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छतीसगढ़

12वीं के छात्रों के कम अंक आये है फिर भी CUET के जरिए DU में मिल सकता है एडमिशन

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DU Admissions 2021: 90% से कम अंक लाने वाले छात्र इन कोर्सेज में ले सकते हैं एडमिशन, चेक करें - du admissions 2021 update courses for students who get less than 90 percent – News18 हिंदी

  • CUET परीक्षा को लेकर कुछ दिनों से काफी चर्चा हो रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने एडमिशन की पॉलिसी जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अब CUET की परीक्षा देना जरूरी है। इसी के अंकों के आधार पर एडमिशन की मेरिट लिस्ट तैयार होगी।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ-साथ देश की अन्य 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में भी एडमिशन CUET परीक्षा के जरिए होंगे।

    दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहले एडमिशन कैसे होता था?

    12वीं क्लास के पर्सेंटेज देखे जाते थे।
    12वीं के अंकों के आधार पर कट-ऑफ मार्क्स तय होते थे और फिर एडमिशन होता था।

    CUET के रजिस्ट्रेशन के लिए कौन से डॉक्युमेंट्स हैं जरूरी?

    10वीं और 12वीं की मार्कशीट
    फोटो
    सिग्नेचर (स्कैन की गई कॉपी)
    फोटो के साथ ID प्रूफ (आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि)
    जाति प्रमाण पत्र, नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट (OBC सर्टिफिकेट)

    कब खुलेगी CUET की ऑफिशियल वेबसाइट?
    NTA ने यह जानकारी दी थी कि CUET की ऑफिशियल वेबसाइट 2 अप्रैल से खुलने वाली थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब NTA ने कहा है कि वेबसाइट 6 अप्रैल से 6 मई तक ओपन रहेगी। वेबसाइट ओपन करने पर एप्लिकेशन फॉर्म अपलोड नहीं हुआ है।

  •  

    CUET 2022 का रजिस्ट्रेशन कैसे कर सकते हैं?

    ऑफिशियल वेबसाइट cuet.samarth.ac.in पर जाएं।
    रजिस्ट्रेशन लिंक सामने आएगा, उस पर क्लिक करें।
    अपना और माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल सहित सभी जानकारी डालकर सबमिट कर दें।
    अब पेज पर वापस जाएं और लॉग इन करें।
    लॉग इन करने के बाद एप्लिकेशन फॉर्म सामने आएगा, इसे भरें।
    अपनी फोटो और साइन अपलोड करें।
    लास्ट में एप्लिकेशन फीस भर दें।
    प्रोसेस कम्पलीट हो गई है, अब आप एप्लिकेशन का प्रिंट ले लें।

    क्या है CUET?
    2022-23 शैक्षणिक सत्र से ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने का सिस्टम बदल दिया गया है। अब देश के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आपको 12वीं के अंकों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। एक ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट, यानी CUET देना होगा। इसके स्कोर के हिसाब से ही आपको कॉलेज में एडमिशन मिलेगा।

    CUET 2022 का एग्जाम NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कंडक्ट करेगी। इससे पहले CUET के अंतर्गत सिर्फ देश की 14 यूनिवर्सिटी आती थीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया, JNU जैसे कई बड़े संस्थान अपने यहां अलग से कट-ऑफ मार्क्स या फिर एंट्रेंस एग्जाम लेकर एडमिशन देते थे।

    सवाल यह है कि

    आखिर क्यों पड़ी CUET की जरूरत?

