छतीसगढ़
देश में फिर डरा रहा है कोरोना : अचानक केस बढ़ने के कारण हो सकते है स्कूल बंद

देश में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए केंद्र ने दिल्ली समेत 5 राज्यों को आगाह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बढ़ते पॉजिटिविटी रेट पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मिजोरम को लेटर लिखा। इस लेटर में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय और निगरानी करने को कहा गया है।
वहीं, राजधानी में कोरोना को लेकर दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने आज बैठक बुलाई है। उप-राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में CM केजरीवाल और AIIMS डायरेक्टर भी मौजूद रहेंगे। बैठक में स्कूलों को बंद करने पर भी फैसला हो सकता है। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, पॉजिटिविटी रेट 4.42% दर्ज किया गया।
आगे बढ़ने से पहले नीचे दिए पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं...
भारत में रोजाना आने वाले नए केसेस में राजधानी दिल्ली समेत इन 4 राज्यों का योगदान काफी अधिक है। यहां पॉजिटिविटी रेट में लगातार इजाफा देखा गया है। केंद्र ने वैक्सीनेशन और प्रिकॉशन डोज को लेकर भी तेजी लाने को कहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को फाइव फोल्ड स्ट्रैटजी पर काम करने को कहा है। इसमें टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, वैक्सीनेशन और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर फॉलो करने की सलाह दी गई है।
इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग करें
संक्रमण बढ़ने के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए सभी हेल्थ फैसिलिटीज को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी की नियमित निगरानी, इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की भी सलाह दी गई है। मेडिकल फैसिलिटीज के साथ-साथ सीवेज के सैंपल भी जांचने की सलाह दी गई है।
दिल्ली में वीकली केस में 170% का इजाफा
स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक, दिल्ली में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 998 थी, जो 19 अप्रैल को बढ़कर 2,671 हो गई है। यहां कोविड पॉजिटिविटी रेट में भी 1.42% की बढ़ोतरी देखी गई है। यह आंकड़ा पिछले हफ्ते 3.49% था।
हरियाणा में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में 521 नए मामले मिले थे, जो कि 19 अप्रैल तक से बढ़कर 1,299 हो गए। पिछले हफ्ते पॉजिटिविटी रेट 1.22% से बढ़कर 2.86% हो गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 217 थी, जो 19 अप्रैल तक बढ़कर 637 हो गई। यहां पॉजिटिविटी रेट पिछले हफ्ते 0.03% था, जो बढ़कर 0.09% हो गया है।

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सेल्फी बन रही है चहरे के लिए खतरा आइये जानते है कैसे
सेल्फी का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग हर साल औसतन 450 सेल्फी ले रहे हैं, लेकिन एक स्टडी के अनुसार ऐसा करने से फोटो में चेहरा बिगड़ सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने बताया कि सेल्फी आपके चेहरे को खराब कर देती है, जिससे आपकी नाक सामान्य तस्वीरों की तुलना में लंबी और चौड़ी दिखती है।
UK में नाक की सर्जरी, जिसे राइनोप्लास्टी भी कहते हैं, कॉस्मेटिक सर्जरी में सबसे अधिक लोकप्रिय है। शोधकर्ताओं के अनुसार, सेल्फी की लोकप्रियता के बीच राइनोप्लास्टी कराने वालों की संख्या भी बढ़ गई है।
सेल्फी में खराब दिखता है चेहरा तो सर्जरी कराने पहुंच रहे लोग
