राजस्थान
10वी के लाखो छात्रों का इंतजार हुआ खत्म, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सेकेंडरी का रिजल्ट आज..

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सेकेंडरी, प्रवेशिका और सेकेंडरी(व्यवसायिक) एग्जाम का रिजल्ट आज दोपहर 3 बजे जयपुर में घोषित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला शिक्षा संकुल के कॉन्फ्रेंस हाल में यह परिणाम घोषित करेंगे। पिछले साल कोरोना के कारण एग्जाम नहीं हुए थे और बोर्ड का रिजल्ट 99.56 प्रतिशत रहा था। यह बोर्ड इतिहास में सबसे ज्यादा था, ऐसे में इस बार का रिजल्ट इससे कम ही रहेगा।
बोर्ड सचिव मेघना चौधरी ने बताया कि सेकेंडरी परीक्षा के लिए इस वर्ष 10 लाख 36 हजार 626 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया। इसी तरह प्रवेशिका परीक्षा के लिए 7,229 और माध्यमिक( व्यवसायिक ) के लिए 56,215 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है। रिजल्ट्स बोर्ड की वेबसाइट www.rajeduboard.rajasthan.gov.in पर उपलब्ध होगें। गौरतलब है कि राजस्थान बोर्ड की ओर से 12वीं आट्र्स, साइंस व कॉमर्स संकाय का रिजल्ट्स पहले ही घोषित किए जा चुके हैं।
वर्ष परिणाम लड़के लड़कियां शामिल पास
2021 99.56 99.51 99.62 1255385 1249833
2020 80.64 79.90 81.41 1152201 929045
2019 79.85 79.45 80.35 1098132 876848
2018 79.86 79.79 79.89 1058018 844909
2017 78.96 79.01 78.89 1072799 847063
यह रहा 12वीं का रिजल्ट
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 12वीं आट्र्स, साइंस व कॉमर्स संकाय का परिणाम जारी किया जा चुका है। साइंस में 96.53, कॉमर्स में 97.53 आट्र्स में 96.33 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए।
99.56% रहा पिछले साल रिजल्ट
साल 2021 में 10वीं का रिजल्ट 99.56% रहा है। लड़कों का पास प्रतिशत 99.51 और लड़कियों का 99.52 रहा। 12,04,606, छात्र फर्स्ट डिवीजन से पास हुए। 44,875 स्टूडेंट्स ने सेकंड जबकि 352 छात्रों ने थर्ड डिवीजन हासिल किया। एक छात्र के सप्लीमेंट्री आई। 10वीं बोर्ड में 12 लाख 55 हजार 385 छात्र-छात्राएं थे। इनमें से 12 लाख 49 हजार 833 पास हुए।
पिछले साल नहीं हुई परीक्षाएं, फार्मूले से तय किया रिजल्ट
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना 4 दिसंबर 1957 को हुई थी। हर साल बोर्ड परीक्षा आयोजित करता था। कोरोना के कारण 2021 में परीक्षा नहीं हो पाई। सरकार ने स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का निर्णय लिया। मार्क्स के लिए राज्य सरकार ने कमेटी का गठन किया। कमेटी के बताए फार्मूला के आधार पर स्कूलों ने अपना रिजल्ट तैयार कर बोर्ड को भेजा। इसके बाद बोर्ड ने अपना परीक्षा परिणाम घोषित किया। यह परिणाम 99.56 प्रतिशत रहा।
