व्यापर
एचडीएफसी का इंतजार खत्म ! होने जा रहा है विलय,जानें अब कस्टमर्स पर क्या पड़ेगा असर
HDFC And HDFC Financial institution Merger: आखिरकार एचडीएफसी का इंतजार खत्म हुआ. देश के कॉरपोरेट इतिहास में सबसे बड़ा लेनदेन होने जा रहा है. एचडीएफसी के एचडीएफसी बैंक के साथ विलय के प्रस्ताव को शेयर बाजारों की मंजूरी मिल गई है. गौरतलब है कि शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स से एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक को अनापत्ति (नो ऑब्जेक्शन) मिल गई है. यानी अब एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक मर्ज हो जाएगा।
बैंक ने दी जानकारी
एचडीएफसी बैंक ने बताया कि उसे बीएसई लिमिटेड से ‘किसी भी प्रतिकूल टिप्पणी के बिना’ ऑब्जर्वेशन लेटर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड से ‘नो ऑब्जेक्शन’ के साथ ऑब्जर्वेशन लेटर मिला है. यानी अब एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय का रास्ता साफ हो गया है।
एचडीएफसी बैंक ने कहा,यह योजना अन्य बातों के साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण और योजना में शामिल कंपनियों के संबंधित शेयरधारकों और लेनदारों से मंजूरी सहित विभिन्न वैधानिक और नियामक अनुमोदनों के अधीन है.’ गौरतलब है कि लंबे समय से एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय की बात चल रही थी।
40 अरब डॉलर का सौदा
गौरतलब है कि इससे पहले 4 अप्रैल को देश की सबसे बड़ी आवास वित्त कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड का निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी बैंक में विलय का फैसला हुआ था. आपको बता दें कि करीब 40 अरब डॉलर के इस अधिग्रहण सौदे से वित्तीय सेवा क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी अस्तित्व में आएगी. एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के विलय के साथ ही कंपनी एक नए वजूद में आ जाएगी.
कितना है कंबाइंड एसेट?
प्रस्तावित इकाई का कंबाइंड एसेट बेस लगभग 18 लाख करोड़ रुपये होगा. विलय के वित्त वर्ष 24 की दूसरी या तीसरी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है, जो रेगुलेटरी अप्रूवल के अधीन है. सौदा प्रभावी होने के बाद, एचडीएफसी बैंक 100 प्रतिशत सार्वजनिक शेयरधारकों के स्वामित्व में होगा और एचडीएफसी के मौजूदा शेयरधारकों के पास बैंक का 41 प्रतिशत हिस्सा होगा.
बीएसई ने कही ये बात
बीएसई ने अपने अवलोकन पत्र में कहा है, ‘कंपनी को सलाह दी जाती है कि वह एनसीएलटी के समक्ष दायर की जाने वाली याचिका में सेबी या किसी अन्य नियामक द्वारा किसी भी संस्था, उसके निदेशकों / प्रमोटरों और प्रमोटर समूह के खिलाफ की गई सभी कार्रवाइयों के विवरण का खुलासा करे.’ इतना ही नहीं, प्रत्येक एचडीएफसी शेयरधारक को प्रत्येक 25 शेयरों के लिए एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर मिलेंगे. यानी ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ेगा

व्यापर
एक साल में बढ़ी गैस सिलेंडर 218.50 रुपये महगा ,यहाँ से जानें ताज़ा रेट

रसोई गैस सिलेंडर पर आम जनता को मिलने वाली सब्सिडी को सरकार ने धीरे-धीरे खत्म करना शुरू कर दिया है। सब्सिडी बंद होने से जनता परेशान है लेकिन सरकार ने अपने खजाने में करोड़ों रुपए जमा किए हैं।एक साल के दौरान घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में 218.50 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 23 जुलाई 2021 को 834.50 रुपए थी जो अब 1053 रुपए हो गई है। इतना ही नहीं गैस सिलेंडरों पर मिलने वाली सब्सिडी को भी सरकार धीरे-धीरे खत्म कर रही है। इससे आम जनता की जेब ढीली तो हुई है लेकिन सरकारी खजाने में सब्सिडी में कटौती कर करोड़ों रुपए जमा हुए।
केंद्र सरकार ने 2020-21 में LPG सब्सिडी के तौर पर 11 हजार 896 करोड़ रुपए खर्च किए थे। यह आंकड़ा 2021-22 में घटकर सिर्फ 242 करोड़ रुपए हो गया है। इस तरह सरकार ने सब्सिडी को खत्म कर सिर्फ एक वित्तीय साल में ही 11,654 करोड़ रुपए बचा लिए।PMUY के लाभार्थियों को सब्सिडी बता दें कि सरकार ने अब जून 2020 से सिर्फ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को ही गैस सिलेंडर पर सब्सिडी देने का फैसला किया है।