स्टडी में टीम को लीड करने वाले डॉ. बर्दिया अमीरलाक ने कहा, ‘सेल्फी का शौक और राइनोप्लास्टी के बीच खास संबंध है। जब सेल्फी में लोगों का चेहरा खराब दिखता है तो वे सर्जरी कराने पहुंच जाते हैं।’
स्टडी में शामिल 30 वॉलंटियर्स ने यह जानने की कोशिश की कि सेल्फी चेहरे को कैसे प्रभावित करती है। वॉलंटियर्स ने 3 में दो सेल्फी 12 और 18 इंच की दूरी पर फंट्र कैमरे से ली गईं और एक सेल्फी 5 फीट की दूरी पर एक डिजिटल कैमरे से ली गई। ये तीनों सेल्फी एक साथ क्लिक की गईं।
स्वास्थ्य पर असर डालती है सेल्फी
डिजिटल कैमरे से ली गई फोटो की तुलना में 12 इंच की दूरी से ली गई सेल्फी में नाक 6.4% लंबी और 18 इंच की दूरी वाली सेल्फी में 4.3% लंबी दिखाई देती है। 12 इंच की दूरी वाली सेल्फी में ठुड्डी की लंबाई भी औसतन 12% कम पाई गई। इससे नाक और ठुड्डी की लंबाई के अनुपात में 17% की वृद्धि हुई। शोधकर्ताओं ने
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गर्मी का प्रकोप बढ़ा मार्च में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़े बच्चो का स्कूल जाना हुआ मुश्किल

कोरोना महामारी के कारण देश में 2 साल तक ऑनलाइन क्लासेस अटेंड करने के बाद अब एक बार फिर बच्चों ने स्कूल जाना शुरू कर दिया है। स्कूल में वापस जाना और दोस्तों से मिलना बच्चों के लिए अच्छी बात है, लेकिन बच्चों के लिए रिकॉर्ड तोड़ गर्मी नया खतरा पैदा कर रही है। जैसे-जैसे तापमान हर गुजरते दिन के साथ बढ़ रहा है, वैसे-वैसे कुछ मिनटों के लिए भी बाहर कदम रखना मुश्किल हो रहा है।
माना जा रहा है कि मिड अप्रैल से मिड जून के बीच स्थिति और खराब होने वाली है, जब नॉर्थ वेस्ट, सेंट्रल और नॉर्थ ईस्ट इंडिया के मैदानी इलाकों में तापमान अपने चरम पर होता है। इस दौरान बच्चों के हीटवेव से पीड़ित होने की संभावना ज्यादा हो जाती है।
बच्चों को तपती गर्मी में हीटवेव से बचाने के तरीके:
1. हाइड्रेशन– गर्मी के कारण आपके बच्चे जल्दी डिहाइड्रेट हो जाते हैं। इसके कारण उन्हें चक्कर आ सकता है। गर्मी के मौसम में बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने के लिए कहें, ताकि बच्चे दिन भर एक्टिव रहें। पानी का ज्यादा सेवन लू के प्रभाव को भी कम करता है। यदि बच्चा ज्यादा पानी नहीं पीता तो सुनिश्चित करें कि वो रोजाना 2 से 3 लीटर पानी जरूर पीए। इसके अलावा आप उन्हें नारियल पानी, नींबू पानी, बेल या खस का शरबत भी पीने के लिए दे सकते हैं।
2. बाहरी गतिविधियों को सीमित करें -आपके बच्चे बाहर खेलने या घूमने पर जोर दे सकते हैं। इसलिए दोपहर के समय उनकी बाहरी गतिविधियों को सीमित करने का प्रयास करना चाहिए। उन्हें घर पर खेलने के लिए कहें या बाहर मौसम ठंडा होने तक इंतजार करने के लिए कहें। गर्मी के मौसम में सुबह 10 से शाम 5 बजे के बीच धूप सबसे तेज होती है। शाम 5 बजे के बाद मौसम थोड़ा बेहतर हो जाता है और लू से जुड़ा जोखिम भी कम होता है। अगर आपके बच्चे बाहर निकलने की जिद करते हैं, तो उन्हें शाम को ही जाने दें।
3. सनस्क्रीन लगाएं- सनस्क्रीन केवल बड़ों ही नहीं, बल्कि छोटे बच्चों के लिए भी उतना ही जरूरी है। बड़ों की तुलना में बच्चों की त्वचा ज्यादा नाजुक होती है। गर्मी की चपेट में आने से सनबर्न और मुंहासे होने का खतरा भी होता है। इसलिए जब भी आपका बच्चा दोपहर में घर से बाहर जाता है, तो उसकी बॉडी के सभी ओपन हिस्सों पर अच्छी तरह से सनस्क्रीन लगाएं। कड़ी धूप से बचाने के लिए आप उन्हें कैप और छाता भी दे सकते हैं।
4. बच्चों को हल्के और पतले कपड़े पहनाएं– इस मौसम में बच्चों को हल्के रंग के कॉटन के कपड़े पहनाएं। अन्य कपड़ों की तुलना में कॉटन का कपड़ा पसीने को बेहतर तरीके से सोखता है। हल्के रंग के कॉटन के कपड़ों में गर्मी कम लगती है और बॉडी को ठंडा रहने में मदद भी मिलती है। इसके अलावा कॉटन के कपड़े स्किन रैशेज और खुजली को भी रोकते हैं।
