छतीसगढ़
क्या आपका बच्चा चिन्ता करता है तो इसे नादानी न समझे

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चिंता, यह शब्द जितना छोटा है उससे कहीं ज्यादा ही खतरनाक। चिंता की वजह से कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। माता-पिता, पति-पत्नी, बूढ़े-बुजुर्ग, इन लोगों को चिंता तो होती ही है, लेकिन क्या आपने बच्चों को चिंता करते सुना है?
कई बार बच्चे आपसे कहते भी है कि मैं कुछ सोच रहा था, फलां बात को लेकर दुखी हूं या फिर मुझे चिंता हो रही है अपने किसी दोस्त की। यह सब बातें सुनकर आप हंसते हैं और उसे अनदेखा भी कर देते हैं।
एक पेरेंट के तौर पर आपको यह बात गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि बुजुर्गों में होने वाली चिंता अब बच्चों में भी दिखने लगी है। पहली बार अमेरिकी विशेषज्ञों की टास्क फोर्स ने 8-18 साल के बच्चों के बिगड़ते मेंटल हेल्थ को देखते हुए उनकी स्थिति जांचने की बात सामने रखी है। जिससे बच्चे अपनी उम्र की तरह व्यवहार करें और उनका बचपन न खत्म हो।
चिंता में बीत रहा है बचपन
बाल मनोवैज्ञानिक और मेयो क्लिनिक में पीडियाट्रिक एंग्जाइटी डिसऑर्डर्स क्लिनिक के डायरेक्टर स्टीफन पीएच व्हाइटसाइड के अनुसार, बच्चों में चिंता बचपन की सबसे आम मानसिक गड़बड़ी बनकर सामने आई है। इसके लिए हमें जल्द से जल्द जांच करनी होगी। ज्यादातर बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत है, जो उन्हें इस समय मिल नहीं रही। कोरोना ने इस समस्या को बढ़ा दिया है।बच्चों में लक्षण नहीं होने पर भी जांच की जाएगी
जी हां, अमेरिकी टास्ट फोर्स ने सिफारिश की है कि बच्चों में लक्षण दिखें या नहीं दिखें, हर बच्चे के मेंटल हेल्थ की जांच करनी चाहिए। टास्क फोर्स की मेंबर मार्था कुबिक के अनुसार, बच्चों का जीवन अस्त-व्यस्त हो, उससे पहले हमें पेरेंट के तौर पर उसमें दखल देना होगा।चिंता की वजह से बच्चे नशा कर सकते हैं
चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे अगर बचपन से चिंता करने लगते हैं तो आगे चलकर वो डिप्रेशन में जा सकता हैं। इतना ही नहीं इससे उसे नशे की लत भी लग सकती है।अब बात करते हैं भारतीय बच्चों के बारे में-
स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रन 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 7 में से एक बच्चा डिप्रेशन का शिकार है। वहीं इंडियन जर्नल ऑफ साइकेट्री की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोरोना महामारी से पहले भी करीब 5 करोड़ बच्चों में कोई न कोई मानसिक बीमारी रही है। इनमें से करीब 90% बच्चों या उनके माता-पिता ने इलाज के बारे मे सोचा तक नहीं।अगर बच्चा चिंता कर रहा है तो माता-पिता को क्या करना चाहिए?
फोर्टिस हॉस्पिटल के मेंटल हेल्थ और बिहेवियरल सांइस के डायरेक्टर डॉ. समीर पारीख कहते हैं– अगर बच्चों में चिंता के लक्षण दिख रहे हैं तो उसे हल्के में लेना छोड़ना होगा। पेरेंट को बच्चों की बात को गंभीरता से सुनना होगा। अगर बच्चा कुछ कहना चाह रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें।इसी तरह अगर बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव दिख रहा है तब भी उसे गंभीरता से लें, उससे बात करें। अगर बच्चा ज्यादा चिंता में है तो माता-पिता को पीडियाट्रिक (बाल रोग विशेषज्ञ) या किसी दूसरे प्राइमरी देखभाल वाले डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि लगातार चिंता करने से बच्चा किसी डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है।
बच्चों में चिंता का क्या कारण है?