    पिछले कई वर्षों से इस बात के प्रयास जारी थे कि ढेरों एंट्रेंस टेस्ट के बजाय एक ही एंट्रेंस टेस्ट लेने की व्यवस्था की जाए, जिससे हायर एजुकेशन के दौरान स्टूडेंट्स पर एंट्रेंस टेस्ट का बोझ कम हो।
    सरकार यूनिवर्सिटी के एडमिशन के लिए बोर्ड के नंबरों को इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं थी। इसकी वजह यह थी कि देश के अलग-अलग बोर्ड में कॉपियों के जांचने का तरीका अलग है।

  • कुछ बोर्ड मार्किंग में अन्य बोर्ड की तुलना में आसानी से मार्क्स दे देते हैं। इससे कुछ बोर्ड के स्टूडेंट्स को 12वीं में ज्यादा नंबर मिलने की वजह से UG कोर्स में एडमिशन में अनुचित फायदा मिलता है।
    UGC प्रमुख एम. जगदीश कुमार का कहना है कि कुछ टॉप यूनिवर्सिटीज के ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए 100 पर्सेंट का कट-ऑफ देना हास्यास्पद है। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट देश के सभी स्टूडेंट्स को एक समान अवसर देगा।
  • कुमार का कहना है कि उम्मीद है कि CUET के आने से छात्र अब 12वीं की परीक्षा में ज्यादा अंक लाने की कोशिश करने के बजाय ज्यादा ध्यान सीखने पर दे पाएंगे।

    UGC के चेयरमैन क्या कहते हैं
    UGC के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार बताते हैं कि साढ़े तीन घंटे की कम्प्यूटर बेस्ड CUET परीक्षा में 12वीं की NCERT के किताबों पर आधारित मल्टिपल चॉइस सवाल आएंगे। चूंकि एग्जाम NCERT के सिलेबस पर आधारित होगा, इसलिए छात्रों को कोचिंग की जरूरत नहीं होगी।

  •  

    हालांकि, एक चिंता ये भी है कि ऐसे में स्टेट बोर्ड से पढ़कर आने वाले छात्र NCERT से पढ़े छात्रों से कैसे कंपीट कर सकेंगे। इस पर UGC का मत है कि देश के अधिकतर राज्यों में NCERT सिलेबस अपनाया जा चुका है पर स्टेट बोर्ड से पढ़ाई करने वालों छात्रों का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। CUET एग्जाम IIT परीक्षाओं की तरह नहीं होगी। विशेषज्ञ छात्रों के डिफिकल्ट लेवल को मॉडरेट करेंगे और एग्जाम पेपर को सिर्फ 12वीं कक्षा के सिलेबस तक ही सीमित रखेंगे।

    परीक्षा कितने भाषाओं में कंडक्ट की जाएगी?
    CUET एग्जाम 13 अलग-अलग भाषाओं में आयोजित होगा, ताकि देशभर के सभी छात्र अपनी पसंद की भाषा चुन सकें। इनमें इंग्लिश, हिंदी, असमी, बंगाली, मराठी, पंजाबी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, ओड़िया, उर्दू, तमिल और तेलुगू शामिल हैं।

    CUET के आधार पर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज मेरिट लिस्ट कैसे तैयार करेंगी और छात्रों को कैसे एडमिशन मिलेगा?
    CUET स्टूडेंट्स को रैंक नहीं देगा, यह केवल उन्हें मार्क्स देगा। इन मार्क्स के आधार पर प्रक्रिया में शामिल यूनिवर्सिटीज अपनी कट-ऑफ तय करेंगी। एग्जाम में गलत जवाब देने वालों की नेगेटिव मार्किंग होगी। कट-ऑफ तय करने में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में मिले अंकों का कोई वेटेज नहीं होगा।

    नया नियम क्या है?

    सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने के लिए एक ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET देना होगा।
    2022-23 शैक्षणिक सत्र से CUET का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी।
    सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के लिए अप्लाई करने के लिए अप्रैल के पहले हफ्ते से आवेदन लिए जाएंगे। वहीं, छात्रों को जुलाई के पहले हफ्ते में CUET एग्जाम देना होगा।
    छात्र सेंटर पर जाकर एग्जाम देंगे। परीक्षा में मल्टीपल चॉइस सवाल आएंगे, जिनका जवाब स्टूडेंट्स कम्प्यूटर की मदद से अटैम्पट करेंगे।
    NCERT के 12वीं का सिलेबस और CUET एग्जाम का सिलेबस आपस में मिलता-जुलता हो सकता है।
    एक स्टूडेंट ज्यादा से ज्यादा 6 विषयों के लिए ही परीक्षा दे सकता है।
    12वीं के अंकों के आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एडमिशन की लिस्ट नहीं तैयार होगी।

    CUET एग्जाम से छात्रों को क्या फायदा मिलेगा?

