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महंगे-महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स नहीं ,स्किन के लिए बेहद लाभकारी है नीम के पत्ते

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स्किन की केयर करने के लिए अगर आप महंगे-महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करके थक चुकी हैं, तो अब कुछ प्राचीन लेकिन असरकारी तरीकों को आजमाएं। आपके आसपास ऐसे कई प्लांट्स आसानी से अवेलेबल होते हैं, जो स्किन की कई समस्याओं को चुटकियों में हल कर देते हैं। इन्हीं में से एक है नीम। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-एजिंग गुण होते हैं। आमतौर पर, लोग अपनी बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने के लिए नीम का जूस पीते हैं, लेकिन यह स्किन की समस्याओं से भी उतना ही बेहतरीन तरीके से निपटता है। बस आप इससे घर पर फेस मास्क बनाएं और उसे अपनी स्किन पर लगाएं-

ऑयली स्किन के लिए ऐसे बनाएं नीम फेस पैक

अगर आपकी स्किन ऑयली है तो आप एक्ने व अन्य स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करने के लिए नीम का इस्तेमाल कर सकती हैं। ऑयली स्किन के लिए नीम व नींबू की मदद से फेस पैक बनाया जा सकता है।

इसके लिए आप सबसे पहले एक बाउल दो चम्मच नीम का पाउडर लें। अब इसमें थोड़ा गुलाब जल व आधे नींबू का रस डालकर व मिक्स करके एक पेस्ट तैयार करें। अब इसे अपनी क्लीन स्किन पर अप्लाई करें और 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। अंत में पानी की मदद से अपनी स्किन को साफ करें और फिर मॉइश्चराइजर लगाएं।

रूखी स्किन के लिए ऐसे बनाएं नीम फेस पैक

रूखी स्किन पर भी नीम का इस्तेमाल करने से लाभ होता है। आप इसे हल्दी व अन्य मॉइश्चराइजिंग इंग्रीडिएंट्स को मिक्स करके एक फेस पैक बना सकते हैं। इसके लिए नीम के पत्तों के पाउडर में थोड़ी सी हल्दी मिक्स करें। अब इसमें नारियल तेल व थोड़ा सा गुलाब जल डालकर मिक्स करें। अब आप अपनी स्किन को क्लीन करके इस पेस्ट को अपनी स्किन पर अप्लाई करें।

करीबन 10-15 मिनट के बाद फेस को वॉश करें। अंत में, स्किन को मॉइश्चराइज करें।एजिंग स्किन की महिलाएं अपनी स्किन को पोषित करने और उसे अधिक यंगर बनाने के लिए नीम का फेस पैक बना सकती हैं।

आप इसे ओटमील के साथ मिक्स करके यूज कर सकते हैं। इसके लिए आप एक बाउल में आधा कप ओटमील, एक चम्मच दूध, एक चम्मच शहद व दो चम्मच नीम के पत्तों का पेस्ट बनाकर मिश्रण तैयार करें।

अब आप इसे अपनी क्लीन स्किन पर लगाएं। अब इसे स्किन पर लगाएं और सूखने तक ऐसे ही छोड़ दें। अंत में, अपनी स्किन को हल्का स्क्रब करते हुए अपनी स्किन को धोकर क्लीन करें। अब अपनी स्किन को मॉइश्चराइज करें।

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Lifestyle

क्या आपका बच्चा भी सुनता नहीं सिर्फ देखता रहता है,तो हो सकती हैं मिर्गी का लक्षण….

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पर्पल डे ऑफ एपिलेप्सी हर साल 26 मार्च को मनाया जाता है। इसका लक्ष्य लोगों को एपिलेप्सी यानी मिर्गी के बारे में जागरूक करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में 5 करोड़ लोगों को मिर्गी के दौरे आते हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। वहीं इस बीमारी के 80% मामले लो और मिडिल इनकम देशों में पाए जाते हैं।

भारत की बात करें तो यहां एपिलेप्सी टॉप 3 न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स में से एक है। छोटे बच्चों में चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी होना आम है। ये बचपन में होने वाला एपिलेप्सी सिंड्रोम है। इस कंडीशन में बच्चों को कब और कैसे दौरे आते हैं, ये समझने के लिए हमने अपोलो हॉस्पिटल अहमदाबाद के कसल्टेंट पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आनंद अय्यर से बात की।

सवाल: चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी क्या है?

जवाब: चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी एक ऐसी कंडीशन है जिसमें स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को बार-बार मिर्गी के सीजर (दौरे) आते हैं। ये बचपन में होने वाला एक कॉमन डिसऑर्डर है।

सवाल: बच्चों को ये सीजर किस उम्र में आते हैं?