डॉक्टर प्रितेश गौतम के अनुसार कई ऐसी बातें हैं, जो आपको दिखने में छोटी लगती हैं, लेकिन बच्चों के कोमल मन-मस्तिष्क में गहरा असर छोड़ जाती हैं। इनमें से कुछ ऐसी बाते भी हैं-माता-पिता का बच्चों को समय न दे पाना
क्लास में कम मार्क्स लाने का डर सताना
पेरेंट्स का झगड़ा और अलग होने का डर
घर का नेगेटिव माहौल रहनाबच्चों को बार-बार डांटना या मारना
एक और स्टडी में हुआ ये खुलासा
दुनियाभर में की गई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण 17 साल की उम्र में दिखाई देते हैं, लेकिन इन दिनों डिप्रेशन की पहचान शुरुआती उम्र में ही समझ आने लगी है। ज्यादा से ज्यादा जांच करने की वजह से ये चीजें समझ आ रही है।बच्चे के लिए कंस्ट्रक्टिव काम करें
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स इंस्टीटय़ूट एंड रिसर्च सेंटर, दिल्ली में सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी चिंता के बारे में कहती हैं कि अगर अपना समय थोड़ा क्रिएटिव काम में लगा लिया जाए तो काफी हद तक चिंता दूर हो सकती है।इसलिए पॉजिटिव बातों को ज्यादा जगह दें और नेगेटिव को दूर कर दें। बच्चों को…
सुबह जल्दी उठाएं
मेडिटेशन करवाएं।
घर का खाना खिलाएं।
खाने में जूस जरूर दें।
पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर न दें।
डांस या म्यूजिक जैसी एक्टिविटी करवाएं।

छतीसगढ़
कोरोनाकाल की स्तिथि में युवा हुए बेरोजगार युवाओ को जबरन नौकरी से निकाला सरकार से दोबारा नौकरी दिलवाने की अपील
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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 19 अप्रैल को स्वास्थ्य सेक्टर से जुड़ा एक ट्वीट किया। कमेंट बॉक्स में 57 कमेंट आए। उनमें से इन 3 को देखिए।
माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी यूपी के 9000 एंबुलेंस कर्मचारियों की मांग आपके समक्ष कई बार रखी गई लेकिन अभी तक हल नहीं हो पाया।
मान्यवर आप से हाथ जोड़कर निवेदन है एंबुलेंस कर्मचारियों के पेट पर लात न मारें, कर्मचारी आज भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
सर कुछ ध्यान 108, 102 एंबुलेंस कर्मचारियों का भी कर लीजिए, न वेतन बढ़ा न समय पर सैलरी दे रहे और न ही झूठे आरोप में निकाले हुए कर्मचारियों की बहाली कर रही है। आपसे बहुत आस लगाए बैठे हैं।
ये तीनों ही कमेंट उन एंबुलेंस ड्राइवरों के हैं जिन्हें यूपी में एंबुलेंस सेवाओं को चलाने वाली कंपनी GVK EMRI ने 29 जुलाई 2021 को नौकरी से निकाल दिया था। निकाले जाने वालों की संख्या 9000 तक पहुंच गई है। इसमें एंबुलेंस ड्राइवर के साथ EMT यानी इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन भी शामिल हैं। ये सभी दोबारा नौकरी पर रखने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से गुहार लगा रहे हैं। क्योंकि इनके कह देने से कंपनी इन्हें दोबारा नौकरी पर रख लेगी। आइए पूरा मामला जानते हैं।
अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे नौकरी से निकाल दिए गए
यूपी में 14 सितंबर 2012 से एंबुलेंस सेवा को चलाने का काम तेलंगाना की GVK EMRI कंपनी करती आ रही है। 25 जुलाई 2021 को यूपी सरकार ने GVK EMRI का एएलएस यानी एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस सेवा का टेंडर रद्द करके जिगित्जा हेल्थ केयर नाम की कंपनी को दे दिया। नई कंपनी को टेंडर मिला तो उसने नई भर्ती शुरू कर दी। इससे इमरजेंसी एंबुलेंस सेवा में काम कर रहे कर्मचारियों को नौकरी जाने का खतरा लगा और उन्होंने विरोध शुरू कर दिया।
