छतीसगढ़
कोरोना के बाद अब बढ़ा स्वाइन फ्लू का कहर, इंदौर में 3 लोग स्वाइन फ्लू की चपेट में, एवं राजस्थान में 2 महीने में 90 से ज्यादा केस मिले, एवं 2 की मौत..
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते केसों के बीच केरल, UP और राजस्थान में स्वाइन फ्लू से मरीजों की मौत से हड़कंप मचा गया है। वहीं, मध्य प्रदेश के इंदौर में 3 लोग और ओडिशा में भी 2 लोग H1N1 से संक्रमित पाए गए हैं। देशभर के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के नए केस मिलने से दहशत है। मरीजों में कोरोना जैसे ही लक्षण निमोनिया, सांस लेने में समस्या और ऑक्सीजन की कमी देखने को मिल रही है, जो काफी खतरनाक संकेत है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि देश के किन राज्यों में अब तक स्वाइन फ्लू के मामले आए हैं? आखिर स्वाइन फ्लू होता क्या है? देश और दुनिया में स्वाइन फ्लू ने इससे पहले कब तबाही मचाई थी? इसके लक्षण और बचाव के तरीके क्या हैं?
देश के किन राज्यों में अब तक स्वाइन फ्लू के मामले आए हैं?
केरल: 1 मरीज की मौत, 1 संक्रमित
केरल के स्वास्थ्य अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि कोझिकोड की 12 वर्षीय लड़की की मौत स्वाइन फ्लू के चलते हुई है। लड़की की मौत रविवार, यानी 29 मई को ही हो गई थी, लेकिन लैब के नतीजे आने के बाद H1N1 की पुष्टि हुई। लड़की की जुड़वा बहन भी स्वाइन फ्लू से संक्रमित है और उसका इलाज चल रहा है।
मध्य प्रदेश : इंदौर में 3 लोग स्वाइन फ्लू की चपेट में
मध्य प्रदेश के इंदौर में 3 लाेग स्वाइन फ्लू से संक्रमित मिले हैं। CMHO डॉ. बीएस सेत्या ने बताया कि स्वाइन फ्लू से संक्रमित 2 पुरुषों और एक महिला का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। स्वास्थ्य विभाग ने उन इलाकों का सर्वे भी किया है जहां ये मरीज रहते हैं। 2019 में मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 720 पॉजिटिव मिले थे और 165 मरीजों की मौत हुई थी।
राजस्थान : 2 महीने में 90 से ज्यादा केस मिले, 2 की मौत
राजस्थान में पिछले 2 महीने में स्वाइन फ्लू के 90 से ज्यादा मरीज मिल चुके हैं। अकेले जयपुर में ही 70 से ज्यादा मरीज मिले हैं। अब तक जयपुर में स्वाइन फ्लू से 2 मरीजों की मौत हो चुकी है। जयपुर में 2018 में स्वाइन फ्लू से 221, 2019 में में 208 और 2021 में 116 लोगों की मौत हुई थी।
UP : कानुपर में एक मरीज की मौत
देश में सबसे घनी आबादी वाले राज्य UP में भी स्वाइन फ्लू ने दस्तक दे दी है। कानपुर में पिछले सोमवार, यानी 30 मई को स्वाइन फ्लू से एक सर्राफा कारोबारी की मौत के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मचा है। हालांकि, परिवार में अभी कोई और H1N1 पॉजिटिव नहीं पाया गया है। इसके पहले राज्य में 2019 में स्वाइन फ्लू से एक की मौत हुई थी।
स्वाइन फ्लू बीमारी क्या है?
स्वाइन फ्लू एक बेहद तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। स्वाइन फ्लू इन्फ्लूएंजा ए को हम H1N1 के नाम से भी जानते हैं। यह सुअरों से फैलने वाली बेहद खतरनाक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी से पीड़ित जानवर या इंसान के करीब जाने पर H1N1 वायरस इंसानों के शरीर में मौजूद ह्यूमन फ्लू स्ट्रेन के संपर्क में आता है। इससे यह बीमारी जानवरों के जरिए इंसानों में भी फैल जाती है।
देश और दुनिया में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 का इतिहास
सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी CDC ने 1918 में ही H1N1 फ्लू वायरस मिलने की पुष्टि की थी। हालांकि, 2009 में पहली बार स्वाइन फ्लू बीमारी को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन, यानी WHO ने महामारी घोषित किया है।
मार्च 2009 स्वाइन फ्लू का पहला मामला मैक्सिको में मिला था, जिसके कुछ दिनों बाद ही H1N1 संक्रमण के इंसानों में फैलने की पुष्टि टेक्सास और साउथ कैलिफोर्निया शहर में हुई थी। फिर देखते ही देखते यह बीमारी दुनिया के कई देशों में तेजी से फैली थी।
भारत में स्वाइन फ्लू संक्रमण फैलने के मामले 2022 से पहले भी 5 बार 2009, 2010, 2012, 2013 और 2015 में सामने आए हैं। इस बीमारी की गंभीरता को इससे पहचाना जा सकता है कि 8 अगस्त 2010 को H1N1 स्वाइन फ्लू से एक दिन में देश में 1833 लोगों की मौत हुई थी। यही नहीं, इस साल पूरी दुनिया में इस महामारी से करीब 2 लाख लोगों की मौत हुई थी।
इन फ्लू को कैसे पहचानें?