जवाब: एब्सेंस सीजर आमतौर पर 4 से 7 साल के बच्चों को आते हैं। इसकी ज्यादातर शिकार बच्चियां होती हैं। टीनएज में सीजर आने पर बच्चों को जुविनाइल सीजर के लिए जांचा जा सकता है।

सवाल: पेरेंट्स बच्चों में सीजर कैसे पहचान सकते हैं?

जवाब: एक सीजर 5 से 15 सेकंड तक चल सकता है। ये दिन में 30 से 40 बार तक भी हो सकता है। सीजर एकदम से शुरू होकर एकदम से खत्म भी हो जाता है। इसके बाद बच्चा ऐसा व्यवहार करता है जैसे कुछ हुआ ही न हो। बच्चा कुछ देर के लिए कंफ्यूज भी हो सकता है। ये सीजर बच्चों के दिमाग को डैमेज नहीं करते।

सवाल: चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी का क्या इलाज है?

जवाब: एंटी-सीजर दवाओं से एपिलेप्सी को कंट्रोल किया जा सकता है। हर 10 में से 7 बच्चों के दौरे इसी तरह कंट्रोल में आते हैं। सीजर से पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए 2 से 2.6 सालों तक इलाज करना जरूरी है।

सवाल: क्या चाइल्डहुड एब्सेंस एपिलेप्सी से बच्चों में दूसरी समस्याएं हो सकती हैं?

जवाब: इस डिसऑर्डर से जूझ रहे ज्यादातर बच्चों का विकास नॉर्मल तरीके से होता है। हालांकि कुछ में ये बीमारी पढ़ने-लिखने में बाधा डाल सकती है। साथ ही उन्हें फोकस करने में परेशानी हो सकती है। उनकी पर्स्नालिटी भी हाइपरएक्टिव हो सकती है।

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Lifestyle

खाने पीने की चीजो के सेवन से हो रही हमारे शरीर मे प्लास्टिक की एंट्री हो सकती है बड़ी परेशानी

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we eat daily 100 plastic particles while having food - हर बार खाने के साथ लोग निगल जाते हैं 100 से ज्यादा प्लास्टिक के सूक्ष्म कण

 

प्लास्टिक को बंद करने और इसके इस्तेमाल को रोकने के लिए दुनिया भर में अलग-अलग अभियान चलाए जा रहे हैं। कुछ समय पहले यह खबर आई थी कि समुद्री जीवों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच रहा है, जिससे उनकी मौत हो रही है।

अब नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली रिसर्च की है। उन्होंने इंसान के खून में भी प्लास्टिक के टुकड़े ढूंढ निकाले हैं। ऐसा दुनिया में पहली बार हुआ है। ये टुकड़े दिखने में बहुत छोटे यानी माइक्रोप्लास्टिक हैं। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने 22 लोगों के नमूने लिए थे, जिनमें से 17 के खून में प्लास्टिक के पार्टिकल पाए गए। इस बात को बेहद चिंताजनक बताया जा रहा है।

पहले जान लें, क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक?

माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर या इससे कम आकार के छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं। यह इतने छोटे होते हैं कि बिना मैग्निफाइंग ग्लास के इन्हें आंखों से देख पाना मुश्किल है। वैज्ञानिक अभी भी इन छोटे पार्टिकल्स के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। ये पानी, खाने के सामान और जमीन की सतह जैसी जगहों में मौजूद रहते हैं। इनके जरिए ये शरीर में पहुंचते हैं।

खून में मिले 5 तरह के माइक्रोप्लास्टिक

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को इंसानों के खून में 5 तरह के प्लास्टिक मिले हैं। इनमें मुख्य रूप से पॉलीमेथाइल मेथैक्रिलेट (PMMA), पॉलीप्रोपाइलीन (PP), पॉलीस्टाइनिन (PS), पॉलीइथाइलीन (PE), और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (PET) शामिल हैं।

शरीर में जा रहा बॉटल, फूड पैकेज का प्लास्टिक

इसके अलावा 23% लोगों में पॉलीइथाइलीन (PE) मिला, जो प्लास्टिक बैग में पाया जाता है। केवल एक व्यक्ति में पॉलीमेथाइल मेथैक्रिलेट (PMMA) मिला और किसी भी खून के नमूने में पॉलीप्रोपाइलीन (PP) नहीं था।

शरीर में ऐसे होती है प्लास्टिक की एंट्री

प्लास्टिक हवा के साथ-साथ खाने-पीने की चीजों से भी इंसान के शरीर में एंट्री कर सकता है। लोगों को यह पता ही नहीं होता कि प्लास्टिक के छोटे-छोटे पार्टिकल खाने, पानी पीने और सांस लेने के दौरान उनके शरीर के अंदर जा रहे हैं।

हो सकती हैं कई तरह की बीमारियां

कहते हैं एक्सपर्ट्स?