वर्ष 2020 का परीक्षा परिणाम : 80.64 %
कक्षा 10 की परीक्षा में कुल 11 लाख 78 हजार 570 विद्यार्थियों ने फार्म भरे थे। 11 लाख 52 हजार 201 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। 9 लाख 29 हजार 45 विद्यार्थी उत्तीर्ण रहे। परिणाम 80.64 प्रतिशत रहा।

राजस्थान
राजस्थान में बिजली बंद, मानसून में हो सकती है बिजली की समस्या…
राजस्थान में बिजली और कोयला संकट गहराने लगा है। प्री-मॉनसून बारिश का दौर थमने के बाद से बिजली की डिमांड बढ़ी हुई है। मॉनसून पीरियड में छत्तीसगढ़ की कोयला माइंस और कोल इंडिया से प्रदेश के थर्मल प्लांट्स के लिए कोयला सप्लाई में कमी की आशंका से बिजली विभाग सतर्क हो गया है।
बिजली कंपनी-राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को अंदेशा है कि राजस्थान में 4340 मेगावाट के बिजली प्लांट्स मॉनसून पीरियड में ठप हो सकते हैं। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने कहा है कि राजस्थान को अंधकार से बचाने के लिए मैं छत्तीसगढ़ की जनता और प्रशासन से मदद की अपील करता हूं।
जुलाई-अगस्त-सितम्बर में बिजली खरीदने के शॉर्ट टर्म टेंडर निकाले
बिजली संकट से निपटने के लिए राजस्थान ऊर्जा विकास निगम ने आनन-फानन में अगले तीन महीनों- जुलाई, अगस्त, सितम्बर के लिए 500-500 मेगावट के शॉर्ट टर्म बिजली खरीद के टेंडर निकाले हैं। 27 जून तक ये टेंडर खोले जाएंगे। इन टेंडर्स पर रेट की किसी तरह की कैपिंग नहीं होती है। केंद्र से तय 12 रुपए यूनिट से ज्यादा रेट भी टेंडरिंग में आ सकती है।
अधिकतम डिमांड से बिजली उपलब्धता हुई कम
राजस्थान में बिजली की अधिकतम डिमांड 11904 मेगावाट, औसत डिमांड 10595 मेगावाट और औसत उपलब्धता 11623 रिकॉर्ड हुई है। अधिकतम डिमांड से 281 मेगावाट बिजली कम पड़ रही है। पिछले दिनों प्री-मानसून बारिश के दौर में बिजली डिमांड में 9 करोड़ 18 लाख यूनिट से ज्यादा प्रतिदिन की बड़ी गिरावट आई थी। इसके चलते 2 से 4 घंटे तक हो रही घोषित-अघोषित बिजली कटौती बंद कर दी गई थी। तब पीक आवर्स में औसत डिमांड से 1692 मेगावाट बिजली ज्यादा हो गई थी। अब फिर से अघोषित बिजली कटौती भी शुरु हो गई है। फीडर्स को रोस्टर पर चलाकर आधा घंटे से 1 घंटे तक कटौती की जा रही है। कई जगह फाल्ट और मेंटेनेंस के नाम पर भी पावर कट हो रहा है।
5 थर्मल पावर प्लांट की यूनिट्स ठप
सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 5 थर्मल पावर प्लांट की यूनिट फिलहाल ठप हैं। इनमें सूरतगढ़ प्लांट की 250-250 मेगावाट की दो यूनिट और सूरतगढ़ की सुपर क्रिटिकल 660 मेगावट की यूनिट, छबड़ा की 250 मेगावाट यूनिट और कोटा थर्मल की 210 मेगावट की एक यूनिट बंद हैं। इन यूनिट्स के ठप होने से 1620 मेगावाट प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा है।
मॉनसून में क्यों होगा कोयला-बिजली संकट ?
