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डायबिटीज मरीजों की किस लेवल पर पड़ती है इंसुलिन की जरूरत, जानिए
टाइप 1 डायबिटीज वाले सभी लोग और टाइप 2 डायबिटीज वाले कुछ लोगों को अपने ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन लेते हैं।
तनाव, बिगड़ते लाइफस्टाइल और खराब डाइट की वजह से पनपने वाली बीमारी है। इस बीमारी का जड़ से इलाज नहीं किया जा सकता सिर्फ इसे कंट्रोल किया जा सकता है। डायबिटीज की बीमारी तब होती है जब पैंक्रियाज हार्मोन इंसुलिन का उत्पादन करना कम या फिर बंद कर देता है। पैंक्रियाज भोजन पचाने में सहायता करने वाले हार्मोन और एन्जाइम का उत्पादन करता है, और ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल भी करता है।
जब पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करना कम या फिर बंद कर देता है तो मरीज को इंसुलिन लेने की आवश्यकता होती है।
आप जानते हैं कि टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन करना बंद कर देता है, ऐसे में इन मरीजों को इंसुलिन की पूर्ति बाहर से करनी पड़ती है। जबकि टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में पैंक्रियाज कम इंसुलिन बनाता है ऐसे में इन मरीजों को भी इंसुलिन की जरूरत इंसुलिन का इंजेक्शन लेकर पूरी करनी पड़ती है। आइए जानते हैं कि ब्लड शुगर के किस लेवल पर इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है।
इंसुलिन लेना कब शुरू करना चाहिए:
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन ने पहले सिफारिश की थी कि एक मरीज का हीमोग्लोबिन HbA1c को 8% से अधिक नहीं होने दिया जाए। ऐसे में डॉक्टर उन्हें इंसुलिन लेने की सलाह दे सकते हैं। टाइप 1 डायबिटीज वाले सभी लोगों और टाइप 2 डायबिटीज वाले कुछ लोगों को अपने ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन लेते हैं। डायबिटीज के उपचार में ब्लड में शुगर के स्तर को कंट्रोल रखना जरूरी है।
इंसुलिन लेने के लिए शुगर की जांच है जरूरी:
ब्लड में ग्लूकोज को मॉनिटर करके ही आप अपने ब्लड में शुगर के स्तर की जांच कर सकते हैं। शुगर मॉनिटर करने के लिए हर दिन शुगर की माप को लिखें और ये रिकॉर्ड अपने डॉक्टर को दिखाएं, ताकि आपका डॉक्टर आपको बता सके कि आपको कितना इंसुलिन लेना जरूरी है।
इंसुलिन लेने के लिए शुगर का स्तर कितना होना चाहिए
वर्कआउट और दवाईयों का इस्तेमाल करने के बाद भी इंसुलिन का स्तर पैंक्रियाज में नहीं बढ़ता तो आपको इंसुलिन लेने की जरूरत होती है। मधुमेह रोगियों को बगैर डॉक्टर की सलाह के
इंसुलिन नहीं लेनी चाहिए।
मरीज को इंसुलिन लेने की आवश्यकता कब होती है?