26 जुलाई को हड़ताल का ऐलान करके लखनऊ के ईको गार्डेन में धरने पर बैठ गए। मामला इमरजेंसी सेवा के कर्मियों से जुड़ा था लेकिन इसमें 102 और 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हो गए। आंदोलनकारी कर्मचारियों से सरकार के प्रतिनिधियों ने बात की। सहमति बनी कि पुराने किसी कर्मचारी को निकाला नहीं जाएगा। कर्मचारियों के लिए यह राहत की बात थी लेकिन उनकी और भी मांग थी जिसे पूरा होना बाकी था।
नई कंपनी ट्रेंड लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए 20 हजार मांग रही थी
नई कंपनी ने पुराने कर्मचारियों को नौकरी पर रखने का तो फैसला कर लिया लेकिन सैलरी घटाकर देने की बात कही। पहले जो सैलरी 12,700 रुपए थी उसे 10,700 कर दिया गया। इसके अलावा 20 हजार रुपए का डिमांड ड्रॉफ्ट ट्रेनिंग के नाम पर जमा करने को कहा गया। कर्मचारियों का कहना था, “हम तो आलरेडी इतने सालों से काम कर रहे हैं, उसी काम की ट्रेनिंग के लिए पैसा क्यों मांगा जा रहा है?”
एंबुलेंस ड्राइवरों ने गाड़ी की चाभी सौंपी और छह मांगो को लेकर आंदोलन में शामिल हो गए
26 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन अगले तीन दिन में पूरे प्रदेश में फैलता चला गया। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हनुमान पांडे के कहने पर जिलों में तैनात ड्राइवर और मेडिकल टेक्नीशियन एंबुलेंस खड़ी करके प्रदर्शन में शामिल हो गए। इसी दौरान एंबुलेंस की कमी से मरीजों के मौत की खबर आने लगी। सरकार ने धरना खत्म करने का अल्टीमेटम दिया लेकिन कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े रहे। पहले उनकी पांच मांगे देखिए…
ठेका प्रथा को बंद किया जाए
बार-बार कंपनियों का ठेका बदलकर नई भर्ती न की जाए
समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए
कोरोना संकट के बीच मरने वाले एंबुलेंस कर्मियों के परिजनों को 50 लाख की बीमा राशि दी जाए
102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन में शामिल किया जाए
इसके अलावा एक मांग के बारे में हमें जीवनदायनी एंबुलेंस कर्मचारी संघ के प्रवक्ता अभिषेक कुमार मिश्रा ने बताया। उन्होंने कहा, 25 सितंबर 2019 को कंपनी के साथ हमारी बैठक हुई तो तय हुआ था कि 8 घंटे की ड्यूटी और 2 घंटे का ओवर टाइम होगा। लेकिन आज तक ओवर टाइम का पैसा नहीं मिला और कंपनी 12 घंटे काम करवाती रही। हमारी मांग है कि श्रम विभाग के नियमों के अनुसार काम करवाया जाए।
सरकार ने 570 कर्मचारियों को तुरंत नौकरी से निकालने का आदेश दे दिया
आंदोलन बढ़ा तो मरीजों को दिक्कत होने लगी। सीतापुर में महिला की मौत हुई तो सरकार हरकत में आ गई। उस वक्त के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा, हमने एंबुलेंस कर्मियों की जरूरी मांगों को पूरा कर दिया है लेकिन वह अब तरह-तरह की मांगे रख रहे हैं। हमने GVK EMRI कंपनी से प्रदर्शनकारियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
GVK EMRI कंपनी ने 28 जुलाई को 570 ड्राइवर और ईएमटी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। इसमें एंबुलेंस संघ के अध्यक्ष, प्रदेश प्रवक्ता, से लेकर हर जिले के पदाधिकारी शामिल थे। कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टीवीएसके रेड्डी ने कहा, “कल तक जो कर्मचारी ज्वाइन कर लेंगे उन्हें रखा जाएगा जो नहीं आएंगे उन्हें बाहर कर दिया जाएगा। बाकी ये 570 लोगों को कंपनी दोबारा नौकरी पर नहीं रखेगी।”
