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देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी को लगा तगड़ा झटका, जाने क्या है वजह…

देश का सबसे बड़ा आईपीओ आने वाला है। एक हालिया रिपोर्ट की मानें तो भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) 11 मार्च को इसे पेश कर सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि 11 मार्च को यह एंकर निवेशकों के लिए खुलेगा, जबकि अन्य निवेशकों के लिए इस दो दिन बाद खोला जाएगा। इसमें कहा गया कि मार्च के पहले सप्ताह में इसे नियामकीय मंजूरी मिल सकती है। एक ओर जहां आईपीओ लॉन्च की तैयारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर कंपनी को एक तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, एलआईसी पॉलिसी बिक्री में भारी कमी दर्ज की गई है।
पॉलिसी बिक्री में आई कमी
एलआईसी की ओर से बाजार नियामक सेबी को सौंपे गए दस्तावेजों के मुताबिक, एलआईसी की पॉलिसी बिक्री में भी भारी कमी आई है। व्यक्तिगत और समूह पॉलिसियां की बिक्री वित्त वर्ष 2018-19 के 7.5 करोड़ से 16.76 फीसदी घटकर वित्त वर्ष 2019-20 में 6.24 करोड़ पर आ गई। वहीं, वित्त वर्ष 2020-21 में इसमें 15.84 की गिरावट आई और यह आंकड़ा 5.25 करोड़ रह गया। कंपनी की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, लॉकडाउन के चलते 2019-20 की चौथी तिमाही में व्यक्तिगत पॉलिसियों की बिक्री 22.66 फीसदी घटकर 63.5 लाख रह गई, जो एक साल पहले समान अवधि में 82.1 लाख थी। 2020-21 और 2021-22 की पहली तिमाहियों में यह क्रमश: 46.20 फीसदी घटकर 19.1 लाख और फिर 34.93 फीसदी घटकर 23.1 लाख रह गई।
कंपनी पर बढ़ा आर्थिक बोझ
पॉलिसी बिक्री में आई कमी से जहां कंपनी को नुकसान हुआ, वहीं दूसरी ओर कोरोना काल में मृत्यू बीमा के लिए किए जाने वाले भुगतान के मामले में बीमा कंपनी पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि कोविड-19 महामारी की वजह से कंपनी की व्यक्तिगत और समूह पॉलिसियों की कुल संख्या में गिरावट आई है। जबकि, मृत्यु के बीमा दावों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2019, 2020 और 2021 के लिए मृत्यु बीमा दावों के लिए क्रमशः 17,128.84 करोड़ रुपये, 17,527.98 करोड़ रुपये और 23,926.89 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया है। वहीं 30 सितंबर, 2021 को समाप्त हुए छह महीनों के लिए 21,734.15 करोड़ रुपये भुगतान किया गया।
75000 करोड़ रुपये का बकाया
आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक निर्गम) लाने की तैयारियों में जुटी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी पर आयकर विभाग का करीब 75,000 करोड़ रुपये बकाया है। खास बात है कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) टैक्स की देनदारियां चुकाने के लिए अपने फंड का इस्तेमाल नहीं करना चाहती है। आईपीओ के लिए बाजार नियामक सेबी के पास पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, एलआईसी पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के 74,894.6 करोड़ रुपये के कुल 63 मामले चल रहे हैं। इनमें बीमा कंपनी पर प्रत्यक्ष कर के 37 मामलों में 72,762.3 करोड़ और 26 अप्रत्यक्ष कर मामलों में 2,132.3 करोड़ रुपये बकाया है, जिनकी वसूली होनी है।
21,500 करोड़ की लावारिस रकम
बता दें कि एलआईसी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, उसके पास सितंबर 2021 तक पॉलिसीधारकों के 21,500 करोड़ रुपये ऐसे हैं जो लावारिस पड़े हैं। यानी इनके लिए कोई दावा करने वाला नहीं है। इसका मतलब या तो इन पॉलिसीधारकों की मौत हो गई या फिर इनके बारे में उनके परिवार को पता नहीं है। मार्च 2021 तक 18,495 करोड़ रुपये और 2020 मार्च तक यह रकम 16,052 करोड़ रुपये थी जो मार्च 2019 तक 13,842 करोड़ रुपये थी।
पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आईपीओ
