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lifestyle: हाथ से पसीना निकलना हो सकता है बीमारियों का संकेत जाने पूरी Details..

सवाल…
मैं हथेलियों पर अत्यधिक पसीना आने की समस्या से काफ़ी सालों से परेशान हूं। इस कारण किसी से हाथ मिलाने में भी शर्म महसूस होती है। ये समस्या क्यों है और इसका उपाय क्या है, कृपया सुझाइए।
– राघव सिंह, ईमेल पर
जवाब…
अगर आपकी हथेलियों पर हमेशा पसीना आता है तो यह तापमान में बढ़ोतरी होने की वजह से हो सकता है। हालांकि कभी-कभी हाथ में बहुत ज़्यादा पसीना होना किसी आंतरिक बीमारी का संकेत भी हो सकता है, जैसे कि डायबिटीज़, मेनोपॉज़/हॉट फ्लैशेस (चेहरे, गर्दन और सीने पर पसीना आना), ब्लड शुगर का कम होना, थायरॉइड का बहुत ज़्यादा एक्टिव होना, हृदय रोग, नर्वस सिस्टम में कोई समस्या या किसी इंफेक्शन का होना आदि।
हाथों के अलावा शरीर के विभिन्न हिस्सों में पसीने को कम करने के लिए एंटीपर्सपिरेंट काफ़ी असरदार होते हैं। अगर पसीने की इस समस्या को रोकना चाहते हैं तो किसी रेगुलर-स्ट्रेंथ वाले एंटीपर्सपिरेंट से शुरुआत करें। अगर आपको मन मुताबिक़ परिणाम नहीं मिलता है तो क्लिनिकल-स्ट्रेंथ एंटीपर्सपिरेंट को चुनें।
अगर हाइपरहाइड्रोसिस (अत्यधिक पसीना आने की समस्या) है, तो ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर का इस्तेमाल करें। यह आपके शरीर में पीएच लेवल को संतुलित करके पसीने वाली हथेलियों को सूखा रख सकता है। सेब के सिरके से अपनी हथेलियों को पोंछ सकते हैं। अगर इसका प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं तो इसे रातभर हाथेलियों में लगा रहने दें।
हथेलियों के पसीने को कम करने का एक और घरेलू उपाय बेकिंग सोडा है। बेकिंग सोडा का उपयोग करके पसीने की समस्या कम की जा सकती है।
इसके लिए दो चम्मच बेकिंग सोडे में पानी मिलाकर एक पेस्ट बना लें। फिर पेस्ट को अपने हाथों पर लगभग पांच मिनट तक रगड़ें और फिर हाथ धो लें। तेज पत्ते को भोजन में शामिल करने या इसकी चाय के सेवन से हाथों के पसीने से राहत मिल सकती है।
समस्या से निजात न मिलने पर डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करवाएं।

Lifestyle
शुगर कंट्रोल करने के लिए करे इस जूस का सेवन…
शरीर के बेहतर स्वास्थ्य के लिए इम्युनिटी का मजबूत होना कितना आवश्यक है, कोरोना काल ने यह हम सभी को अच्छी तरह से समझा दिया है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए हम सभी ने कई तरह के उपाय भी किए, आहार में बदलाव से लेकर नियमित व्यायाम जैसी आदतें लोगों ने अपनाई। पर क्या इम्युनिटी को मजबूती देना वास्तव में बहुत कठिन है? विशेषज्ञ कहते हैं, बिल्कुल नहीं। प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना एक सतत प्रक्रिया है, यानी कि इसके लिए आपको रोजाना प्रयास करते रहने चाहिए।
आहार में कुछ चीजों को शामिल करना इसमें आपके लिए विशेष मददगार हो सकता है, आंवला ऐसा ही एक करिश्माई फल है।
वैसे तो इस मौसम में आंवले उपलब्ध नहीं होते हैं पर आप आंवले के जूस को प्रयोग में ला सकते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि आंवले के जूस का नियमित सेवन इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर डायबिटीज-कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने तक में आपके लिए काफी मददगार हो सकता है। आंवला में विटामिन-सी की प्रचुर मात्रा पाई जाती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के साथ कई तरह के अन्य लाभ भी प्रदान करती है। आइए इससे होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं।
इम्युनिटी बढ़ाने का सबसे प्रभावी उपाय