कंपनी के खिलाफ जिसने भी बोला उसे नौकरी से निकाल दिया गया
सरकार का सख्त रुख देखा तो GVK EMRI कंपनी ने सख्त फैसला लेना शुरू कर दिया। आशियाना थाने में एंबुलेंस संघ के अध्यक्ष मंत्री, महामंत्री, कोषाध्यक्ष सहित 11 लोगों के खिलाफ एस्मा के तहत एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस के जरिए आंदोलन करने वालों को हटाया गया। कंपनी ने धीरे-धीरे हर जिलों में उन लोगों को हटाना शुरू किया जो आंदोलन में शामिल थे या फिर आंदोलन के समर्थक थे। अभिषेक ने बताया कि ऐसे लोगों की संख्या इस वक्त 9 हजार पहुंच गई है।
कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया
एंबुलेंस कर्मचारियों की नौकरी गई तो उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री अनिल उपाध्याय 27 दिसंबर को एक प्रतिनिधिमंडल लेकर सीएम योगी से मुलाकात करने पहुंचे। नौकरी से निकाले गए लोगों की समस्याओं को सामने रखा। बताया कि 4 लोगों ने नौकरी जाने के बाद आत्महत्या कर ली। एंबुलेंस कंपनी की मनमानी को सीएम योगी के सामने रखा। उन्होंने सही फैसला लेने की बात कही है।
एंबुलेंस संघ के प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने कहा, “कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों को फर्जी केस के लिए दबाव बनाते हैं। मना करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं। कंपनी ऐसा करके सरकार के खजाने से हर महीने करोड़ों रुपए लूट रही है। सीएम योगी को कंपनी के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए।”
यहां तक बात हमने कर्मचारियों की मांग और उनकी समस्याओं को लेकर बात की। अब कंपनी पर जो आरोप लग रहे हैं उसकी बात करते हैं।
एंबुलेंस कंपनी दबाव देकर फर्जी केस कैसे बनवाती है
नौकरी से निकाले गए एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “कंपनी के अधिकारी फोन करके केसों की संख्या पूछते हैं, अगर उन्हें एक या दो केस बता दिया तो कहते थे कि इसे पांच करो। अब इसके बाद हम 108 नंबर पर फोन करवाते हैं और उससे दूर की लोकेशन बताने को बोल देते हैं। इसके लिए हमें कहीं जाना नहीं होता था। सारा काम रजिस्टर पर हो जाता था और कंपनी सरकार के सामने कागज दिखाकर पैसों का भुगतान करवा लेती थी।”
गैराज में खड़ी एंबुलेंस कागजों पर लगातार चल रही हैं
पिछले साल ही जून महीने में बहराइच से खबर आई कि 6 एंबुलेंस गैराज में बनने के लिए खड़ी हैं। 2 एंबुलेंस एकदम जर्जर हो चुकी थी। लेकिन फाइल पर ये सभी चल रही थी। इन एंबुलेंस के जरिए हर दिन 4-5 केस अस्पताल पहुंचाए जा रहे थे। कंपनी पर ये भी आरोप लगा कि गैराज को मुख्यालय से 40 किमी दूर इसीलिए बनाया गया है ताकि अधिकारियों की जांच से बचा जा सके।
कंपनी पर पैसा लेकर नौकरी देने का आरोप
GVK EMRI कंपनी पर पैसा लेकर नौकरी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। बस्ती के हल्लौर नगरा के मनोज कुमार को 108 एंबुलेंस सेवा में नौकरी का वादा करके 45 हजार रुपए लिए गए। लेकिन बाद में नौकरी नहीं दी गई। मनोज कुमार ने आशियाना थाने में कंपनी के डायरेक्टर, यूपी प्रभारी, सीएम हेड और एचआर के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया।
न सिर्फ विपक्ष के नेता बल्कि बीजेपी नेताओं ने भी नौकरी देने के लिए आवाज उठाई