ऐसे में सरकार की तरफ से सब्सिडी पाने वालों की संख्या में भारी कमी आई है। गौरतलब है कि उज्जवला योजना का लाभ लेने वालों को सरकार की तरफ से एक साल में 12 गैस सिलेंडर लेने तक 200 रुपए हर सिलेंडर की सब्सिडी जारी है। यह सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में आती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी पर सरकार ने 23 हजार 464 करोड़ रुपए खर्च किये। वहीं 2018-19 वित्त वर्ष में यह संख्या 37 हजार 209 करोड़ रुपए पर पहुंची। इस भार को देखते हुए सरकार ने लोगों से अपील की जो सामर्थ्यवान हों, वे अपनी सब्सिडी छोड़ें। सरकार की इस अपील पर देश के करोड़ों ग्राहकों ने सब्सिडी छोड़ दी।इसके बाद वित्तवर्ष 2019-20 में सरकार का खर्च घट गया और 24 हजार 172 करोड़ पर आ गया।
इसके अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 में यह खर्च घटकर 11,896 करोड़ रुपए रह गया। वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2020-21 तक खर्च पर करीब 50% से ज्यादा की गिरावट देखी गई। यह सिलसिला आगे भी चलता रहा और वित्तीय वर्ष 2021-22 में सब्सिडी पर खर्च घटकर महज 242 करोड़ रुपए रह गया है।
इसे भी पढ़िये : –
यहां के सरकार ने बिजली बिल के घटाये दाम, यहां से जाने नये रेट
Vastu Tips : घर में इस तरह के है पौधे तो,हटा दो तुरंत वरना हो सकती है ये बड़ी परेशानी
व्यापर
अब इतने रुपये कम हुआ तेल की कीमत,देखिये ताजा रेट

Edible Oil Price : बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। विदेशी बाजारों में खाने के तेलों के भाव टूटने के चलते देश भर में खाने का तेल सस्ता हुआ है। शुक्रवार को सरकार ने सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 100 रुपये क्विंटल की कमी की।
विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के भाव टूटने के बीच देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। वहीं मूंगफली और कच्चे पामतेल (सीपीओ) के भाव में सुधार देखने को मिला। बाकी तेल-तिलहनों के भाव अपरिवर्तित रहे। बाजार सूत्रों ने बताया कि विदेशों में खाद्य तेलों का बाजार काफी टूटा है जो गिरावट का मुख्य कारण है। इस गिरावट की वजह से देश में आयातकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने जिस भाव पर सौदे खरीदे थे अब उसे कम भाव पर बेचना पड़ रहा है।
उन्होंने जिस सीपीओ का आयात 2,040 डॉलर प्रति टन के भाव पर किया था उसकी अगस्त खेप का मौजूदा भाव घटकर लगभग 1,000 डॉलर प्रति टन रह गया है। यानी थोक में सीपीओ 86.50 रुपये किलो होगा। उल्लेखनीय है कि लाखों टन सीपीओ तेल आयात होने की प्रक्रिया में हैं। दूसरी ओर सरसों का इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य लगभग 5,050 रुपये क्विंटल था, जो अगली बिजाई के समय 200-300 रुपये क्विंटल के बीच बढ़ने का अनुमान है। उस हिसाब से सरसों तेल का थोक भाव आगामी फसल के बाद लगभग 125-130 रुपये किलो रहने का अनुमान है। अब जब बाजार में सीपीओ तेल लगभग 86.50 रुपये किलो होगा तो 125-130 रुपये में सरसों की खपत कहां होगी।
सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन में आत्मनिर्भर होने के बजाय देश आयात पर ही निर्भर होता दिख रहा है। देश के प्रमुख तेल-तिलहन संगठनों को सरकार से खाद्य तेलों का शुल्क-मुक्त आयात करने की मांग करने के बजाय उचित सलाह देकर तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भरता पाने की ओर प्रेरित करना चाहिये। उनकी यह जिम्मेदारी भी बनती है कि वे समय समय पर सरकार को बतायें कि कौन सा फैसला देश के तिलहन उत्पादकों के हित में है और कौन उसके नुकसान में है।
इन वजहों से गिर रहे हैं खाने के तेल के दाम