राजस्थान में कोल बेस्ड पावर प्लांट्स यूनिट्स की कुल कैपेसिटी 7580 मेगावाट है। इनमें से 3240 मेगावाट कैपेसिटी के प्लांट कोल इंडिया की SECL और NCL से कोयला सप्लाई लेते हैं। जबकि 4340 मेगावाट प्लांट राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की छत्तीसगढ़ में खुद की कैप्टिव कोल माइंस से लिंक्ड हैं। परसा ईस्ट कैंटे बेसिन एक्सटेंशन और पारसा कोल ब्लॉक के नए ब्लॉक में राजस्थान को केन्द्र से मंजूरी के बाद माइंस नहीं करने दी जा रही। क्योंकि वहां हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ काटने की परमिशन नहीं मिल रही। आदिवासी,एनजीओ और स्थानीय नेता विरोध में हैं।
राजस्थान के अफसर, ऊर्जा मंत्री और सीएम तक छत्तीसगढ़ सरकार से अपील और मुलाकात कर जल्द माइनिंग परमिशन शुरु करवाने की मांग रख चुके हैं। मौजूदा माइनिंग एरिया में कोयला बहुत कम बचा है। मॉनसून की बारिश का पानी कोयला खदानों में भरने से माइनिंग बहुत कम हो जाएगी। कोयला लोडिंग और रेलवे रैक की सप्लाई प्रभावित हो जाएगी। पिछले साल अगस्त में भी मॉनसून में गम्भीर कोयला संकट पैदा हुआ था। राजस्थान के बिजली घरों में अभी औसत 8 दिन का ही कोयला बचा है। वो धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा,तो प्लांट चलाने मुश्किल हो जाएंगे।
PEKB (पारसा ईस्ट कैंटे बेसिन) कोल ब्लॉक से पहले फेज में माइनिंग वर्क 2013 में शुरु हुआ और माइनिंग के बाद समतल की गई लैंड पर 8 लाख पेड़ लगाए गए हैं। इसलिए यह कोई नया काम नहीं है। जिसका इतना पुरजोर विरोध किया जा रहा है। राजस्थान की 4340 मेगावाट कैपेसिटी की थर्मल पावर यूनिट्स से बिजली की रेग्युलर सप्लाई के लिए छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य वन क्षेत्र में जारी आंदोलन को रोककर PEKB और परसा कोयला खदानों से कोयला खनन जल्द शुरु करना बेहद जरूरी है। राजस्थान को अंधकार से बचाने के लिए मैं छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र की जनता और छत्तीसगढ़ प्रशासन से आंदोलन और विरोध को खत्म कर जल्द माइनिंग वर्क शुरु करने में मदद की अपील करता हूँ। – भंवर सिंह भाटी, ऊर्जा मंत्री, राजस्थान
राजस्थान
today weather update: राजस्थान में तेज बारिश, जल्द हो सकती है प्री मानसून की एंट्री…

राजस्थान में भले ही मानसून की एंट्री पिछले साल की तुलना में इस साल थोड़ी देरी हो रही हो, लेकिन प्री-मानसून के बादलों ने अब तक की बारिश का कोटा पूरा कर दिया। राजस्थान में अमूमन 20 जून तक जितनी बारिश होती है उससे 23 फीसदी ज्यादा बरसात अब तक हो चुकी है। पश्चिम और दक्षिण राजस्थान के कई जगहों पर तो तेज बारिश के बाद बांध, झरने और नदियाें में पानी की आवक शुरू हो गई। ऐसे में लोगों के लिए ये प्री-मानसून की बारिश एक अच्छे मानसून के आने का संकेत दे रहे है।
राजस्थान में 1 जून से 20 जून तक सामान्यत: औसतन 25.1MM बरसात होती है, लेकिन इस बार अब तक 30.8MM औसत बरसात हो चुकी है, जो सामान्य से 23 फीसदी ज्यादा है। सबसे ज्यादा बरसात पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई, जिससे इस प्री-मानसून की बारिश का कोटा पूरा हो गया। मौसम केन्द्र का अनुमान है इस वर्ष भी प्रदेश में मानसून की एंट्री झालावाड़ से सकती है।
