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जानिए एलआईसी हमरा पैसा कहा कहा इन्वेस्ट कर ते हाय .. ?

सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का आईपीओ जल्दी ही आने वाला है
. सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में एलआईसी ने सबसे ज्यादा पैसे लगाए हैं. इसमें एलआईसी के पास अभी 95,274 करोड़ आईटी सेक्टर तेजी से ग्रो कर रहा है. पिछले एक दशक के दौरान भारतीय आईटी कंपनियों ने दुनिया भर में नाम कमाया है.
5लआईसी के पोर्टफोलियो में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का भी नाम है
. एलआईसी के पास एसबीआई के 33,855 करोड़ रुपये के शेयर हैं. -6दिसंबर तिमाही में एलआईसी ने कुछ कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी भी बढ़ाई. इन कंपनियों में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, ड्रेजिंग इंडिया, कम्प्यूटर सर्विसेज, कोफॉ…
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, एनएसई पर लिस्टेड 85 कंपनियों में एलआईसी की होल्डिंग बढ़ी. इसमें 0.69 फीसदी की तेजी आई. दूसरी ओर 99 एनएसई लिस्टेड कंपनियों मे…

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6 महीने में सबसे तेजी से बढ़ी तेल,जानें आप पर क्या होगा असर

भारत में दिसंबर में खाद्य उत्पादों की महंगाई दर 6 महीने में सबसे तेजी से बढ़ी थी. अगर सरकार आयात शुल्क में दोबारा कटौती करती है, तो इसका कीमतों पर फिलहाल असर नहीं पड़ेगा. ऐसे में उसे रिफाइंड पाम तेल मंगाकर उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये बाजार से कम कीमत पर लोगों को बेचना होगा.सरकार की महंगाई थामने की तमाम कोशिशें बेकार होती दिख रही हैं।
बीते साल आयात शुल्क में कटौती कर जैसे-तैसे खाद्य तेल की कीमतों को नीचे लाई थी, लेकिन इस साल फिर रिकॉर्ड बढ़ोतरी होती दिख रही है.ब्लूमबर्ग के मुताबिक, भारत सहित दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पाम तेल की कीमतों में इस साल अब तक रिकॉर्ड 20 फीसदी का उछाल आ चुका है. इसके अलावा सोयाबीन तेल के दाम भी 2022 में अब तक 17 फीसदी बढ़ चुके हैं. इसका असर भारत सहित दुनियाभर की खाद्य महंगाई पर दिखेगा, जो पहले ही रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच चुकी है।
दिसंबर में दिखी थी 6 महीने की बड़ी तेजी
पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के सबसे बड़े खरीदार भारत में दिसंबर में खाद्य उत्पादों की महंगाई दर 6 महीने में सबसे तेजी से बढ़ी थी. इससे भारतीय नागरिकों का बजट और बिगड़ गया जबकि मोदी सरकार पर भी राहत बढ़ाने का दबाव आ गया. सरकार ने पिछले साल कीमतें घटाने के लिए पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी पर आयात शुल्क घटा दिया था.
बाजार से कम कीमत पर लोगों को बेचना होगा
दिग्गज ट्रेडर और गोदरेज इंटरनेशनल के डाइरेक्टर दोराब मिस्त्री का कहना है कि सरकार के पास अब सीमित विकल्प हैं. अगर वह आयात शुल्क में दोबारा कटौती करती है, तो इसका कीमतों पर फिलहाल असर नहीं पड़ेगा. ऐसे में उसे रिफाइंड पाम तेल मंगाकर उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिये बाजार से कम कीमत पर लोगों को बेचना होगा.
PDS के तहत राज्यों को मुख्य रूप से गेहूं और चावल ही बांटने के लिए देती
खाद्य मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि सरकार अभी PDS के तहत राज्यों को मुख्य रूप से गेहूं और चावल ही बांटने के लिए देती है. हालांकि, राज्य सरकारें अपनी तरफ से कोई भी अनाज इसमें शामिल कर सकती हैं. सरकार फिलहाल खाद्य तेल पर आयात निर्भरता घटाने की प्लानिंग कर रही. इसमें उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बुआई रकबा बढ़ाने और जेनेटिकली मोडिफाइड (GMO) तिलहन बीज बोने पर जोर दिया जा रहा है।
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