सपा और कांग्रेस के नेताओं के अलावा बीजेपी के केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, यूपी सरकार की मंत्री नीलिमा कटियार, विधायक दिनेश खटिक, कुंवर नरेंद्र पाल सिंह, फतेह बहादुर सिंह, रमेश चंद्र मिश्र, संजू देवी जैसे नेताओं ने नौकरी से निकाले गए एंबुलेंस कर्मियों के कोरोना संकट के बीच किए गए कामों की तारीफ करते हुए सीएम योगी को पत्र लिखा। पत्र के जरिए सीएम से अपील की है कि वह कंपनी को आदेश दें जिससे इन्हें दोबारा नौकरी पर रखा जाए।
फिलहाल कंपनी भी सरकार के निर्देश के इंतजार में है। अगर सरकार दोबारा नौकरी पर रखने का निर्देश देती है तो कंपनी इन्हें नौकरी पर रख लेगी।
छतीसगढ़
कहीं आपके आधार का कोई गलत इस्तेमाल कर रहा है तो आप खुद घर बैठे इसे चेक कर सकते हैं
आधार कार्ड एक जरूरी दस्तावेज है। सरकारी योजना का लाभ लेने से लेकर बच्चे के एडमिशन तक के लिए आधार नंबर मांगा जाता है। आधार कार्ड में आपके नाम, पता और फोन नंबर से लेकर फिंगरप्रिंट तक की जानकारियां रहती हैं। अगर आपको ये डर सता रहा कि कहीं आपके आधार का कोई गलत इस्तेमाल कर रहा है तो आप खुद घर बैठे इसे चेक कर सकते हैं।
यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) की ऑफिशियल साइट पर आप ऑनलाइन घर बैठे ये चेक कर सकते हैं कि आपके आधार नंबर का कब और कहां इस्तेमाल हुआ है। इसके लिए आपसे कोई चार्ज भी नहीं लिया जाता है। यहां जानें इसकी पूरी प्रोसेस…
ये हैं इसकी प्रोसेस...
1. सबसे पहले आधार की वेबसाइट या इस लिंक uidai.gov.in पर जाना होगा।
2. यहां Aadhaar Services के नीचे की तरफ Aadhaar Authentication History का ऑप्शन मिलेगा, इस पर क्लिक करें।
3. यहां आपको आधार नंबर और दिखाई दे रहे सिक्योरिटी कोड को डालकर Send OTP पर क्लिक करना होगा।
4. इसके बाद आधार से लिंक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर वैरिफिकेशन के लिए एक OTP आएगा, यह OTP डालकर Submit पर क्लिक करें।
5. इसके बाद आपको ऑथेंटिकेशन टाइप और डेट रेंज और OTP समेत मांगी गई सभी जानकारियां भरनी होगी। (नोट- आप 6 महीने तक का डेटा देख सकते हैं।
6. Verify OTP पर क्लिक करते ही आपके सामने लिस्ट आ जाएगी, जिसमें पिछले 6 महीनों में आधार का इस्तेमाल कब और कहां हुआ इसकी जानकारी होगी।
गलत इस्तेमाल होने पर कर सकते हैं शिकायत
रिकॉर्ड देखने पर यदि आपको लगता है कि आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल किया गया है तो आप तुरंत इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आप टोल फ्री नंबर 1947 पर कॉल या [email protected] पर ईमेल करके शिकायत दर्ज कर सकते हैं या फिर uidai.gov.in/file-complaint लिंक पर ऑनलाइन शिकायत भी कर सकते हैं।
छतीसगढ़
तेज गर्मी के कारण कई जगहों में बिजली कटौती की सभावना

तेज गर्मी और कोयले की भारी कमी ने भारत में नया बिजली संकट पैदा कर दिया है। बिजली की मांग में बढ़ोतरी के कारण पंजाब, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों को बिजली कटौती करनी पड़ रही है। कुछ जगहों पर तो ये कटौती आठ घंटे तक है। ऐसे में लोगों के पास या तो तेज गर्मी सहने का विकल्प है या फिर दूसरे महंगे विकल्प चुनने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