    कॉमन टेस्ट से सभी बच्चों को एक समान मौका मिलेगा।
    हर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए अलग-अलग एग्जाम नहीं देना होगा।
    12वीं में कम अंक आने के बाद भी फेवरेट सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल सकता है।

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छतीसगढ़

गर्मी का प्रकोप बढ़ा : अप्रैल में टूट सकता है रिकॉर्ड

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इस बार तपाएगी भीषण गर्मी, IMD की चेतावनी, इन राज्यों में दिखेगा सूर्य का रौद्र अवतार

 

अप्रैल महीने का आखिरी पश्चिमी विक्षोभ कश्मीर में दस्तक दे चुका है। इसकी वजह से अगले 2 दिन तक पहाड़ों से मैदान तक तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की गिरावट आएगी, लेकिन 22 अप्रैल से राहत का यह दौर खत्म हो जाएगा। फिर तापमान बढ़ना शुरू होगा। वहीं, अप्रैल महीने के आखिरी 4-5 दिन में लू चलने लगेगी।

अप्रैल में टूट सकता है रिकॉर्ड
मौसम विज्ञानियों का मानना है कि इस बार अप्रैल महीने में गर्मी के सभी रिकॉर्ड टूट सकते हैं। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के प्रमुख वैज्ञानिक जीपी शर्मा का कहना है कि 1 से 19 अप्रैल तक दिल्ली के बस स्टेशन सफदरजंग का अधिकतम तापमान सामान्य (36.6 डिग्री सेल्सियस) से अधिक बना रहा। अप्रैल के बचे हुए दिनों में तापमान लगातार बढ़ता जाएगा।

अगर बीते दो सालों की बात करें तो 2020 और 2021 में अप्रैल का औसत तापमान 35.5 डिग्री और 37.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। वहीं इस बार औसत तापमान 40 डिग्री तक रह सकता है, जो 120 साल में कभी भी दर्ज नहीं हुआ है।

औसत तापमान 3 डिग्री तक बढ़ सकता है
शर्मा ने बताया कि औसत तापमान एक डिग्री बढ़ना भी बहुत बड़ी बात है। इस बार जो स्थितियां बन रही हैं, उन्हें देखकर लगता है कि औसत तापमान 3 डिग्री तक ज्यादा रह सकता है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री तक ज्यादा रहेगा। इन राज्यों में अप्रैल महीने में गर्मी के सभी रिकॉर्ड टूट सकते हैं।

मार्च 2022 में टूटा था 122 साल का रिकॉर्ड
बता दें कि इस साल गर्मी ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मार्च और अप्रैल में ही भयानक गर्मी से लोगों का जीना मुहाल हो गया। 11 अप्रैल को दिल्ली में 72 साल का गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया। विशेषज्ञों का कहा कि 72 साल बाद अप्रैल के फर्स्ट हाफ में तापमान 42 डिग्री से ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह मार्च 2022 में गर्मी ने पिछले 122 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था।

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छतीसगढ़

क्या आपका बच्चा चिन्ता करता है तो इसे नादानी न समझे

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Finding the off switch when kids worry - Parenting Ideas

 

  • चिंता, यह शब्द जितना छोटा है उससे कहीं ज्यादा ही खतरनाक। चिंता की वजह से कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। माता-पिता, पति-पत्नी, बूढ़े-बुजुर्ग, इन लोगों को चिंता तो होती ही है, लेकिन क्या आपने बच्चों को चिंता करते सुना है?