शुक्रवार को सरकार ने सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 100 रुपये क्विंटल की कमी की जबकि सोयाबीन डीगम का आयात शुल्क मूल्य 50 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन तेल का आयात शुल्क मूल्य 200 रुपये प्रति क्विंटल कम किया है। सूत्रों ने कहा कि एक तरफ आयात शुल्क मूल्य घटाया जा रहा है, वहीं विदेशों में तेल-तिलहन का बाजार टूट रहा है। सूत्रों ने कहा कि यह सारी स्थितियां देश को पूरी तरह आयात पर निर्भरता की ओर ले जा सकती हैं।
सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन में आई गिरावट के कारण पामोलीन तेल के भाव भी टूट गये। सीपीओ के कारोबार में सिर्फ भाव ही है कोई सौदे नहीं हो रहे क्योंकि आयातकों के खरीद भाव के मुकाबले दाम आधे से भी कम चल रहे हैं।उन्होंने कहा कि नमकीन बनाने वाली कंपनियों और गुजरात में बिनौला कारोबार के लगभग समाप्त होने के बाद मूंगफली की मांग है जिससे मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में समीक्षाधीन सप्ताह में सुधार आया।
विदेशों में भाव टूटने से सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। बिनौला तेल का भाव पिछले सप्ताहांत के स्तर पर पूर्ववत रहा। हालांकि, इसमें कारोबार लगभग समाप्त हो गया है।सूत्रों ने कहा कि आयातक और तेल उद्योग पहले से भारी नुकसान के रास्ते पर हैं। ऐसे में सरकार को अपना हर कदम फूंक-फूंक के उठाना होगा।
पिछले दिनों सरकार के निर्देश और खुदरा तेल कारोबारियों के आश्वासन के बावजूद अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कितनी कमी हुई है? इस बारे में सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिये क्योंकि वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को अभी नहीं मिल पा रहा है।
सरसों दाने का भाव 125 रुपये गिरा
सूत्रों ने बताया कि पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 125 रुपये की गिरावट के साथ 7,170-7,220 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों दादरी तेल समीक्षाधीन सप्ताहांत में 250 रुपये की गिरावट के साथ 14,400 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतें भी क्रमश: 35-35 रुपये घटकर क्रमश: 2,280-2,360 रुपये और 2,320-2,425 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुईं।सूत्रों ने कहा कि वैश्विक बाजरों में आई भारी गिरावट के मद्देनजर समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और लूज के थोक भाव क्रमश: 75 रुपये और 25 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 6,275-6,325 रुपये और 6,025-6,075 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
सोयाबीन तेल की कीमतें भी गिरीं
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन तेल कीमतों में भी नुकसान रहा। सोयाबीन दिल्ली का थोक भाव 600 रुपये की हानि के साथ 13,100 रुपये, सोयाबीन इंदौर का भाव 350 रुपये टूटकर 12,850 रुपये और सोयाबीन डीगम का भाव 550 रुपये टूटकर 11,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।नमकीन बनाने वाली कंपनियों और गुजरात में बिनौले का कारोबार बंद होने के बाद मूंगफली की मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन मजबूत हुआ। समीक्षाधीन सप्ताहांत में मूंगफली तिलहन का भाव 185 रुपये बढ़कर 6,895-7,020 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
पूर्व सप्ताहांत के बंद भाव के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल गुजरात 720 रुपये की मजबूती के साथ 16,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ जबकि मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 100 रुपये की मजबूती के साथ 2,710-2,900 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 50 रुपये बढ़कर 10,950 रुपये क्विंटल हो गया। जबकि पामोलीन दिल्ली का भाव 400 रुपये टूटकर 12,400 रुपये और पामोलीन कांडला का भाव 250 रुपये टूटकर 11,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
इसे भी पढ़िये :-
निकली यहाँ असिस्टेंट प्रोफेसर पद भर्ती ,जानिए आवेदन की तिथि
इन विश्वविद्यालयों में निकली 6,549 पद पर भर्ती,ये रही योग्यता