चम्बल में शुरू हुई पानी की आवक
चम्बल नदी में पानी की आवक शुरू हो गई, जिसके चलते इन पर बने बांधों का जलस्तर बढ़ने लगा है। चित्तौड़गढ़ के राणा प्रताप सागर बांध का जलस्तर 347.16 से बढ़कर 347.91 आरएल मीटर तक पहुंच गया। इस तरह बांध में 42114 क्यूसेक से ज्यादा पानी आया।
इसी तरह टोंक के बीसलपुर बांध में भी करीब 7 सेमी. की बढ़ोतरी हुई है। भीलवाड़ा के प्रसिद्ध मेनाल झरना कल बहता दिखाई दिया, जो अमूमन मानसून के आने के बाद ही बहता है। इसके अलावा 14 जून को सिरोही के पिंडवाड़ा तहसील में बारिश के बाद झाडोली नदी बहनी शुरू हो गई। इधर पाली में काकराड़ी व कोयलवाव नदी में उसी दिन तेज बारिश के बाद पानी बहता दिखा।
दौसा में सबसे ज्यादा बरसात
जिलेवार स्थिति देखे तो सबसे ज्यादा बरसात दौसा जिले में हुई। यहां सामान्य से 181 फीसदी ज्यादा बरसात हुई है। दौसा में अमूमन 20 जून तक 28.1MM बरसात होती है, लेकिन इस बार अब तक 79MM बारिश हो चुकी है। इसी तरह सवाई माधोपुर में 179 फीसदी, बूंदी में 171, नागौर में 177 और भरतपुर में 119 ज्यादा बरसात इस प्री-मानसून में अब तक हो चुकी है।
जल्द हो सकती है मानसून की एंट्री
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक देश में मानसून के आगे बढ़ने की स्थिति अभी अनुकूल है। दक्षिण-पश्चिमी मानसून आगे बढ़ते हुए की सीमा बढ़कर अब राजस्थान की सीमा के नजदीक पहुंच चुकी है। ये सीमा राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहरथाना एरिया के नजदीक से गुजर रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 22 जून तक प्रदेश में मानसून की एंट्री हाड़ौती अंचल के रास्ते से हो सकती है। आपको बता दें कि पिछले साल 2021 में भी मानसून की एंट्री उदयपुर, झालावाड़ के रास्ते 18 जून को हुई थी।
प्रदेश में इन जिलों में हुई अच्छी बारिश
जिला सामान्य बारिश (MM) इस बार हुई बारिश (MM) ज्यादा %
बाड़मेर 17.4 26.9 55%
बीकानेर 25.4 45.9 81
गंगानगर 20.7 35.2 70
नागौर 21.4 59.3 177
अजमेर 21.1 30.9 46
अलवर 29 38.4 32
बारां 38.1 70.6 85
भरतपुर 24.8 54.2 119
बूंदी 27.3 74 171
दौसा 28.1 79 181
धौलपुर 28.4 45.5 60
जयपुर 25.5 48.4 90
करौली 24.7 48 94
कोटा 34.5 60.1 74
सीकर 28.1 30.4 8
सवाई माधोपुर 28.4 79.1 179
टोंक 22.6 32.8 45
उदयपुर 34.6 36.4 5
इन जिलों में हुई कम बारिश
जिला सामान्य बारिश (MM) इस बार हुई बारिश (MM) कम %
सिरोही 35.5 14.3 60
राजसमंद 31.6 27.3 14
प्रतापगढ़ 48.3 24.2 50
झुंझुनूं 33.9 22.9 33
झालावाड़ 40.3 17.4 57
डूंगरपुर 40.3 36.4 10
चित्तौड़गढ़ 32.8 13.3 60
भीलवाड़ा 28.1 22.7 19
बांसवाड़ा 44.5 25.6
राजस्थान
राजस्थान में पेट्रोल डीजल का समय बदला, अब से पेट्रोल डीजल रात 9बजे के बाद बंद रखने का एलान…

तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटा दी। वहीं अब राजस्थान में दो तेल कंपनियाें HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम काॅरपाेरेशन लिमिटेड) और BPCL (भारत पेट्रोलियम काॅरपाेरेशन लिमिटेड) ने घाटा कम करने के लिए तेल की राशनिंग शुरू कर दी है।
