई। जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल हो गया। सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पर साहवा एसएचओ सुरेश कस्वां मय जाब्ते पहुंचे और स्थानीय लोगों की सहायता से समय रहते आग पर पानी डालकर काबू पा लिया गया नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। आसपास और भी कई कपड़ों की दुकानें थी। वहीं आग लगने के कारण का पता नहीं चल सका है। दुकान में कितना नुकसान हुआ, इसका भी आंकलन अभी नहीं हो पाया है। घटना को लेकर गुरुवार सुबह तक साहवा थाने में किसी प्रकार का मामला दर्ज नहीं हुआ है।
देश
बच्चे के गला में फसा ढक्कन,टीचर ने बचाई जान…

Viral Video Of Teacher Saving Student: सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक टीचर द्वारा बच्चे की जान बचाई गई.शिक्षक बच्चों को ना केवल पढ़ाते हैं बल्कि उनमें मोरल वैल्यूज के बीज भी बोते हैं. इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर शिक्षक बच्चों की जान भी बचाते हैं. ऐसा ही एक मामला न्यू जर्सी के ईस्ट ऑरेंज कम्युनिटी चार्टर स्कूल में सामने आया, जहां एक शिक्षिका (Teacher) ने एक बच्चे की जान बचाई.
बच्चे की जान बचाने का वीडियो खूब वायरल
सोशल मीडिया पर एक टीचर द्वारा बच्चे की जान बचाने का वीडियो खूब वायरल हो रहा है. दरअसल इस स्टूडेंट के गले में पानी की बोतल का ढक्कन अटक जाने से इसका गला चोक हो गया था. पूरा मामला जानने से पहले देखें सोशल मीडिया पर लोगों को आकर्षित करता ये वीडियो..
टीचर ने अपनी सूझबूझ से बिना समय गंवाए तुरंत एक्शन लिया
टीचर ने अपनी सूझबूझ से बिना समय गंवाए तुरंत एक्शन लिया और स्टूडेंट के गले से अटके ढक्कन को बाहर निकाल दिया. इस शिक्षिका ने कहा कि ये बेहद दुखद हो सकता था लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ.छात्र रॉबर्ट स्टोनकर तीसरी कक्षा में पढ़ता है. बच्चा अपने मुंह से बोतल खोलने की कोशिश कर रहा था, तब उसके गले में बोतल का ढक्कन फंस गया और उसका गला चोक होने लगा. 9 साल का बच्चा तुरंत मदद के लिए भागता हुआ अपनी टीचर के पास पहुंचा.
टीचर ने बचाई बच्चे की जान
टीचर ने हेमलिच मैन्युवर टेकनीक यूज कर फंसे हुए ढक्कन को गले से बाहर निकाला. इस टेकनीक के इस्तेमाल से गले में अटकी हुई चीज को बाहर निकालने में मदद मिलती है. टीचर ने बाद में बताया कि उन्होंने फर्स्ट एड और सीपीआर (CPR) की ट्रेनिंग से ये सीखा था.
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