केंद्रीय कर्मचारियों को जल्द मिल सकती खुशखबरी, डीए हो सकती है 38 फीसदी…पढ़िये पूरी खबर
व्यापर
अब इतने रुपये कम हुआ तेल की कीमत,देखिये ताजा रेट

Edible Oil Price : बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। विदेशी बाजारों में खाने के तेलों के भाव टूटने के चलते देश भर में खाने का तेल सस्ता हुआ है। शुक्रवार को सरकार ने सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 100 रुपये क्विंटल की कमी की।विदेशी बाजारों में खाद्य तेलों के भाव टूटने के बीच देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में बीते सप्ताह सरसों, सोयाबीन तेल-तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज हुई। वहीं मूंगफली और कच्चे पामतेल (सीपीओ) के भाव में सुधार देखने को मिला। बाकी तेल-तिलहनों के भाव अपरिवर्तित रहे। बाजार सूत्रों ने बताया कि विदेशों में खाद्य तेलों का बाजार काफी टूटा है जो गिरावट का मुख्य कारण है। इस गिरावट की वजह से देश में आयातकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि उन्होंने जिस भाव पर सौदे खरीदे थे अब उसे कम भाव पर बेचना पड़ रहा है।
उन्होंने जिस सीपीओ का आयात 2,040 डॉलर प्रति टन के भाव पर किया था उसकी अगस्त खेप का मौजूदा भाव घटकर लगभग 1,000 डॉलर प्रति टन रह गया है। यानी थोक में सीपीओ (सारे खर्च व शुल्क सहित) 86.50 रुपये किलो होगा। उल्लेखनीय है कि लाखों टन सीपीओ तेल आयात होने की प्रक्रिया में हैं। दूसरी ओर सरसों का इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लगभग 5,050 रुपये क्विंटल था, जो अगली बिजाई के समय 200-300 रुपये क्विंटल के बीच बढ़ने का अनुमान है। उस हिसाब से सरसों तेल का थोक भाव आगामी फसल के बाद लगभग 125-130 रुपये किलो रहने का अनुमान है। अब जब बाजार में सीपीओ तेल लगभग 86.50 रुपये किलो होगा तो 125-130 रुपये में सरसों की खपत कहां होगी।
सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन में आत्मनिर्भर होने के बजाय देश आयात पर ही निर्भर होता दिख रहा है। देश के प्रमुख तेल-तिलहन संगठनों को सरकार से खाद्य तेलों का शुल्क-मुक्त आयात करने की मांग करने के बजाय उचित सलाह देकर तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भरता पाने की ओर प्रेरित करना चाहिये। उनकी यह जिम्मेदारी भी बनती है कि वे समय समय पर सरकार को बतायें कि कौन सा फैसला देश के तिलहन उत्पादकों के हित में है और कौन उसके नुकसान में है।
इन वजहों से गिर रहे हैं खाने के तेल के दाम
शुक्रवार को सरकार ने सीपीओ के आयात शुल्क मूल्य में 100 रुपये क्विंटल की कमी की जबकि सोयाबीन डीगम का आयात शुल्क मूल्य 50 रुपये प्रति क्विंटल और पामोलीन तेल का आयात शुल्क मूल्य 200 रुपये प्रति क्विंटल कम किया है। सूत्रों ने कहा कि एक तरफ आयात शुल्क मूल्य घटाया जा रहा है, वहीं विदेशों में तेल-तिलहन का बाजार टूट रहा है। सूत्रों ने कहा कि यह सारी स्थितियां देश को पूरी तरह आयात पर निर्भरता की ओर ले जा सकती हैं। सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन में आई गिरावट के कारण पामोलीन तेल के भाव भी टूट गये। सीपीओ के कारोबार में सिर्फ भाव ही है कोई सौदे नहीं हो रहे क्योंकि आयातकों के खरीद भाव के मुकाबले दाम आधे से भी कम चल रहे हैं।उन्होंने कहा कि नमकीन बनाने वाली कंपनियों और गुजरात में बिनौला कारोबार के लगभग समाप्त होने के बाद मूंगफली की मांग है जिससे मूंगफली तेल-तिलहन कीमतों में समीक्षाधीन सप्ताह में सुधार आया। विदेशों में भाव टूटने से सोयाबीन तेल-तिलहन कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली। बिनौला तेल का भाव पिछले सप्ताहांत के स्तर पर पूर्ववत रहा। हालांकि, इसमें कारोबार लगभग समाप्त हो गया है।सूत्रों ने कहा कि आयातक और तेल उद्योग पहले से भारी नुकसान के रास्ते पर हैं। ऐसे में सरकार को अपना हर कदम फूंक-फूंक के उठाना होगा। पिछले दिनों सरकार के निर्देश और खुदरा तेल कारोबारियों के आश्वासन के बावजूद अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कितनी कमी हुई है? इस बारे में सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिये क्योंकि वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को अभी नहीं मिल पा रहा है।