दोनों कंपनियों के सेल्स ऑफिसर पेट्रोल पंप संचालकों को खुले निर्देश दे रहे हैं कि वर्किंग आवर्स 8 घंटे ही रखें। यानी रात 9 बजे के बाद पेट्रोल-डीजल की बिक्री न करें। तेल की सेल घटाई जाए। दोनों कंपनियों के अफसरों ने अपने स्तर पर ही तेल कम देना शुरू कर दिया है।
सप्लाई पर ब्रेक, पंप पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री ठप
तेल कम देने के पीछे आगे से सप्लाई कम मिलना बताया जा रहा है, जबकि IOC (इंडियन ओयल कॉरपोरेशन लिमिटेड) अपने स्तर पर पूरे तेल की सप्लाई कर रही है। हालत यह है कि राजस्थान के 6700 पंप में से 4500 पंप रविवार को सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। 11 जून को दूसरा शनिवार व 12 जून को रविवार होने के कारण तेल डिपो बंद रहेंगे। सोमवार को ही सप्लाई सुचारू हो सकेगी। इस अघोषित तेल संकट पर कंपनियों के अफसरों ने चुप्पी साध रखी है। वहीं रिलायंस व एस्सार के पंप पर तेल की बिक्री नहीं हो रही।
दोनों कंपनियों ने मई के दूसरे सप्ताह से शुरू की राशनिंग
दोनों तेल कंपनियों ने मई के दूसरे सप्ताह से ये राशनिंग शुरू की है। इसके पीछे उच्च स्तर का हवाला दिया गया है। पहले डिमांड ड्राफ्ट के जरिए बुकिंग करवाते ही हाथों-हाथ आपूर्ति होती थी, लेकिन अब एडवांस बुकिंग मांगी जा रही है। इसके बावजूद भी दो से तीन दिन में सप्लाई की जा रही है। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर अजमेर व कोटा स्थित तीनों कंपनियों के डिपो तेल के लिए मिलने में दिक्कत आ रही है।
डीलर्स से कह रहे- आगे से सप्लाई नहीं मिल रही, सेल घटाएं
राशनिंग पर जिम्मेदार बोले- ये तो वैश्विक संकट है
तेल की राशनिंग को लेकर भास्कर ने दोनों कंपनियों के जिम्मेदारों से बातचीत करने का प्रयास किया। जोधपुर में BPCL के डिपो इंचार्ज एसके राजपूत से बात की तो उन्होंने तेल संकट होने की बात खारिज कर दी। फिर कहा- ये वैश्विक संकट है। इसी तरह जयपुर में HPCL के डीजीएम आशीष सिंघल ने इस मुद्दे पर बात करना उचित नहीं समझा।
कंपनियों का दावा- 12 से 14 रु./लीटर तक हो रहा घाटा
21 मई को केंद्र ने पेट्रोल पर 9.55 रु. व डीजल पर 7.20 रु./ली. एक्साइज ड्यूटी घटाई। पहले से ही तेल की कीमतों में उछाल पर ब्रेक लगा रखा है। BPCL व HPCL कम हो रहे मुनाफे के लिए इसे ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दोनों कंपनियों के अफसर डीजल पर 14 रु. और पेट्रोल पर 11 से 12 रु./लीटर नुकसान की बात कह रहे हैं।
राजस्थान में तेल की बिक्री
डीजल : रोज 1.10 करोड़ लीटर
सालाना 400 करोड़ लीटर
पेट्रोल : रोज 23 लाख लीटर
सालाना 85 करोड़ लीटर
दोनों कंपनियों के डायरेक्टर तक शिकायत, लेकिन कोई असर नहीं
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुनीत बगई बाेले- HPCL और BPCL अपने डीलर्स को तेल की सप्लाई नहीं दे रहे हैं। डीजल की सप्लाई तो रोक दी गई है। HPCL के सीएमडी डॉ. पुष्प कुमार जोशी, BPCL के कार्यकारी निदेशक पीएस रवि को स्थिति से अवगत कराया है। फिर भी हालात नहीं सुधरे।
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