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EX BF को मारने के लिए भेजा था जहरीला चिकन, पर डिलीवरी बॉय के बेटे ने तोड़ दिया दम

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ज्यादती दुश्मनी जैसे मामलों में आपने अक्सर लोगों को एक दूसरे से बदला लेने के लिए क्रूरता की हर हद को पार करते देखा या सुना होगा। लेकिन क्या कभी ऐसा प्रेम संबंधों में सुना है?

इंडोनेशिया से एक बड़ा अजीबोगरीब मामला आया है। यहाँ एक पूर्व प्रेमिका ने अपने पुराने बॉयफ्रेंड से नाराज होकर उसे जहरीला चिकन खिलाना चाहा। हालाँकि, बॉयफ्रेंड तो बच गया लेकिन डिलीवरी मैन के बेटे ने उसे खाकर दम तोड़ दिया।

द सन में 5 मई को प्रकाशित खबर के अनुसार, इंडोनेशिया में नैनी अप्रिल्लियानी नुर्जामन नाम की 25 वर्षीय महिला ने अपने पूर्व बॉयफ्रेंड टॉमी को मारने के लिए साजिश रची।

रमजान के महीने में 25 अप्रैल को उसने चिकन बनाया और उस पर साइनाइड छिड़क कर अपने बॉयफ्रेंड के लिए उसे तैयार किया। इसके बाद नैनी ने Bandiman नाम के 47 वर्षीय डिलीवरी मैन से संपर्क किया। नैनी ने डिलीवरी मैन को अपना नाम ‘हामिद’ बताया और कहा कि ये चिकन वह टॉमी के घर पहुँचा दे।

पुलिस बताती है कि नैनी ने उस दिन एक मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवर को चिकन दिया और उसे कहा कि वह बंतुल में टॉमी के घर में उसे खाना डिलीवर कर दे। डिलीवरी मैन ने ऑर्डर लिया और खाना पहुँचाने के लिए टॉमी के घर गया।

घर पर बेल बजाई तो वहाँ टॉमी की पत्नी ने गेट खोला। उसने बताया कि उसका पति घर पर नहीं है। इसके बाद महिला ने वो खाना लेने से भी मना कर दिया, जो नैनी ने भेजा था। असमंजस में फँसे डिलीवरी मैन को थक हार कर खाना अपने घर ले जाना पड़ा।

घर पर उसकी पत्नी और बेटे नबा फैज ने इफ्तार में इसे खाया और खाते ही उन्हें उल्टियाँ होने लगीं। दोनों को तुरंत अस्पाल पहुँचाया गया। लेकिन वहाँ डॉक्टर्स पत्नी को बचा पाए, मगर बेटे की मौत हो गई।

जब मामला पुलिस तक पहुँचा तो सारी जाँच हुई। पुलिस को पता चला कि चिकन नैनी के घर का था। वह अपने एक्स बॉयफ्रेंड टॉमी के किसी दूसरी लड़की से शादी करने से नाराज थी। इसलिए उसने गुस्से में पूरी साजिश रची।

खबर के अनुसार, महिला इस समय पुलिस की हिरासत में है और उस पर हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। जाँच में ये भी सामने आया है कि पोटाशियम साइनाइड का इस्तेमाल के कारण बच्चा बेहोश हुआ और फिर उसकी मौत हो गई।

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राकेश टिकैत ने उठाई बैंकों की बात तो बोले केंद्रीय मंत्री- आप किसानों की बात करो, बाकी सरकार देख लेगी

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केंद्र सरकार तीन कृषि कानून वापस लेकर बैकफुट पर पहुंच गई है. लेकिन किसान नेता इस बात पर अब भी लामबंद हैं कि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर सरकार कानून बनाए. वहीं किसान किसानों के खिलाफ दर्ज केस, केंद्रीय मंत्री टेनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी किसान संगठनों द्वारा की जा रही है.

इसी बीच अब राकेश टिकैत अब बैंकों के निजीकरण पर सरकार को घेरने वाले हैं. वहीं सरकार ने इस मामले में राकेश टिकैत को नसीहत दी है. सरकार ने टिकैत के उसके इस बयान पर कहा कि आप किसानों की बात करें, बाकी सरकार देख लेगी. यानि कुल मिलाकर अब बैंकों के निजीकरण पर राकेश टिकैत सरकार पर हल्‍ला बोलेंगे.