डायबिटीज वाले अधिकांश लोगों को एक दिन में कम से कम 2 इंसुलिन की आवश्यकता होती है। कुछ लोगों को शुगर को कंट्रोल करने के लिए 3 – 4 शॉट्स की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर डायबिटीज के मरीज डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद भी शुगर पर कंट्रोल नहीं कर पाते तो डॉक्टर उन्हें इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं।
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क्या चिकनपॉक्स और मंकीपॉक्स दोनों एक ही है जाने दोनों में क्या है अंतर
Monkeypox मंकीपॉक्स एक दुर्लभ संक्रमण ज़रूर है लेकिन पिछले कुछ महीनों में ये भारत सहित दुनियाभर के कई देशों तक फैल गया है। मंकीपॉक्स को स्मॉलपॉक्स या चिकनपॉक्स के समान माना जा रहा है हालांकि यह इनसे काफी अलग है।
मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे ग्लोबल हेल्थ एमरजेंसी घोषित कर दिया। भारत में भी इसके कुछ मामले सामने आए हैं। बढ़ती चिंता के बीच, यह जानना ज़रूरी है कि मंकीपॉक्स क्या है और यह चिकनपॉक्स से कैसे अलग है।
मंकीपॉक्स vs चिकनपॉक्स
मंकीपॉक्स एक ऐसी बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस की वजह से होती है। जो पोक्सविरिडे परिवार में ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से संबंधित है, जबकि चिकनपॉक्स वैरिसेला-ज़ोस्टर वायरस के कारण होता है, जो दाद का कारण भी बनता है।
यह दोनों वायरस करीबी संपर्क, श्वसन बूंदों के माध्यम से य त्वचा के घावों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। चिकनपॉक्स एक बेहद आम संक्रमण है, जबकि मंकीपॉक्स एक दुर्लभ इन्फेक्शन है, जो इतनी आसानी से नहीं फैलता।
बुखार दोनों में एक आम लक्षण है, लेकिन समय अलग हो सकता है
मंकीपॉक्स और चिकनपॉक्स ज़्यादा गंभीर बीमारियां नहीं हैं और सही समय पर सही इलाज की मदद से रिकवरी भी जल्दी हो जाती है। इसके सबसे आम लक्षणों में- बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, कंपकपी और थकावट शामिल है।
बुखार दोनों संक्रमण में आम लक्षण है, लेकिन मंकीपॉक्स में बुखार रैशेज़ से पहले 1 से 5 दिनों में आता है, जबकि चिकनपॉक्स में रैशेज़ आने के 1से 2 दिन पहले बुखार आता है।
लक्षण के सामने आने की अवधि में अंतर
अमेरिका के CDC के अनुसार, मंकीपॉक्स में इन्फेक्शन होने 7 से 14 दिनों बाद लक्षण दिखना शुरू होते हैं, जबकि चिकनपॉक्स में 16 दिन लग सकते हैं।
एक लक्षण जो दोनों बीमारियों में अलग है
वैसे तो मंकीपॉक्स के ज़्यादातर लक्षण चिकनपॉक्स की तरह के ही हैं, लेकिन एक लक्षण है, जो इन दोनों बीमारियों में फर्क पैदा करता है। मंकीपॉक्स में लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाती है, जो चिकनपॉक्स में नहीं देखी जाती।
मंकीपॉक्स और चिकनपॉक्स की रैशेज़ में क्या अंतर है
इन दोनों के संक्रमणों में रैश एक सामान्य लक्षण है। जबकि मंकीपॉक्स से संबंधित दाने आमतौर पर बुखार के एक से तीन दिनों के भीतर होते हैं, चिकनपॉक्स के दाने बुखार के 1 से 2 दिन बाद दिखाई देने लगते हैं। अक्सर मंकीपॉक्स के दाने चेहरे से शुरू होते हैं और हथेलियों और तलवों सहित शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाते हैं।
पहले यह पप्यूल्स और द्रव से भरे पस्ट्यूल में विकसित होता है और फिर एक पपड़ी का रूप ले लेता है और गिर जाता है। चिकनपॉक्स में रैशेज़ में खुजली होती है, वे छाले जैसे होते हैं। यह पहले पीठ और चेहरे पर आना शुरू होते हैं, उसके बाद शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलते हैं। हालांकि, चिकनपॉक्स के रैशेज़ हथेलियों और तलवों पर नहीं होते।
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हेल्थ टिप्स: रहना चाहते है फिट और जवां तो फॉलो करे ये हेल्दी रुटीन टिप्स
Healthy Routine : जवां और फिट रहने के लिए हेल्दी रुटीन फॉलो करना जरूरी होता है. आइए जानते हैं फिट रहने के लिए कुछ हेल्दी टिप्स के बारे में-
Healthy Tips : आधुनिक समय में फिट रहना बहुत ही जरूरी है. हालांकि, इस भागती-दौड़ती जिंदगी में खुद को स्वस्थ रखना काफी मुश्किल हो सकता है. खासतौर पर पुरुषों के लिए फिट और जवां रहना थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि वह खुद को महिलाओं की तुलना में कम ध्यान देते हैं. अगर आप लंबे समय तक फिट और जवां दिखना चाहते हैं तो इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स को जरूर फॉलो करेँ. आइए जानते हैं जवां रहने के लिए किन टिप्स को करना चाहिए फॉलो?