तेज फीवर होने के साथ-साथ लगातार नाक बह रही हो। सामान्य फीवर का ट्रीटमेंट लेने के बाद 24-48 घंटे में रिलीफ नहीं रहा है। इसके बाद इसे तुरंत स्वाइन फ्लू का लक्षण मानते हुए टेस्ट करवाना चाहिए।
किन लोगों के लिए स्वाइन फ्लू हो सकता है जानलेवा?
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए यह बीमारी कोरोना की तरह ही खतरनाक है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये वायरस भी कोरोना की तरह इंसान के फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है। जब ये वायरस हमारे शरीर पर अटैक करता है तो शरीर में मौजूद WBC इसे रोकने का काम करता है।
वहीं, WBC कमजोर होता है तो H1N1 अटैक को नहीं रोक पाता है। ऐसी स्थिति में लोग इस वायरस के शिकार हो जाते हैं। इससे सबसे ज्यादा दिक्कत TB के मरीज, HIV के मरीज, एनिमिया के मरीज, बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं, मधुमेह से पीड़ित लोगों को होती है। ऐसे लोग जब इसके चपेट में आते हैं तो उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत महसूस होती है, नहीं तो मरीज की जान भी जा सकती है।

छतीसगढ़
पीएनबी की नई ब्याज दरों में हुई वृद्धि, जाने कितने बढ़े रेट…

PNB FD Interest Rate: पंजाब नेशनल बैंक ने 2 करोड़ रुपए से कम के फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में वृद्धि कर दी है।
PNB FD Interest Rate: भारतीय स्टेट बैंक के बाद पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने विभिन्न अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। नई दरें 14 जून से लागू होंगी। बैंक ने अपनी वेबसाइट पर एक आधिकारिक घोषणा में कहा, ‘संशोधित ब्याज दरें 14 जून 2022 से नए जमा और मौजूदा एफडी के नवीनीकरण पर लागू होगी।’ पीएनबी ने दो करोड़ रुपए से कम जमा पर एफडी दरों में बढ़ोती की है। आरबीआई के रेपो रेट में बदलाव करने के बाद बैंक ने कदम उठाया है।
पीएनबी की नई ब्याज दरें
बैंक ने 7 से 45 दिनों की अवधि के लिए ब्याज दर को 3 फीसदी पर स्थिर रखा गया है। 46 से 90 दिनों में मैच्योर होने वाली एफडी की ब्याज दर में बदलाव नहीं किया है। इस अवधि के लिए 3.25 फीसदी ब्याज मिलेगा। 91 से 179 दिनों में मैच्योर होने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट पर 4 फीसदी ब्याज दर मिलती रहेगी। वहीं 180 दिन से लेकर 1 साल से कम की अवधि वाली एफडी पर 4.5 फीसदी ब्याज मिलेगा। हालांकि 1 साल से अधिक और दस वर्ष से कम की अवधि के लिए जमा राशि पर बड़े बदलावों की घोषणा की गई है।
इस अवधि की ब्याज दरों में बदलाव
1 साल से 2 वर्ष के बीच मैच्योरिटी बकेट में 5.2 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। बैंक 2 साल से ज्यादा और 3 साल तक मैच्योर होने वाली एफडी पर ब्याज दर पर 5.30 फीसदी की दर से ब्याज देगी। वहीं तीन साल से ज्यादा और 5 साल से कम में मैच्योर होने वाली डिपॉजिट पर 5.50 फीसदी दर से ब्याज मिलेगा, जो पहले 5.25 फीसदी था। पीएनबी 5 साल से ज्यादा और 10 साल से कम मैच्योर होने वाली जमाओं पर 5.60 फीसदी की दर से ब्याज देगा।
छतीसगढ़
गौरेला-पेंड्रा-मारवाही जिले में जंगली हाथी के हमले से एक व्यक्ति की मौत, एवं चार लोगो की जान जा चुकी..

