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भारत में करीब 3 करोड़ 43 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित,जाने इनके बचाव के उपाय..

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विश्‍व अस्‍थमा दिवस: भारत में आठ फीसदी लोग अस्‍थमा से पीड़ित हैं, जानें इसमें कितने हैं बच्‍चे | World Asthma Day: Eight percent of people in India suffer from asthma, know how

 

 

इसी महीने लंग इंडिया जर्नल में पब्लिश हुई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 3 करोड़ 43 लाख लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। दुनियाभर में अस्थमा से जितने भी लोगों की मौत होती है, उनमें भारत के 42% लोग शामिल हैं।

अस्थमा की वजह से होने वाली मौत का आंकड़ा

दुनिया में हर साल 4 लाख 61 हजार लोगों की मौत होती है।
भारत में हर साल 1 लाख 98 हजार लोगों की मौत होती है।

 क्या है अस्थमा?
जवाब- अस्थमा को ही दमा कहते हैं। यह फेफड़े की बीमारी है। अस्थमा के कारण सांस लेने वाली नली में सूजन आ जाती है और वो सिकुड़ने लगती है। सिकुड़न के कारण मरीज को सांस लेने में तकलीफ और खांसी जैसी समस्या होती है। अलग-अलग लोगों पर अस्थमा का असर अलग-अलग होता है।

अस्थमा इतना खतरनाक है कि इससे मौत हो जाती है?
हां, बिल्कुल। अगर सही इलाज में देरी हो जाए तो अस्थमा जानलेवा हो सकता है। अस्थमा के मरीज को खांसी का दौरा भी पड़ सकता है। जो कुछ घंटों तक भी जारी रह सकता है। यहां तक कि दौरे के दौरान भी मरीज की मौत हो सकती है।

 अस्थमा के कारण कौन-कौन से हैं?

अस्थमा फेफडे़ की बीमारी है। इसलिए जो लोग सिगरेट पीते हैं, उन्हें अस्थमा हो सकता है।

एलर्जी- अस्थमा की शुरुआत एलर्जी से होती है। एलर्जी के पेशेंट को जरा सी लापरवाही से अस्थमा हो सकता है।

मोटापा- मोटापा कई सारी बीमारियों का कारण है। ऐसे कई सारे मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें अस्थमा की बीमारी मोटापे से होती है।

प्रदूषण- प्रदूषण की वजह से अस्थमा हाेने की संभावना बढ़ जाती है।

स्ट्रेस- स्ट्रेस की वजह से कई सारी बीमारियां होती हैं, अस्थमा भी इनमें से एक है।

वायु प्रदूषण से कैसे अस्थमा के मरीजों को आता है अटैक?
जवाब- अस्थमा के मरीजों पर वायु प्रदूषण का बुरा असर पड़ता है। इसकी वजह से उन्हें अस्थमा का अटैक भी आ सकता है। दरअसल, प्रदूषण के कुछ पार्टिकल बहुत छोटे होते हैं और आसानी से फेफड़ों में चले जाते हैं। इसकी वजह से अस्थमा का लक्षण तुरंत आपकी बॉडी में ट्रिगर हो जाता है और अस्थमा के अटैक की संभावना होती है। कुछ रिसर्च की मानें तो ज्यादा प्रदूषण वाली जगह पर बच्चों को अस्थमा होने का खतरा ज्यादा होता है।

इनहेलर लेते वक्त सावधानियां

इनहेलर का इस्तेमाल कुछ लोग नीचे बैठकर करते हैं। यह तरीका गलत है। इससे आपके फेफड़ों में सही तरीके से सांस नहीं जा पाती है। खड़े रहने से फेफड़ों में पूरी तरह से सांस जाती है और सांस को छोड़ते वक्त फेफड़ों में दबाव नहीं पड़ता है। इसलिए इनहेलर लेते वक्त खड़े रहने की कोशिश करें।
अस्थमा के मरीज अक्सर इनहेलर को गलत तरीके से पकड़ते हैं। ऐसा करने से आपको सही फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए इनहेलर को झुककर और तिरछा नहीं पकड़ें। इसके इस्तेमाल करने का सही तरीका डॉक्टर से जरूर पूछें।
जब मीडियम डोज इनहेलर ले रहे हैं, तब स्पेसर यूज करें। स्पेसर दवा को फेफड़ों तक पहुंचाता है। इनहेलर को स्पेसर में डालने के बाद दवा को डालें और अच्छी तरह से सांस लेते हुए इनहेलर का इस्तेमाल करें। इससे आपकी दवा की सही खुराक फेफड़ों तक पहुंचेगी।
इनहेलर यूज करते वक्त जीभ और दांत से उसे दबाएं नहीं। इससे भी दवा सही तरीके से फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती है।

अस्थमा का इलाज बीच में छोड़ देते हैं मरीज

एम्स (अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान) के पल्मोलॉजी विभाग के डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं कि अस्थमा लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। इसलिए इसका इलाज भी लंबे समय तक चलता है। बहुत से मरीज जब थोड़ा ठीक महसूस करते हैं तो इनहेलर लेना बीच में ही छोड़ देते हैं। ये काफी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि बीमारी ठीक होने के पहले ही आप अपना इलाज बीच में छोड़ रहे हैं। मरीजों को इनहेलर लेने का सही तरीका और बीच में छोड़ने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। इनहेलर को अपनी मर्जी से बीच में छोड़ना आपके लिए खतरा हो सकता है।

 अस्थमा के मरीजों को कोरोना हो जाए तो क्या करें?