नियमित रूप से करें एक्सरसाइज
स्वस्थ शरीर के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना बहुत ही जरूरी होता है. अगर आप खुद को जवां रखना चाहते हैं तो रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें. खासतौर पर पुरुषों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए, इससे वह स्ट्रेस, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर जैसी परेशानियों से बच सकते हैं.
अच्छी डाइट है जरूरी
जवां दिखने के लिए एक्सरसाइज के साथ-साथ हेल्दी डाइट भी जरूरी होता है. अगर आप काफी युक्त आहार लेते हैं तो इसकी वजह से आपका वजन काफी ज्यादा बढ़ सकता है. हमेशा अपने आहार में हेल्दी फैट शामिल करें. इसके अलावा अधिक नमक, फैटी डाइट, सेचूरेटेड फैट से दूरियां बनाएं.
मूड को करें बेहतर
मूड को अच्छा करने के लिए रोजाना वर्कआउट करना चाहिए. इसके अलावा कम से कम 30 मिनट पैदल चलें. वहीं, अच्छी और गहरी नींद लें. इससे आपका मूड बेहतर हो सकता है.डार्क चॉकलेट के सेवन से भी मूड अच्छा हो सकता है.
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Potato For Weight Loss: क्या आप वजन बढ़ने के डर से आलू नहीं खाते हैं. जानिए आलू खाने का सही तरीका और किस तरह आलू खाने पर नहीं बढ़ता मोटापा?
Can Potato Be Eaten During Weight Loss: ज्यादातर लोग वजन बढ़ने के डर से आलू नहीं खाते हैं. उन्हें लगता है कि आलू खाने से मोटापा बढ़ता है. ऐसे बहुत से लोग हैं जो आलू बिल्कुल नहीं खाते या बहुत सीमित मात्रा में ही खाते हैं. आलू काफी टेस्टी सब्जी है. आलू अन्य सब्जियों का भी स्वाद बढ़ा देता है. हालांकि डायबिटीज के मरीज को आलू का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है, लेकिन आलू उतना भी नुकसान नहीं करता जितना लोग सोचते हैं. कई रिसर्च में ये सामने आया है कि आलू में फैट बहुत ही कम होता है. ऐसे में आलू को अगर सही तरीके से खाया जाए तो न इससे मोटापा बढ़ता और न ही शुगर.
दरअसल आलू का सेवन लोग गलत तरीके से करते हैं. लोग आलू के पराठे, टिक्की, फ्रेंच फाइज और दम आलू जैसी डिश खाते हैं जो फैट बढ़ाती हैं. ये चीजें अन्य बीमारियों की वजह बनती है. हां अगर आलू का सही तरीके से सेवन किया जाए तो आप आलू खाकर भी वजन घटा सकते हैं. जानते हैं आलू खाने का सही तरीका क्या है?
आलू में पोषक तत्व
आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है. आलू में ऐसे पोषकतत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए फायदेमंद हैं. आलू पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और फास्फोरस का अच्छा सोर्स है. आलू में विटामिन ए, विटामिन बी और विटामिन सी भी पाया जाता है. आलू खाने से पाचन अच्छा रहता है. आलू में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और फैट और प्रोटीन कम होता है. आलू खाने से तुरंत एनर्जी मिलती है.
वजन घटाने के लिए आलू खाने का सही तरीका
1- वजन घटाने वाले लोग आलू को डाइट में शामिल कर सकते हैं. आप आलू को उबालकर ठंडा करके खा सकते हैं.
2- उबला आलू खाने से काफी देर तक पेट भरा रहता है और भूख नहीं लगती है.
3- आलू खाने से आपको एक्स्ट्रा कैलोरीज लेने की जरूरत नहीं पड़ती है.
4- आलू में स्टार्च होता है जो मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और चर्बी घटाता है.
5- अगर आपको बैली फैट कम करना है तो छिलके वाले आलू डाइट में शामिल करें. इससे ब्लड प्रेशर भीं कंट्रोल रहेगा.
6- वजन घटाने के दौरान आप आलू को भूनकर या बेक करके भी खा सकते हैं.
7- आपको आलू की मात्रा का ख्याल रखना है. एक समय पर 170 ग्राम से ज्यादा आलू का सेवन न करें.
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