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए आंवला के रस का सेवन करना आपके लिए विशेष लाभप्रद हो सकता है। आंवला का रस विटामिन-सी का अच्छा स्रोत माना जाता है जो पानी में घुलनशील विटामिन है एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। आंवले के रस का सेवन शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं के कामकाज को ठीक रखने में मदद करता है। अध्ययनों की एक समीक्षा के अनुसार, विटामिन-सी कुछ प्रकार के संक्रमणों को रोकने में भी मदद कर सकता है।
पाचन को ठीक रखने में सहायक
आंवले को पाचन के लिए काफी कारगर माना जाता है। गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स की समस्या को ठीक करने में आंवले के रस के सेवन के लाभ के बारे में पता चलता है। गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स (जीईआरडी) वाले 68 लोगों पर किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि आंवला के अर्क का 4 सप्ताह तक रोजाना दो बार सेवन हार्टबर्न और पाचन की अन्य कई तरह की समस्याओं को कम करने में आपके लिए सहायक हो सकता है।
डायबिटीज में देख गए इसके लाभ
कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि डायबिटीज की समस्या में आंवले के रस का नियमित सेवन करना न सिर्फ ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में आपके लिए सहायक है, साथ ही यह मधुमेह के विकास को भी रोक सकता है। आंवले में डायट्री फाइबर की भी मात्रा पाई जाती है जो इसे बेहतर पाचन के लिए उपयुक्त बनाती है। फाइबर वाली चीजों के सेवन को डायबिटीज में भी काफी असरदार पाया गया है।
कोलेस्ट्रॉल को भी करता है कंट्रोल
अध्ययनों से पता चलता है कि आंवला का रस, हृदय के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि आंवला के जूस का सेवन करने वाले लोगों में 12 सप्ताह के भीतर बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी देखी गई। यह धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमा होने से बचाने में भी सहायक है। कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रहने से हृदय रोगों का जोखिम कम हो जाता है।
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क्या आप भी गठिया रोग’ की समस्या से परेशान है तो अपनाये ये योगासन…
लाइफस्टाइल की गड़बड़ी, विशेषतौर पर बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता के कारण पिछले कुछ वर्षों में गठिया या आर्थराइटिस की समस्या के शिकार लोगों के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। यहां तक कि अब कम उम्र वाले लोगों में भी गठिया की समस्या काफी तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। हड्डियों की इस समस्या में रोगी के लिए चलना और सीढियां चढ़ना तक काफी मुश्किल हो जाता है, समय के साथ यह समस्या बढ़ती जा सकती है।
गठिया एक या अधिक जोड़ों में सूजन की समस्या है। गठिया की स्थिति में जोड़ों में दर्द और जकड़न की समस्या सबसे अधिक देखी जाती रही है। इस स्थिति पर ध्यान न देना समस्या को काफी अधिक बढ़ा सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो गठिया में होने वाले दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर दवाएं देते हैं पर इसके लक्षणों को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में नियमित रूप से योग का अभ्यास करने की आदत आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। वहीं जो लोग नियमित योगाभ्यास करते हैं उनमें आगे चलकर गठिया या हड्डियों की अन्य समस्याओं का जोखिम काफी कम होता है। आइए जानते हैं कि आर्थराइटिस की समस्या से बचे रहने या इसके लक्षणों को कम करने के लिए किन योगासनों के अभ्यास की आदत बनाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है?