मारवाही संभागीय वन अधिकारी दिनेश पटेल ने कहा कि नवीनतम घटना कटरा वन क्षेत्र के बेलझरिया गांव में शनिवार शाम को उस समय हुई जब रामधन गोंड अपने रोजमर्रा के कामकाज से घर लौटे थे।छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मारवाही जिले में जंगली हाथी के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। मृतक की उम्र 47 साल बताई जा रही है। इसी के साथ मध्य प्रदेश से सटे इस जिले में इस साल मार्च से अब तक चार लोग हाथियों के हमले में मारे जा चुके हैं।मारवाही संभागीय वन अधिकारी दिनेश पटेल ने कहा कि नवीनतम घटना कटरा वन क्षेत्र के बेलझरिया गांव में शनिवार शाम को उस समय हुई जब रामधन गोंड अपने रोजमर्रा के कामकाज से घर लौटे थे।
पटेल के अनुसार, गोंड अपने घर के पीछे हाथी को देखकर चिल्लाए कि तभी हाथी ने उन्हें सूंड़ से उठाकर जमीन पर पटक दिया और पैर से कुचल दिया। वन अधिकारी के अनुसार, गोंड की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनकी पत्नी वहां से भागने में कामयाब रही।अधिकारी ने कहा कि गोंड के परिवार को तत्काल 25,000 रुपये का राहत दी गई और 5.75 लाख रुपये का शेष मुआवजा जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दिया जाएगा।
छतीसगढ़
गर्मी में टुटा मौत का कहर, 4 डिग्री तापमान बढ़ने की आशंका..

इन दिनों गर्मी से राजस्थान सहित पूरा देश बेहाल है। ये स्थिति तो तब है जब देश में वर्ष 1991 से 2018 तक औसत तापमान में 0.7 डिग्री तापमान की वृद्धि हुई। माना जा रहा है कि 2022 में ये आंकड़ा 0.9 डिग्री बढ़ गया है। जरा सोचिए 31 साल में औसत तापमान में हुई 0.9 डिग्री की बढ़ोतरी ने गर्मी से इतना बेहाल कर दिया है तो तब क्या होगा, जब औसत तापमान 4 डिग्री तक बढ़ जाएगा।
गर्मी में लोग पहाड़ी इलाकों का रुख करते हैं, लेकिन अब वहां भी राहत नहीं मिलेगी। शिमला जैसी जगह 1 साल में हीटवेव के दिन दोगुना हो गए।
ग्रीनपीस इंडिया की ओर से हाल ही में जयपुर सहित देश के 10 बड़े शहरों में मौसम में आए बदलाव को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में कई डरावने खुलासे हुए हैं।
40 के बजाय अब साल में 100 दिन हीटवेव
भारत में 1950 में साल में 40 दिन हीटवेव चलती थी। 2020 में ये आंकड़ा 100 दिन तक पहुंच गया। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि हीटवेव का कहर इसी तरह बढ़ता रहा तो सदी के अंत पर औसत तापमान 4 डिग्री बढ़ जाएगा। कोई भी इतनी गर्मी झेल नहीं पाएगा। फसलें तबाह हो जाएंगी। हीटवेव इंसानों और जानवरों की मौत का कारण बनेगी।
हीटवेव में भारत की रैंक 5वीं, 50 सालों में 17000 मौतें
रिपोर्ट के अनुसार हीटवेव के मामले में भारत दुनिया में पांचवें नंबर पर है। भारत में पिछले 50 सालों में हीटवेव से 17 हजार से अधिक मौतें हुई हैं। वर्ष 1971 से वर्ष 2019 के बीच भारत में 706 दिन हीटवेव रही।
इस आधार पर तैयार की रिपोर्ट
रिपोर्ट में उन शहरों को शामिल किया गया, जहां जनसंख्या की वृद्धि सबसे तेजी से हो रही है। इन शहरों में अन्य शहरों के मुकाबले औद्योगिकरण भी बढ़ता जा रहा है। इनमें देश की राजधानी सहित राज्यों की राजधानियां शामिल हैं।
इन शहरों पर हीटवेव का प्रभाव जानने के लिए मौसम विभाग के ऑफिशियल डाटा का अध्ययन किया गया, जिनमें अप्रैल के रोजाना अधिकतम, न्यूनतम तापमान, ह्यूमिडिटी और मौसम विभाग के हीटवेव की चेतावनी शामिल हैं। इन शहरों में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि हो रही है और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान दे रहे हैं, जहां इन प्रभावों के चलते तापमान में अच्छा खासा उतार-चढ़ाव हो रहा है।
क्या है हीटवेव
मौसम विभाग के अनुसार जब पारा मैदानी इलाकों में 40 डिग्री या इससे अधिक हो जाए और पहाड़ों पर 30 डिग्री या इससे अधिक दर्ज हो तो हीटवेव की स्थिति कहलाती है।
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