एलआईसी का ये आईपीओ अब तक सबसे बड़ा आईपीओ होगा। सेबी में सौंपे गए डीआरएपी के अनुसार, एलआईसी का इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल होगा। इसमें सरकार अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी के अंतर्गत 31.6 करोड़ शेयर जारी करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिसाब से कंपनी की एम्बेडेड वैल्यू 5.4 लाख करोड़ रुपये होगी। अमूमन किसी बीमा कंपनी का मार्केट कैप इस वैल्यू का चार गुना होता है। इस हिसाब से देखें तो एलआईसी की मार्केट वैल्यू 288 अरब डॉलर यानी करीब 22 लाख करोड़ रुपये होगी और एलआईसी देश की सबसे बड़ी मूल्यवान कंपनी बन जाएगी।
एलआईसी ने दी ये बड़ी सुविधा
समय पर प्रीमियम नहीं भरने के कारण या फिर अन्य किसी कारण से बहुत सारे लोगों की एलआईसी की पॉलिसी बंद हो जाती है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि पांच साल से जो पॉलिसी बंद पड़ी हैं, ऐसे मामले में कम चार्ज भरकर उसे फिर से चालू कराया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे पॉलिसीधारक जिनकी पॉलिसी बंद हो चुकी है, वे भी रिजर्वेशन पोर्शन के जरिए आईपीओ के लिए आवेदन करने के पात्र हो सकते हैं। दस्तावेजों में कहा गया है कि ऐसे सभी पॉलिसीधारक आईपीओ के लिए रिजर्वेशन के तहत निवेश करने के हकदार हैं जो मैच्योरिटी, सरेंडर या पॉलिसीहोल्डर की मृत्यु के चलते एलआईसी के रिकॉर्ड से बाहर नहीं हुए हैं।

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सूरजपुर : पूर्व सरपंच को हाथी ने कुचलकर ली जान,चालक ने बचाई जान…

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर अंतर्गत मसगा जंगल में सोमवार की रात करीब 9.30 बजे कार सवार पूर्व सरपंच व उनके ड्राइवर का सामना प्यारे हाथी से हो गया।
हाथी को अचानक सामने देखकर कार से उतरकर भाग रहे पूर्व सरपंच को हाथी ने कुचलकर मार डाला। वहीं कार चालक ने भाग कर अपनी जान बचाई। हाथी अब भी पास के जंगल में ही मौजूद है। वन विभाग के कर्मियों ने मार्ग में आने-जाने पर रोक लगा दी है। पूर्व सरपंच का शव कई टुकड़ों में एकत्र कर मरच्युरी भिजवाया गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
मिली जानकारी के अनुसार प्रतापपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत टुकुडांड़ के पूर्व सरपंच धनाराम सिंह सोमवार को एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने ग्राम पंचायत सोनपुर गए थे।
वहां से अपनी नैनो कार में सवार होकर रात करीब 9.30 बजे घर लौट रहे थे। रास्ते में मसगा जंगल से गुजरने के दौरान उनके सामने हाथी आ गया। अचानक हाथी को देखकर कार के ड्राइवर ने वाहन रोक दिया और भागने लगा। यह देख पूर्व सरपंच भी कार से उतरे और जंगल की ओर भागे।
इस दौरान हाथी ने दौड़ाकर धनाराम को सूंड से पकड़ उठाकर पटक दिया और पैरों से कुचलकर मार डाला। ड्राइवर ने इसकी सूचना गांव में आकर दी। सूचना पर वन अमला मौके पर पहुंचा और पूर्व सरपंच का क्षत-विक्षत शव बरामद किया। घटना से पूर्व सरपंच के घर में मातम पसरा हुआ है। वन विभाग ने मार्ग में एहतियातन आने-जाने वालों को रोकने वन कर्मियों की तैनाती कर दी है।
प्रतापपुर रेंजर पीसी मिश्रा ने बताया कि घटना के तुरंत बाद गजराज वाहन मौके पर पहुंच गया था, कर्मचारियों ने ही घटना की जानकारी दी। वे घटना को अंजाम देने वाले दंतैल हाथी का पीछा कर रहे थे, जो शाम को ही जंगल में घुसा था। हादसे की जानकारी मिलते ही नायब तहसीलदार राधेश्याम तिर्की, एसडीओ वीके लकडा सहित अन्य कर्मचारी पुलिस कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे।
इसके बाद कई टुकड़ों में पड़े पूर्व सरपंच के शव को एकत्रत किया गया। परिजनों व ग्रामीणों के साथ शव को प्रतापपुर लेकर आए, जिसे मरच्युरी में रखा गया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें हाथियों की उपस्थिति की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही है।घटना स्थल से शव लेकर हॉस्पिटल पहुंचे एसडीओ वीके लकड़ा ने बताया कि इस तरह की घटना दुःखद है, लेकिन हमारा प्रयास रहता है कि हाथियों से जनहानि न हो।