    कई बार बच्चे आपसे कहते भी है कि मैं कुछ सोच रहा था, फलां बात को लेकर दुखी हूं या फिर मुझे चिंता हो रही है अपने किसी दोस्त की। यह सब बातें सुनकर आप हंसते हैं और उसे अनदेखा भी कर देते हैं।

    एक पेरेंट के तौर पर आपको यह बात गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि बुजुर्गों में होने वाली चिंता अब बच्चों में भी दिखने लगी है। पहली बार अमेरिकी विशेषज्ञों की टास्क फोर्स ने 8-18 साल के बच्चों के बिगड़ते मेंटल हेल्थ को देखते हुए उनकी स्थिति जांचने की बात सामने रखी है। जिससे बच्चे अपनी उम्र की तरह व्यवहार करें और उनका बचपन न खत्म हो।

    चिंता में बीत रहा है बचपन
    बाल मनोवैज्ञानिक और मेयो क्लिनिक में पीडियाट्रिक एंग्जाइटी डिसऑर्डर्स क्लिनिक के डायरेक्टर स्टीफन पीएच व्हाइटसाइड के अनुसार, बच्चों में चिंता बचपन की सबसे आम मानसिक गड़बड़ी बनकर सामने आई है। इसके लिए हमें जल्द से जल्द जांच करनी होगी। ज्यादातर बच्चों को मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत है, जो उन्हें इस समय मिल नहीं रही। कोरोना ने इस समस्या को बढ़ा दिया है।

    बच्चों में लक्षण नहीं होने पर भी जांच की जाएगी
    जी हां, अमेरिकी टास्ट फोर्स ने सिफारिश की है कि बच्चों में लक्षण दिखें या नहीं दिखें, हर बच्चे के मेंटल हेल्थ की जांच करनी चाहिए। टास्क फोर्स की मेंबर मार्था कुबिक के अनुसार, बच्चों का जीवन अस्त-व्यस्त हो, उससे पहले हमें पेरेंट के तौर पर उसमें दखल देना होगा।

    चिंता की वजह से बच्चे नशा कर सकते हैं
    चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे अगर बचपन से चिंता करने लगते हैं तो आगे चलकर वो डिप्रेशन में जा सकता हैं। इतना ही नहीं इससे उसे नशे की लत भी लग सकती है।

    अब बात करते हैं भारतीय बच्चों के बारे में-
    स्टेट ऑफ द वर्ल्ड चिल्ड्रन 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर 7 में से एक बच्चा डिप्रेशन का शिकार है। वहीं इंडियन जर्नल ऑफ साइकेट्री की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कोरोना महामारी से पहले भी करीब 5 करोड़ बच्चों में कोई न कोई मानसिक बीमारी रही है। इनमें से करीब 90% बच्चों या उनके माता-पिता ने इलाज के बारे मे सोचा तक नहीं।

    अगर बच्चा चिंता कर रहा है तो माता-पिता को क्या करना चाहिए?
    फोर्टिस हॉस्पिटल के मेंटल हेल्थ और बिहेवियरल सांइस के डायरेक्टर डॉ. समीर पारीख कहते हैं– अगर बच्चों में चिंता के लक्षण दिख रहे हैं तो उसे हल्के में लेना छोड़ना होगा। पेरेंट को बच्चों की बात को गंभीरता से सुनना होगा। अगर बच्चा कुछ कहना चाह रहा है तो उसे नजरअंदाज न करें।

    इसी तरह अगर बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव दिख रहा है तब भी उसे गंभीरता से लें, उससे बात करें। अगर बच्चा ज्यादा चिंता में है तो माता-पिता को पीडियाट्रिक (बाल रोग विशेषज्ञ) या किसी दूसरे प्राइमरी देखभाल वाले डॉक्टर से बात करनी चाहिए। क्योंकि लगातार चिंता करने से बच्चा किसी डिसऑर्डर का शिकार हो सकता है।

    बच्चों में चिंता का क्या कारण है?
    डॉक्टर प्रितेश गौतम के अनुसार कई ऐसी बातें हैं, जो आपको दिखने में छोटी लगती हैं, लेकिन बच्चों के कोमल मन-मस्तिष्क में गहरा असर छोड़ जाती हैं। इनमें से कुछ ऐसी बाते भी हैं-

    माता-पिता का बच्चों को समय न दे पाना
    क्लास में कम मार्क्स लाने का डर सताना
    पेरेंट्स का झगड़ा और अलग होने का डर
    घर का नेगेटिव माहौल रहना