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्‍ता राकेश उन्‍होंने बाकायदा इसके खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है. राकेश टिकैत ने कहा कि हमने सरकार से पहले ही कह दिया था कि अगला नंबर बैंकों का होगा. राकेश टिकैत ने अपने ट्वीट में लिखा कि 6 दिसंबर को संसद में सरकारी बैंकों के निजीकरण का बिल पेश होने जा रहा है.

निजीकरण के खिलाफ देशभर में साझा आंदोलन की जरूरत है.इस मामले में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का बयान भी सामने आया. उन्‍होंने कहा कि आपकी मांगें पूरी हो गई हैं, आप किसानों की बात करो. सरकार कैसे चलानी है और नीतियों के जो फैसले लेने हैं वो सरकार लेगी.

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नागालैंड मामले में 21वीं पैरा मिलिट्री फोर्स के खिलाफ FIR दर्ज

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नगालैंड में शनिवार रात सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई आम लोगों के मारे जाने के मामले में मोन ज़िले के तिज़ित पुलिस थाने में स्वत: संज्ञान लेते हुए 21वीं पैरा मिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है. एफ़आईआर में कहा गया है कि ”चार दिसंबर को कोयले की खदानों में काम करने वाले मज़दूर एक गाड़ी में तिरु से अपने गांव ओटिंग लौट रहे थे.

तिरु और ओटिंग गांव के बीच में लॉन्गखाओ में पहुंचने पर सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गाड़ी पर गोलियां चला दीं जिससे ओटिंग गांव के कई लोग मारे गए और कई गंभीर रूप से घायल हो गए.”

एफ़आईआर में ये भी कहा है कि “घटना के दौरान कोई पुलिस गाइड नहीं था और ना ही सुरक्षा बलों के इस अभियान में पुलिस गाइड देने के लिए पुलिस थाने से मांग की गई थी. इससे ये साफ़ है कि सुरक्षा बलों का इरादा आम लोगों को मारना और घायल करना था.”

नगालैंड के मोन ज़िले के तिरु इलाक़े में शनिवार रात सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है. ये इलाक़ा म्यांमार की सीमा के नज़दीक है.आधिकारिक रूप से अभी तक ये नहीं बताया गया है कि कितने लोगों की मौत हुई है लेकिन समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कम से कम 11 आम लोगों की मौत हुई है.

वहीं, नगा पीपल्स फ्रंट पार्टी के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री टी.आर. ज़ेलियांग के अनुसार, 13 लोगों की मौत हुई है.राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है और जांच के लिए एक महीने का समय दिया गया है.

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लखीमपुर में गन्ना किसानों का बकाया नहीं किया भुगतान, चीनी मिल के 4 अफसरों पर FIR,गन्ना विभाग और बजाज चीनी मिल के खिलाफ खोला मोर्चा

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गन्ना विभाग के अधिकारियों और बजाज ग्रुप की चीनी मिल  के प्रबंधन में हो रही लापरवाही के कारण किसान  परेशान हैं. किसानों को अब तक पिछले वर्ष के गन्ने का ही भुगतान नहीं हो सका है. उधर, सीएम योगी आदित्यनाथ पहले ही प्रदेश के सभी जिलों गन्ना किसानों को शत प्रतिशत भुगतान का निर्देश दे चुके हैं. गौरतलब है कि गन्ने का करीब 700 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है, ऐसे में किसान भड़क गए हैं और बजाज चीनी मिल प्रंबधन और गन्ना विभाग के खिलाफ धरना-प्रर्दशन का मोर्चा खोल दिया है

गन्ना विभाग के अधिकारियों और बजाज ग्रुप की चीनी मिल के प्रबंधन में हो रही लापरवाही के कारण किसान परेशान हैं. किसानों को अब तक पिछले वर्ष के गन्ने का ही भुगतान नहीं हो सका है. उधर, सीएम योगी आदित्यनाथ पहले ही प्रदेश के सभी जिलों गन्ना किसानों को शत प्रतिशत भुगतान का निर्देश दे चुके हैं.