5. हेल्दी डाइट– मौसम को ध्यान में रखते हुए बच्चे को रोजाना ताजा और हल्का खाना खिलाएं। फैटी, बासी और तला हुआ खाने से दस्त और उल्टी हो सकती है। बच्चों के भोजन में मौसमी, ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल करें। मौसमी उत्पाद उन्हें हाइड्रेटेड रख सकते हैं और उनकी इम्यूनिटी भी बढ़ा सकते हैं।
6. हीटस्ट्रोक के लक्षणों की तलाश करें– तमाम सावधानियों के बाद भी आप लू की संभावना से इनकार नहीं कर सकते। इसलिए लू के लक्षणों को जानना जरूरी है, ताकि आप किसी भी परेशानी से बचने के लिए सही समय पर एक्शन ले सकें। लू के कॉमन लक्षणों में बहुत ज्यादा पसीना आना, पीलापन, मांसपेशियों में ऐंठन, थकान, दुर्बलता, चक्कर आना, सिरदर्द, उलटी शामिल हैं।
(Disclaimer: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के लिए है। टिप्स/ इलाज/ बचाव के तरीके अपनाने से पहले चिकित्सीय सलाह जरूर लें।)
छतीसगढ़
COVID UPDATE : आंखों में सूखापन होना कोरोना के लक्षण है आइये जानते है

वैसे तो कोरोना के लक्षणों में खांसी, सर्दी, बुखार शामिल हैं, लेकिन अब आंखों में धुंधलापन और ड्राय आइज भी संक्रमण से जुड़ी समस्याएं बनती जा रही हैं। हाल ही में चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में कहा है कि कोरोना से जूझ चुके 20% लोगों की आंखें सूख रही हैं।
कोरोना से अब आंखें भी सुरक्षित नहीं
रिसर्चर्स ने कोरोना से रिकवर हुए 228 मरीजों की जांच 1 से 3 महीने के बीच की। इन मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड्स की तुलना 109 स्वस्थ लोगों से की गई। इसमें पाया गया कि कोरोना की चपेट में आने वाले हर 5 में से 1 इंसान को ड्राय आइज की बीमारी के लक्षण होते हैं। साथ ही उन्हें धुंधलापन, आंखों का गड़ना, लाइट से सेंसिटिविटी और आंखों में सूजन भी हो सकती है।
क्या होती है ड्राय आइज की बीमारी?
ड्राय आइज यानी आंखों में सूखापन। जब आपकी आंखों को पर्याप्त चिकनाई नहीं मिलती, तब आंसु न बन पाना, आंसु जल्दी सूख जाना, आंखों में जलन, सूजन और दर्द होने जैसी समस्याएं होती हैं।
पहले भी हो चुकी ऐसी ही रिसर्च
कोरोना का आंखों से क्या कनेक्शन है, इस पर 2021 में भी एक रिसर्च हो चुकी है। इसमें कहा गया था कि हर 10 में से 1 कोरोना मरीज को आंखों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें भी सबसे बड़ी समस्या ड्राय आइज ही पाई गई थी।
कोरोना कैसे करता है आंखों पर वार?
ऐसा माना जा रहा है कि आंखों की बीमारी का कारण कोरोना और ACE2 एंजाइम का लिंक हो सकता है। ACE2 एंजाइम की मदद से ही कोरोना इंसान के शरीर में एंट्री लेता है। इसके बाद वायरस हमारी आंखों में मौजूद कोशिकाओं (सेल्स) को संक्रमित कर देता है, जिससे आंखों में परेशानी होती है।
ड्राय आइज से कैसे बचें?
रिसर्चर्स ने बताया है कि कोरोना की वजह से होने वाली ड्राय आइज की परेशानी के लक्षण कुछ हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। अगर इससे किसी मरीज को ज्यादा ही परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना अच्छा उपाय होगा। इसके अलावा आप ड्राय आइज से राहत पाने के लिए इन घरेलू नुस्खों को अपना सकते हैं-
- तेज हवा, धुआं और सीधे आंखों में हवा लगने से बचें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
- हवा में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें।
- डॉक्टर से पूछकर आंखों की सिकाई करें।
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