सबसे पहले डॉक्टर से इलाज करवाएं।
खुद से दवा न लें। डॉक्टर की बताई दवा ही खाएं।
समय-समय पर अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करते रहें।
जिन चीजों से अस्थमा बढ़ता है, उनसे दूर रहें।
डॉक्टर से पूछने के बाद ही किसी भी दवा को लेना बंद करें।

अस्थमा के मरीजों को क्या नहीं खाना चाहिए?

मूंगफली
दूध
नमक
अल्कोहल
अंडे
सोया
मछली
सुपारी

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Lifestyle

क्या आप भी ब्लड प्रेशर का मरीज है तो, रखे इन बातो का ध्यान..

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जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी के कारण जिन स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है, हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) उनमें से एक है। एक दशक पहले तक हाइपरटेंशन को मुख्यरूप से बुजुर्गों में होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसके शिकार होते देखे जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर हाई ब्लड प्रेशर वाले रोगियों की संख्या में उछाल देखा जा रहा है, ऐसे में इस खतरे को समझते हुए सभी लोगों को कम उम्र से ही बचाव के उपाय शुरू कर देने चाहिए।

अध्ययनों से पता चलता है कि हाई ब्लड प्रेशर जीवनभर बनी रहनी वाली समस्या है, दवाइयों के माध्यम से सिर्फ इसे कंट्रोल किया जा सकता है। हम सभी जाने-अनजाने कई ऐसी चीजें करते रहते हैं जो रक्तचाप बढ़ने का कारण बन सकती हैं। हाइपरटेंशन के बढ़ते वैश्विक खतरे के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि हमारी कौन सी आदतें रक्तचाप बढ़ने का कारण बन सकती हैं? जिनपर सभी लोगों को विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल

सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी कि गतिहीन जीवनशैली को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण माना जाता है, हाई ब्लड प्रेशर की भी समस्या उसमें से एक है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग एक ही जगह पर लंबे समय तक बैठे रहने वाले काम करते हैं या फिर नियमित रूप से व्यायाम या शारीरिक गतिविधि नहीं करते हैं, उनमें रक्तचाप बढ़ने का जोखिम कई गुना अधिक हो सकता है। इससे बचे रहने के लिए दिनचर्या में योगासनों को जरूर शामिल करें।

सोडियम युक्त चीजों का अधिक सेवन

सोडियम की अधिकता को रक्तचाप बढ़ाने वाले प्रमुख जोखिम कारकों के रूप में जाना जाता है। सोडियम, नमक का प्रमुख घटक है, ऐसे में ज्यादा नमक युक्त चीजों का सेवन करना आपको हाई ब्लड प्रेशर का रोगी बना सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार सभी लोगों को दिनभर में किसी भी प्रकार से 2,300 मिलीग्राम से अधिक मात्रा (करीब एक चम्मच) से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

तनाव के कारण बढ़ सकती है समस्या

कई शोध, तनाव लेने को ब्लड प्रेशर बढ़ाने के लिए जिम्मेदार प्रमुख कारकों में से एक मानते हैं। अधिक तनाव लेने वाले लोगों में क्रोनिक हाइपरटेंशन का जोखिम बढ़ जाता है जिसे हृदय रोगों का कारण माना जाता है। यही कारण है कि सभी लोगों को दैनिक जीवन में तनाव प्रबंधन के उपाय जैसे योग-मेडिटेशन और स्वस्थ आहार को अपनाने की सलाह दी जाती है। तनाव के स्तर को कंट्रोल करके ब्लड प्रेशर को भी बढ़ने से रोका जा सकता है।

शराब-धूम्रपान और कैफीन का सेवन

शराब-धूम्रपान की आदत को अध्ययनों में सेहत के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक बताया गया है। इसके अलावा अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करने वाले लोगों में भी रक्तचाप बढ़ने का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञ सभी लोगों को कैफीन युक्त चीजों का सेवन नियंत्रित करने और शराब-धूम्रपान से बिल्कुल परहेज करने की सलाह देते हैं। इन बातों को ध्यान में रखकर हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

 

 

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AC की हवा लेते है आप भी तो हो जाइये सावधान, नही तो हो सकते है आपको ये गंभीर बीमारी… 