    बच्चों को बार-बार डांटना या मारना

    एक और स्टडी में हुआ ये खुलासा
    दुनियाभर में की गई एक स्टडी के अनुसार, डिप्रेशन के शुरुआती लक्षण 17 साल की उम्र में दिखाई देते हैं, लेकिन इन दिनों डिप्रेशन की पहचान शुरुआती उम्र में ही समझ आने लगी है। ज्यादा से ज्यादा जांच करने की वजह से ये चीजें समझ आ रही है।

    बच्चे के लिए कंस्ट्रक्टिव काम करें
    फोर्टिस एस्कॉर्ट्स इंस्टीटय़ूट एंड रिसर्च सेंटर, दिल्ली में सीनियर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. भावना बर्मी चिंता के बारे में कहती हैं कि अगर अपना समय थोड़ा क्रिएटिव काम में लगा लिया जाए तो काफी हद तक चिंता दूर हो सकती है।

    इसलिए पॉजिटिव बातों को ज्यादा जगह दें और नेगेटिव को दूर कर दें। बच्चों को…

    सुबह जल्दी उठाएं
    मेडिटेशन करवाएं।
    घर का खाना खिलाएं।
    खाने में जूस जरूर दें।
    पढ़ाई का ज्यादा प्रेशर न दें।
    डांस या म्यूजिक जैसी एक्टिविटी करवाएं।

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छतीसगढ़

देश में फिर डरा रहा है कोरोना : अचानक केस बढ़ने के कारण हो सकते है स्कूल बंद

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Delhi Schools Reopen: दिल्ली में जल्द खुलेंगे स्कूल, एक्सपर्ट कमिटी ने की है स्कूलों को खोलने की सिफारिश

 

देश में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए केंद्र ने दिल्ली समेत 5 राज्यों को आगाह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बढ़ते पॉजिटिविटी रेट पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मिजोरम को लेटर लिखा। इस लेटर में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय और निगरानी करने को कहा गया है।

वहीं, राजधानी में कोरोना को लेकर दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने आज बैठक बुलाई है। उप-राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में CM केजरीवाल और AIIMS डायरेक्टर भी मौजूद रहेंगे। बैठक में स्कूलों को बंद करने पर भी फैसला हो सकता है। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, पॉजिटिविटी रेट 4.42% दर्ज किया गया।

आगे बढ़ने से पहले नीचे दिए पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं...

भारत में रोजाना आने वाले नए केसेस में राजधानी दिल्ली समेत इन 4 राज्यों का योगदान काफी अधिक है। यहां पॉजिटिविटी रेट में लगातार इजाफा देखा गया है। केंद्र ने वैक्सीनेशन और प्रिकॉशन डोज को लेकर भी तेजी लाने को कहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को फाइव फोल्ड स्ट्रैटजी पर काम करने को कहा है। इसमें टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, वैक्सीनेशन और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर फॉलो करने की सलाह दी गई है।

इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग करें
संक्रमण बढ़ने के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए सभी हेल्थ फैसिलिटीज को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी की नियमित निगरानी, ​​इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की भी सलाह दी गई है। मेडिकल फैसिलिटीज के साथ-साथ सीवेज के सैंपल भी जांचने की सलाह दी गई है।

दिल्ली में वीकली केस में 170% का इजाफा
स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक, दिल्ली में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 998 थी, जो 19 अप्रैल को बढ़कर 2,671 हो गई है। यहां कोविड पॉजिटिविटी रेट में भी 1.42% की बढ़ोतरी देखी गई है। यह आंकड़ा पिछले हफ्ते 3.49% था।

हरियाणा में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में 521 नए मामले मिले थे, जो कि 19 अप्रैल तक से बढ़कर 1,299 हो गए। पिछले हफ्ते पॉजिटिविटी रेट 1.22% से बढ़कर 2.86% हो गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 217 थी, जो 19 अप्रैल तक बढ़कर 637 हो गई। यहां पॉजिटिविटी रेट पिछले हफ्ते 0.03% था, जो बढ़कर 0.09% हो गया है।

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