वर्तमान में प्रतापपुर ब्लॉक में कई हाथी अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर रहे हैं। सभी की एक साथ निगरानी करना संभव नहीं है, फिर भी हमारे विभाग के कर्मचारी सभी पर नजर रख रहे हैं। जिस क्षेत्र में प्यारे व अन्य आक्रमक हाथी मौजूद हैं उस क्षेत्र में हमारी विशेष नजर है। गजराज वाहन के साथ हमारी टीम व हाथी मित्र क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, ताकि लोगों को आगाह किया जा सके।
अब तक 35 से अधिक लोगों की जान ले चुका है
मसगा के जंगल में मौजूद प्यारे हाथी अब तक 35 से अधिक लोगों की जान ले चुका है। सूरजपुर डीएफओ ने प्यारे हाथी को पकड़कर हाथी रेस्क्यू सेंटर में रखने राज्य सरकार को अनुमति के लिए पत्र भी लिखा है, लेकिन अब तक इसकी अनुमति नहीं मिली है। प्यारे हाथी की मौजूदगी से आसपास के ग्रामीण दहशत में हैं।10 फरवरी को प्यारे हाथी (दल का नाम प्यारे) ने घुई वन परिक्षेत्र के भेलकच्छ गांव में एक महिला को सूंड से लपेटकर पटक दिया था और पैरों से कुचलकर मार डाला था। ग्रामीणों ने इसके बाद अफसरों को दो घंटे तक घेरे रखा था। ग्रामीणों का कहना था कि प्यारे व बहरादेव हाथियों को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर में रखा जाए, ताकि किसी की जान न जाए।
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बड़ी खबर: यहां के रेलवे स्टेशन में लगी भीषण आग, मौक पर पहुची दमकल की गाड़िया…

बिहार के मधुबनी रेलवे स्टेशन पर खाली ट्रेन में आग लग गई है. फिलहाल किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है. फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार दिल्ली से आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में सुबह अचानक आग लग गई. आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. देखते ही देखते ट्रेन धू-धूकर जल उठी. गनीमत ये रही कि ट्रेन पूरी तरह से खाली थी. जानकारी के अनुसार रात में ही दिल्ली से ये ट्रेन मधुबनी पहुंची थी और स्टेशन पर खड़ी रहने के दौरान इसमें आग लगी. इसके बाद स्टेशन पर मौजूद लोगों और कर्मियों ने आग बुझाने की कोशिश की. इसी बीच फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पहुंच गई और आग को काबू करने में जुट गई.जानकारी के मुताबिक गाड़ी प्लेटफार्म नंबर तीन पर खड़ी थी. आग शनिवार सुबह 9 बजे के करीब लगी. इसमें दो कोच जल कर पूरी तरह खाक हो गए. वहीं, तीसरी बोगी में आ लगी रही जिसे दमकल की टीम ने बुझाया.ट्रेन का रैक जयनगर से लाया गया था और इसे यहां जोड़ा गया था.हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबुक इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच की बाद रेलवे अधिकारियों ने कही है. पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी वीरेंद्र कुमार ने कहा, “9.15 बजे शनिवार की सुबह मधुबनी रेलवे स्टेशन पर खड़ी एक खाली ट्रेन के डिब्बे में अचानक आग लग गई. फायर ब्रिगेड की सहायता से 9.50 बजे तक आग को बुझा लिया गया. गाड़ी खाली थी, इस कारण इस हादसे में किसी को भी कोई नुकसान नहीं हुआ है. रेल प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है. इसकी हाई लेवल जांच कराई जाएगी.”
ट्रेन से उतरे थे डिब्बे
बिहार में कुछ दिनों पहले सात फरवरी को एक खाली यात्री गाड़ी के दो डिब्बों के पटरी से उतर जाने से पूर्वी रेलवे के गया-धनबाद खंड पर कई घंटों तक ट्रेन सेवाएं प्रभावित रहीं. अधिकारियों ने बताया कि पहाड़पुर स्टेशन पर तड़के तब यह दुर्घटना हुई जब ट्रेन गोमा जा रही थी, लेकिन इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ. गया -धनबाद संभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ ट्रेन चालक दल ने आपात ब्रेक का इस्तेमाल कर ट्रेन रोक दी. पटरी से उतर गये डिब्बों के कुछ हिस्से लाइन के करीब पहुंच गए. इससे ट्रेन आवाजाही बाधित हुई.’’