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गर्मी के दिनों में गर्मी से बचने के लिए लोग तरह-तरह के तरीकें अपना रहे है। इस लिस्ट में कूलर, पंखा और AC शामिल है जिन्हे लोग अपने घर, कार्यालय और गाड़ी में लगवाते हैं। हालाँकि एसी का अधिक प्रयोग करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जी हाँ, लगातार कई घंटों तक एसी का प्रयोग करने से आप विभिन्न तरह की बीमारियों की भी चपेट में आ सकते है। आप सभी को बता दें कि विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि एसी का निरंतर प्रयोग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जी हाँ और इससे त्वचा में रूखापन आ जाता है, और शरीर के विभिन्न जोड़ों के अंगों में भी रूखापन आ जाता है। जी दरअसल दिनभर एसी का प्रयोग करना स्वास्थ्य को खराब करने के लिए काफी है।

एसी का ज्यादा प्रयोग करने से ये आ रही समस्याएं- एसी का अधिक प्रयोग करने से आंखों और त्वचा पर रूखापन आ जाता है। जी हाँ और इसके अलावा ब्लड प्रेशर भी कम होने लगता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। जी दरअसल एसी से सीधे बाहर के वातावरण में जाने से उल्टी आना, चक्कर आना और लू लगने का भी खतरा रहता है। केवल यही नहीं बल्कि इसके अलावा जो लोग हार्ट या किडनी रोग से परेशान है। उनको भी एसी के ज्यादा प्रयोग से दिक्कत हो सकती है। एसी का प्रयोग करने से पसीना नहीं आता इसलिए शरीर के टॉकसिंस बाहर नहीं निकल पाते जोकि बीमारियों का खतरा पैदा करते हैंं।

बरतें सावधानियां- ध्यान रहे एसी के बिल्कूल सामने ना बैठें और तापमान 24 डिग्री सेल्सियस से कम ना रखें। जी हाँ और इसी के साथ एसी वाले कमरे से एकदम सीधे धूप में ना जाएं और दो घंटे के नियमित अंतराल के बाद एसी को बंद कर दें। आपको बता दें कि छोटे बच्चों के लिए भी एसी की ज्यादा कूलिंग ठीक नहीं है।

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कितनी मात्रा में सोडियम का सेवन करना चाहिए, आइये जानते है..

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जानें रोजाना कितनी मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए | Know how much salt should be consumed daily

 

 

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कई प्रकार के पोषक तत्वों और खनिजों की रोजाना संयमित मात्रा में आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों की कमी या अधिकता, दोनों ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। सोडियम भी एक ऐसा ही अति आवश्यक तत्व होता है। सोडियम, नमक का प्रमुख घटक माना जाता है। शरीर में इसकी कमी या अधिकता, दोनों ही कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती हैं।

नमक के अधिक सेवन को जहां ब्लड प्रेशर बढ़ने और गंभीर स्थितियों में हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने वाला माना जाता है, वहीं इसकी कमी शरीर को गंभीर कमजोरी और थकान का एहसास  करा सकती है।

शोध से पता चलता है कि बहुत अधिक नमक खाने वाले लोगों में हृदय रोगों के साथ-साथ मस्तिष्क से संबंधित कई तरह की जटिलताएं भी हो सकती हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ सभी लोगों को नियंत्रित मात्रा में इसके सेवन को सुनिश्चित करने की सलाह देते हैं। हालांकि इसके लिए नमक का सेवन बिल्कुल भी नहीं बंद कर देना चाहिए। ऐसा करना भी आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।

कितनी मात्रा में सोडियम का सेवन करना चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को दैनिक रूप से सोडियम की मात्रा पर विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञों के मुताबिक एक दिन में अधिकतम 2,300 मिलीग्राम या लगभग 1 चम्मच की मात्रा में नमक का सेवन किया जा सकता है। ध्यान रहे, इसकी कमी और अधिकता दोनों नुकसानदायक है। कई पैक्ड या जंक खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा अधिक हो सकती है, ऐसे में इनके सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

सोडियम की अधिकता

अतिरिक्त सोडियम का सेवन ऑस्टियोपोरोसिस, किडनी की बीमारी और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। ये स्थितियां हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ा देती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो बच्चे नमकीन खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करते हैं, उनमें मीठे पेय या मीठी चीजों के सेवन की संभावना भी बढ़ जाती है जिसके कारण मोटापे का खतरा हो सकता है। पैक्ड चिप्स और अन्य चीजों से सोडियम का उपभोग बढ़ने का जोखिम रहता है।

सोडियम की कमी

शरीर में सोडियम की कमी होना भी आपके लिए समस्याओं को बढ़ा सकती है। इसके कारण कमजोरी, थकान और चक्कर आने जैसी समस्या सबसे आम है। कुछ स्थितियों में लगातार सोडियम की कमी बने रहने को विशेषज्ञ कई अन्य बीमारियों का भी कारण मानते हैं।
एडिसन रोग
छोटी आंत में रुकावट
दस्त और उल्टी
थायराइड की समस्या।
दिल की धड़कनों की अनियमितता।
जलन होना।

इन बातों का रखें ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को हाई सोडियम वाली चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए।  यदि संभव हो तो भोजन में ऊपर से नमक मिलाने से बचना चाहिए। ऐडेड सॉल्ट के कई तरह के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं। सोडियम की अधिकता या कमी के कारण होने वाली समस्याओं की स्थिति में तुरंत किसी चिकित्सक से संपर्क जरूर करें।

 

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