भारत में 70% बिजली का उत्पादन कोयले से होता है, लेकिन कोयले के ट्रांसपोर्ट के लिए रेलवे रेक की उपलब्धता कम होने और कोयले के आयात में कमी के कारण सप्लाई बाधित हुई है। ऐसे में देश में बढ़ी बिजली की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। कोरोना महामारी के कम होने के बाद इकोनॉमिक एक्टिविटीज के फिर से बढ़ने और देश में गर्मी के चरम पर पहुंचने के कारण डिमांड बढ़ी है।
1901 के बाद नेशनल ऐवरेज रिकॉर्ड 92 डिग्री पर
देश के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे मौसम विभाग ने लू की चेतावनी जारी की है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, देश की राजधानी नई दिल्ली में 20 अप्रैल को तापमान 108.7 डिग्री फारेनहाइट (42.6 डिग्री सेल्सियस) दर्ज किया गया, जो पांच वर्षों में सबसे गर्म दिन है। मार्च में नेशनल ऐवरेज रिकॉर्ड 92 डिग्री तक पहुंच गया, जो 1901 के बाद सबसे ज्यादा है।
कोयले का केवल 8 दिन का स्टॉक
बिजली मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि, 19 अप्रैल को बिजली उत्पादकों के पास जो स्टॉक था जो औसतन आठ दिनों तक चल सकता था। इस महीने के फर्स्ट हाफ में उत्पादन में 27% की बढ़ोतरी के बावजूद, राज्य के स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड डिमांड को पूरा नहीं कर पा रही है। कोल इंडिया एशिया की कुछ सबसे बड़ी कोयला खदानों को ऑपरेट करती है।
डिमांड ज्यादा कोयला कम
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के शैलेंद्र दुबे ने कहा, ‘देश भर में थर्मल प्लांट कोयले की कमी से जूझ रहे हैं क्योंकि राज्यों में बिजली की मांग बढ़ गई है।’ वैसे गर्मियों में कोयले की कमी कोई नई बात नहीं है। ऐसा लंबे समय से चला आ रहा है। इसका मुख्य कारण कोल इंडिया की उत्पादन बढ़ाने में असमर्थता और खराब इंफ्रास्ट्रक्चर है। पिछले साल भी इकोनॉमी के खुलने के साथ देश ने ऐसा ही संकट देखा था।
आने वाले समय में बढ़े सकती है परेशानी
डेलॉइट टौच तोहमात्सु के मुंबई बेस्ड पार्टनर देबाशीष मिश्रा ने कहा, ‘अभी ये समस्या और बढ़ सकती है। आने वाले समय में मानसून की बारिश के साथ, खदानों में पानी भर सकता है और ट्रांसपोर्ट में भी परेशानी आ सकती है। इससे कोयले के प्रोडक्शन और सप्लाई में और कमी आ सकती है। मानसून के सीजन से पहले कोयले का स्टॉक जमा किया जाता है, लेकिन भारी डिमांड के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है।
कुछ कपड़ा मिलों में बिजली की कमी से ऑपरेशन रुके
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट अतुल गनात्रा के अनुसार, देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में कुछ कपड़ा मिलों में बिजली की कमी ने ऑपरेशन को रोक दिया है। कपास की उच्च लागत की वजह से वो महंगे डीजल-संचालित जनरेटर और अन्य विकल्पों पर खर्च नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे कपास की खपत में भारी कमी आएगी।
डीजल के इस्तेमाल से मार्जिन घटा
पूर्वी राज्य बिहार में एक कार डीलरशिप और रिपेयर शॉप चलाने वाले अतुल सिंह ने कहा कि लगातार बिजली कटौती और डीजल के इस्तेमाल से उनका मार्जिन कम हो रहा है। किसानों पर भी बिजली कटौती का असर हो रहा है। उत्तर प्रदेश में मोहित शर्मा नाम के एक किसान ने कहा कि वह मकई के खेतों में सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। शर्मा ने कहा, “हमें न तो दिन में बिजली मिल रही है और न ही रात में। बच्चे शाम को पढ़ नहीं सकते।’
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