वीरभद्रासन योग का अभ्यास है फायदेमंद
वीरभद्रासन, शरीर के अंगों की बेहतर स्ट्रेचिंग करने में आपके लिए काफी सहायक अभ्यास है। योग विशेषज्ञ बताते हैं, क्रोनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस के लक्षणों को भी कम करके यह योगासन बाहों, पीठ के निचले हिस्से और पैरों को मजबूत और टोन करता है। यह उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो डेस्क पर लंबे समय तक काम करते रहते हैं। शरीर की सहनशक्ति बढ़ाने के साथ संतुलन में सुधार करने में इस योग के विशेष लाभ हैं।
वृक्षासन योग
शरीर की मांसपेशियों में मजबूती और रक्त के संचार को बेहतर बनाए रखने के लिए वृक्षासन योग को विशेष फायदेमंद अभ्यास माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास गठिया की समस्या से आपको लंबे समय तक सुरक्षित रखने में सहायक है। हालांकि जिन लोगों को गठिया की दिक्कत है उनके लिए वृक्षासन योग करना थोड़ा कठिन हो सकता है। यह रक्त परिसंचरण को बढ़ाने, शरीर के संतुलन में सुधार करने के साथ एकाग्रता बनाता है और फोकस विकसित करता है।
सेतुबंधासन योग के लाभ
सेतुबंधासन या ब्रिज पोज योग को भी गठिया की समस्याओं से बचाव के लिए काफी कारगर अभ्यास के तौर पर माना जाता है। यह योग मुद्रा रक्त परिसंचरण में सुधार करके गर्दन, रीढ़, छाती और कूल्हों की बेहतर स्ट्रेचिंग में मदद करती है। आर्थराइटिस के लक्षणों को भी कम करने के लिए यह योग काफी फायदेमंद माना जाता है। सेतुबंधासन योग के नियमित अभ्यास की आदत बनानी चाहिए।
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Lifestyle: भूलकर भी न करे बच्चो के सामने ऐसी बाते, पढ़ सकता है गलत असर…
Parenting Tips: एक बच्चे पर सबसे ज्यादा असर उसके माता पिता का होता है। बच्चे किसी चीज को देखकर जितना जल्दी सीखते हैं, उतना वह सिखाने पर भी नहीं सीखते। एक बच्चा अपना अधिकतर समय माता पिता के साथ बिताता है, इसलिए उसके बर्ताव व रहन सहन पर माता पिता का प्रभाव सबसे ज्यादा होता है। बच्चे का पहला स्कूल उसका घर ही होता है और माता पिता उसके पहले टीचर। ये वह स्कूल है जहां से वह बड़ा होने तक बाहर नहीं निकला। हर दिन माता पिता का व्यवहार उसके मन मस्तिष्क पर अपना असर छोड़ता रहता है। इसलिए माता पिता के लिए भी जरूरी है कि वह अपने बच्चे के सामने सोच समझकर पेश आएं। माता पिता को बच्चों के सामने अच्छा व्यवहार करना चाहिए ताकि बच्चा भी यही सीखे। वहीं हर माता पिता को अपने बच्चों के सामने कुछ बातें भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। अभिभावकों की कुछ गलतियां बच्चों के व्यवहार को बिगाड़ सकती हैं और उन्हें पछताने पर मजबूर कर सकती हैं। चलिए जानते हैं कौन सी बातें माता पिता को बच्चे के सामने कभी नहीं करनी चाहिए।
भाषा की मर्यादा
बच्चा जब बोलना शुरू करता है तो वह वही बोलता है जो आप अक्सर उसके सामने बोलते हैं। माता पिता की भाषा ही एक बच्चा सीखता है। उसे ये पता नहीं होता कि जो वह सुन रहा है उसका क्या मतलब है, वह गलत है या सही। इसलिए माता पिता को अपने बच्चों के सामने मर्यादित भाषा का उपयोग करना चाहिए। ऐसे शब्द न बोलें जो बच्चा सुनकर दोहराए। भाषा की शैली के साथ ही उसे बोलने के तरीके पर भी ध्यान देने की जरूरत है। अगर कोई बात माता पिता रूडली कहते हैं तो बच्चा भी अक्सर रूड होकर बात करता है।
व्यवहार न हो गलत
माता पिता का व्यवहार और रहन सहन बच्चे के पालन पोषण पर गहरा असर पड़ता है। अगर माता पिता एक दूसरे, परिवार के दूसरे सदस्यों या दोस्त पड़ोसियों से अच्छे से व्यवहार करते हैं तो बच्चा भी उसी तरह का व्यवहार करना सीखता है। अगर माता पिता अक्सर लड़ते रहते हैं, किसी का अपमान करते हैं, या अक्सर किसी की बुराई करते रहते हैं तो बच्चा भी लोगों से लड़कर बात करता है, दूसरों का सम्मान नहीं करता और दूसरों में बुराई ढूंढता है।
कई बार बच्चों के सामने पद प्रतिष्ठा का दिखावा करना माता पिता को महंगा पड़ जाता है। वह रुतबे और पद प्रतिष्ठा की बात अक्सर करते हैं, इससे बच्चे के मन में गलत धारणाएं बनने लगती है। बच्चा घमणी, अपनी मन मर्जी का करने वाला और साथी दोस्तों को अपने से कमतर समझने लगता है। वह गलत काम को भी निडर होकर करने लगता है।
माता पिता जब किसी बात को लेकर एक दूसरे या अन्य किसी से झूठ बोलते हैं तो बच्चा भी यह सब अपने सामने देखता है और झूठ बोलना सीख जाता है। उसे लगने लगता है कि झूठ बोलने से काम आसान हो जाता है। इसलिए वह अपने दोस्तों, परिवार से झूठ बोलना शुरू करता है और फिर बड़े बड़े झूठ बोलना शुरू कर देता है।
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