पिछले दिनों हुई लखीमपुर घटना और अब गन्ने के भुगतान में देरी से किसानों के बीच काफी रोष है. गौरतलब है कि गन्ने का करीब 700 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है, ऐसे में किसान भड़क गए हैं और बजाज चीनी मिल प्रंबधन और गन्ना विभाग के खिलाफ धरना-प्रर्दशन का मोर्चा खोल दिया है.

711 करोड़ रुपए हैं बकाया : दरअसल, लखीमपुर खीरी जिलें में ही बजाज ग्रुप की 3 गोला, पलिया और खंभारखेडा समेत 3 चीनी मिलें है. जिसमें बजाज की गोला चीनी मिल पर पिछले वर्ष का ही करीब 274 करोड़, पलिया चीनी मिल पर करीब 266 करोड़ और खंभारखेडा चीनी मिल पर करीब 171 करोड़ रुपए का यानी कुल 711 करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य बकाया है. मौजूदा पेराई सत्र में भी गन्ना मूल्य के सैकड़ों करोड़ रूपए का अब तक भुगतान नही किया गया है. इस कारण इस क्षेत्र के गन्ना किसानों नें पिछले वर्ष के गन्ना बकाया का भुगतान न होने तक इन चीनी मिलों को इस वर्ष अपना गन्ना न देने का ऐलान कर दिया है. इसके अलावा बकाया भगुतान न हो जाने तक अपना गन्ना किसी दूसरी चीनी मिलो में भेज जाने की मांग को लेकर गन्ना विभाग के खिलाफ धरना-प्रर्दशन शुरू कर दिया है.

मजबूरी में कर रहे हैं प्रदर्शन
न्यूज 18 से बात करते हुए पलिया के बिजौरिया गांव के गन्ना किसान विक्की रूप राय बताते है कि ‘पलिया चीनी मिल पर सिर्फ हमारा ही पिछले वर्ष का 10 लाख रुपया बकाया है. हम लोगों की आर्थिक स्थित खराब हो गई है. क्योंकि हमें चीनी मिल तक अपना 50 क्विंटल गन्ना पहुंचाने के लिए भी हर बार करीब 1500 रुपए से अधिक खर्च करने पड़ते हैं. हम किसानों को कोई 1 रुपया भी उधार नही देता. हम लोग अब मजबूरन अपने बकाये पैसे के लिये धरना-प्रर्दशन कर रहे है. हम लोगों ने ये तय किया है

कि अब जब तक हमारा पिछले वर्ष का बकाया पैसा नही मिल जाता, तब तक हम इस चीनी मिल को अपना गन्ना नही देंगे. गन्ना विभाग और सरकार हमारी मदद कर हमारा गन्ना किसी दूसरी चीनी मिल में भेजे जाने की कृपा करे. वरना इस बार भी हमारे गन्ने का मूल्य ये चीनी मिल नही दे पाएगी और हम सभी किसान कर्ज में डूब जायेंगे.’

हांलाकि विधानसभा चुनाव से पहले लखीमपुर में एक बड़े स्तर पर गन्ना किसानों की नाराजगी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पलिया स्थित बजाज चीनी मिल के अधिकारियों पर FIR तो करवा दी है. लेकिन बकाया भुगतान कराने की कोई व्यवस्था नही हो पा रही है. लखीमपुर के जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश पटेल बताते है कि बजाज चीनी मिलों पर बकाये के बावजूद उन्हे गन्ना देने के अलावा किसानों के पास तत्काल कोई विकल्प मौजूद नहीं है.

क्योंकि लखीमपुर की सम्पूर्णानगर और बेलरायां जैसी सहकारी चीनी मिलों की हालत पहले ही खराब है. अन्य निजी चीनी मिलों के पास इतनी क्षमता नही है कि वे इन क्षेत्रो के किसानों के भी गन्ने की पेराई कर सके. इस कारण विरोध-प्रर्दशन करने वाले किसानों को समझाने की कोशिश की जा रही है.

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