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CG News: टैक्स वसूली न होने से कई निगमों में रुका कर्मियों का वेतन…

रायपुर। राज्य के कई नगर निगमों में बकाया कर वसूली न होने के कारण जनवरी का वेतन रूक गया है। इसके खिलाफ संयुक्त नगर निगम अधिकारी-कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने चेतावनी दी है कि 17 फरवरी तक भुगतान नहीं हुआ तो प्रदर्शन किया जाएगा। अधिकारी-कर्मचारी संघ रायपुर के अध्यक्ष संतोष पांडेय ने कहा कि हम निगम के लिए काम करते हैं। वेतन रोकने के लिए बकाया कर वसूली का न होने का बहाना ठीक नहीं है।
निगम की माली हालत खराब
रायपुर नगर निगम की माली हालत इतनी अधिक खराब हो चुकी है कि कर्मचारी ही नहीं, अधिकारियों तक को वेतन के लाले पड़ गए हैं। हर महीने करीब 17 करोड़ का वेतन भुगतान होता है, लेकिन निगम का खजाना खाली होने से जनवरी का वेतन नहीं मिल पाया है। निगम के अधिकारियों केमुताबिक जनवरी का वेतन भुगतान न करने की वजह नगर-निगम केस्थापना व्यय में 17 करोड़ रुपये का न होना है। इसी मद से निगम कर्मचारियों को वेतन का भुगतान किया जाता है। इसमें लगातार पैसे की कमी बनी हुई है।
टैक्स भुगतान नहीं करने वाले बकाएदारों पर सख्ती
पिछले कुछ महीने से राजस्व अमले को करोड़ों का बकाया संपत्तिकर, समेतिक कर के साथ यूजर चार्ज वसूलने का लक्ष्य दिया गया था। अब तक निगम के खजाने में बड़े बकायेदारों से 87 करोड़ जमा हुए हैं, जबकि सालों से करों का भुगतान नहीं करने वाले बड़े बकायेदारों की जोन वार सूची जारी कर उनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए गए हैं।
दुर्ग निगम में वेतन के लिए तीन करोड़ की जरूरत
दुर्ग नगर निगम में जनवरी के वेतन का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। इन कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए तीन करोड़ रुपये की जरूरत है। महासमुंद नगर पालिका में हर माह 46 लाख रुपये वेतन भुगतान होता है। यहां कर्मचारियों को जनवरी केवेतन नहीं दिया गया है। धमतरी नगर निगम में करों की वसूली न हो पाने के कारण कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। कांकेर नगर पालिका परिषद में भी कर्मचारियों को जनवरी केवेतन का भुगतान अभी नहीं हुआ है। राजनांदगांव नगर निगम में कमजोर राजस्व वसूली के कारण पिछले डेढ़ माह से कर्मचारियों को वेतन भुगतान नहीं हुआ है।
वसूली के लिए निगम ने भेजी है नोटिस
वहीं, भिलाई निगम ने 170 बकायदारों से पांच करोड़ बकाया वसूली न होने पर कुर्की नोटिस को भेजा है। जगदलपुर नगर निगम में कुल 500 कर्मचारी हैं। कम वसूली पर छह कर्मचारियों का वेतन रोका गया था। बाद में भुगतान कर दिया गया। जांजगीर में नगरीय निकायों द्वारा टैक्स की वसूली की जा रही है। कर्मचारियों के वेतन का भुगतान कर दिया गया है। इसी तरह अंबिकापुर नगर निगम में किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं रुका है। कोरबा नगर निगम में कार्यरत कर्मचारियों को भी प्रति माह समय पर वेतन का भुगतान किया जा रहा है।
वेतन की कर रहे व्यवस्था
अधिकारी-कर्मचारियों को जनवरी का वेतन जल्द देने की व्यवस्था कर रहे हैं। निगम की राजस्व की स्थिति मजबूत करने राज्य सरकार के फैसले के अनुरूप संपत्ति कर के साथ यूजर चार्ज लिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि राजस्व नहीं देने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे।
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