नीदरलैंड्स के व्रीजे यूनिवर्सिटी एम्स्टर्डम के प्रोफेसर डिक वेथाक ने कहा कि चिंतित होना उचित है क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक के ये पार्टिकल इंसान के पूरे शरीर में भी जा सकते हैं। ये एक जानलेवा बीमारी का कारण भी बन सकते हैं। अभी इस विषय पर और रिसर्च की जरूरत है।

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Lifestyle

देश में है 20 करोड़ से अधिक लोग स्मोकिंग के आदि, हो सकती है बड़ी परेशानी

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Smoking is Injurious to Health proven by a man who stop smoking and save 17 lakhs shitri - 1 साल में 6 लाख सिगरेट फूंक गया शख्स, छोड़ते ही बचा लिए इतने पैसे – News18 हिंदी

 

धूम्रपान (स्मोकिंग) स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, ये बात हम सभी जानते हैं। ज्यादा स्मोकिंग आपके फेफड़ों को खराब तो करती ही है, साथ ही ये सांस संबंधी बीमारियों को भी बढ़ाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में 15 साल से ज्यादा के 20 करोड़ लोगों को स्मोकिंग की लत लगी है।

स्मोकिंग की आदत हमें शारीरिक और मानसिक रूप से भी कमजोर बनाती है। यह बीमारियों को खुलेआम न्योता देने जैसा है। धूम्रपान जानलेवा है क्योंकि सिगरेट का सेवन बंद न करने पर आपका पूरा शरीर एक समय बाद खराब हो सकता है।

MyUpchar.com की रिपोर्ट के मुताबिक, सिगरेट का सेवन करना फेफड़ों के कैंसर होने का मुख्य कारण है। लगभग 90% फेफड़ों के कैंसर के मामलों के लिए सिगरेट जिम्मेदार है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है।

आइए जानते है कि जब कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उसके शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है…

1. स्मोकिंग का दिमाग पर असर

हमें ये तो पता है कि फेफड़ों पर धूम्रपान का बुरा प्रभाव पड़ता है, लेकिन ज्यादातर लोगों को यह नहीं पता कि धूम्रपान दिमाग को भी प्रभावित करता है। इससे आपके सेंट्रल नर्वस सिस्टम में रुकावट आती है। यही सिस्टम आपके दिमाग को नियंत्रित करता है।

तंबाकू और निकोटीन दिमाग की नसों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ज्यादा सिगरेट पीने से इंसान के सोचने और समझने की क्षमता कम हो जाती है। लंबे समय बाद स्मोकिंग छोड़ने से इंसान को स्ट्रेस एंग्जाइटी, डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

2. स्मोकिंग हार्ट के लिए खतरा

सिगरेट का ज्यादा सेवन हार्ट को नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान के कारण पूरा कार्डियोवस्कुलर सिस्टम खराब हो जाता है। निकोटीन की शरीर में एंट्री ब्लड वेसल्स की सिकुड़न का कारण बनती है। इससे खून का बहना रुक जाता है।

स्मोकिंग की लत में पड़े लोगों में खून के थक्के जमने और ब्लड प्रेशर की समस्या बन जाती है। ये हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देती है। जिन लोगों को पहले ही दिल का दौरा पड़ चुका है, उन्हें इसका ज्यादा खतरा होता है।

3. स्मोकिंग पेट के लिए भी खतरनाक

स्मोकिंग से आपका डाइजेस्टिव सिस्टम भी खराब हो सकता है। बहुत से लोग ये बात नहीं जानते। जैसे ही आप धूम्रपान करते हैं, निकोटीन और तंबाकू आपके मुंह और गले से होते हुए आपके पेट में जाते है। इससे कब्ज, अपच, गैस, एसिडिटी, भूख न लगने जैसी कई परेशानियां होती हैं। साथ ही डायबिटीज होने का भी खतरा रहता है।

4. स्मोकिंग से दांतों को नुकसान

लंबे समय तक ज्यादा धूम्रपान करने से आपके दांतों पर असर पड़ सकता है। इससे पीरियोडोंटाइटिस यानी मसूड़ों का गंभीर इन्फेक्शन हो जाता है। पीरियोडोंटाइटिस में दांतों में सूजन हो जाती है।

इन सबके अलावा स्मोकिंग करने से और भी कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। स्मोकिंग के दौरान शरीर में बड़े बदलाव आते हैं और धीरे-धीरे निकोटीन की लत लग जाती है। इसलिए अपने और अपने परिवार की अच्छी सेहत के लिए स्मोकिंग से दूरी बनाएं।

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