सरसों दाने का भाव 125 रुपये गिरा
सूत्रों ने बताया कि पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 125 रुपये की गिरावट के साथ 7,170-7,220 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों दादरी तेल समीक्षाधीन सप्ताहांत में 250 रुपये की गिरावट के साथ 14,400 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतें भी क्रमश: 35-35 रुपये घटकर क्रमश: 2,280-2,360 रुपये और 2,320-2,425 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुईं।सूत्रों ने कहा कि वैश्विक बाजरों में आई भारी गिरावट के मद्देनजर समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और लूज के थोक भाव क्रमश: 75 रुपये और 25 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 6,275-6,325 रुपये और 6,025-6,075 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
सोयाबीन तेल की कीमतें भी गिरीं
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन तेल कीमतों में भी नुकसान रहा। सोयाबीन दिल्ली का थोक भाव 600 रुपये की हानि के साथ 13,100 रुपये, सोयाबीन इंदौर का भाव 350 रुपये टूटकर 12,850 रुपये और सोयाबीन डीगम का भाव 550 रुपये टूटकर 11,600 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।नमकीन बनाने वाली कंपनियों और गुजरात में बिनौले का कारोबार बंद होने के बाद मूंगफली की मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन मजबूत हुआ। समीक्षाधीन सप्ताहांत में मूंगफली तिलहन का भाव 185 रुपये बढ़कर 6,895-7,020 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। पूर्व सप्ताहांत के बंद भाव के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल गुजरात 720 रुपये की मजबूती के साथ 16,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ जबकि मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 100 रुपये की मजबूती के साथ 2,710-2,900 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।समीक्षाधीन सप्ताह में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 50 रुपये बढ़कर 10,950 रुपये क्विंटल हो गया। जबकि पामोलीन दिल्ली का भाव 400 रुपये टूटकर 12,400 रुपये और पामोलीन कांडला का भाव 250 रुपये टूटकर 11,300 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
-
जॉब6 days ago10वीं पास है तो करें अप्लाई , निकली भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में भर्ती, जाने क्या है आवेदन की तिथि और शैक्षणिक योग्यता…
-
Tech & Auto4 days agoलॉन्च होना वाला है Samsung 200MP कैमरे वाला यह फ़ोन, मिलेंगे दमदार फीचर्स एवं शानदार लुक, मोटोरोला और शाओमी से होगी टक्कर
-
5 days agoMARUTI SUZUKI GRAND VITARA : मारुती ने उठाया नये Grand Vitara से पर्दा, देखे इसके चमकदार लुक और फीचर्स, इसकी बुकिग हुई शुरू
-
देश2 days agoकेंद्रीय कर्मचारियों को जल्द मिल सकती खुशखबरी, डीए हो सकती है 38 फीसदी…पढ़िये पूरी खबर
-
3 days agoमारुती ने उठाया MARUTI SUZUKI GRAND VITARA से पर्दा, देखे इसके चमकदार लुक, बुकिंग हुई शुरु
-
देश - दुनिया5 days agoNEET EXAM: शर्मसार करने वाली बाते, इनरवियर हाथ में लो फिर जाओ, NEET की छात्रा ने सुनाई आपबीती, पढ़े पूरी खबर…
-
Tech & Auto6 days agoलॉन्च हुई 50km की स्पीड चलने वाली यह इलेक्ट्रिक बाइसाइकिल, जाने क्या है इसकी कीमत
-
व्यापर7 days agoतेल की कीमतों में आई भारी गिरावट,जानिए कितना रुपये हुआ सस्ता
-
व्यापर6 days agoPM KISAN YOJANA : किसानो के लिए किस्त के बाद आया ये सबसे बड़ी खुशखबरी…जानिए
-
5 days agoFish Farming: मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने पर सरकार दे रही है 60 प्रतिशत की सब्सिडी, ऐसे उठाये लाभ…






























You must be logged in to post a comment Login