छतीसगढ़
होम लोन में बढ़ोतरी हो सकती है पर आप इन तीन चीजो से लोन का बोझ कम कर सकते है
यदि आपकी माली हालत बहुत अच्छी है और लोन की ब्याज दर बढ़ने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है तो कुछ करने की जरूरत नहीं है। रेट बढ़ने से कुछ ईएमआई ज्यादा होंगी। यदि भविष्य में रेट कम हुआ तो ईएमआई वापस कम हो जाएंगी। लेकिन यदि ब्याज दर बढ़ने से आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग बिगड़ रही हो तो कुछ कदम उठाने होंगे। आइए बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी से जानते हैं क्या किया जा सकता है…
होम लोन की ब्याज दरें साल 2019 से घट रही हैं। रिजर्व बैंक ने 2020 से रेपो रेट 4 फीसदी पर स्थिर रखा है। अब तक एक बार भी इसमें बढ़ोतरी नहीं की गई है। यही वजह है कि पात्रता हो तो 6.40 फीसदी दर पर होम लोन मिल सकता है। दर्जनों बैंक और फाइनेंस कंपनियां 7 फीसदी से कम दर पर लोन दे रही हैं। लेकिन महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में लोन लंबे समय तक उतने सस्ते नहीं रहेंगे, जितने अभी हैं। माना जा रहा है कि इस साल नीतिगत ब्याज दरें बढ़ेंगी। ऐसा होने पर होम लोन महंगे हो जाएंगे।
कितना महंगा होगा होम लोन?
मान लीजिए कि आपने 20 साल के लिए 6.50% ब्याज दर पर होम लोन लिया है। इस लोन के हर एक लाख रुपए के मूलधन पर आप करीब 79,000 रुपए का ब्याज चुकाएंगे। यदि लोन की ब्याज दर 0.25% बढ़ कर 6.75% हो जाती है, तो आपका ब्याज करीब 82,000 रुपए हो जाएगा। अगर रेट 7% हो गया तो ब्याज 86,000 रुपए हो जाएगा। मतलब साफ है, ब्याज दर में मामूली बढ़ोतरी भी ब्याज में हजारों रुपए का अंतर लाती है।
ईएमआई कितनी बढ़ेगी?
आम तौर पर रेट बढ़ने से आपके लोन की अवधि बढ़ जाती है और ईएमआई फिक्स्ड रहती है। उदाहरण के लिए यदि आपने 20 साल के लिए 1 लाख रुपए का लोन 6.75% ब्याज पर लिया हो तो ईएमआई 760 रुपए होगी। लेकिन, यदि रेट 7% हो जाए और ईएमआई वही है तो आपको 20 साल की जगह 20 साल 10 महीने ईएमआई देनी होगी। लेकिन यदि लोन लेते समय ईएमआई बदलने का विकल्प चुना था तो रेट बढ़ने से आपकी ईएमआई बढ़ेगी। इस उदाहरण में आपका लोन 20 साल तक ही चलेगा, लेकिन ईएमआई 775 रुपए हो जाएगी।
होम लोन की ब्याज दर बढ़ने पर आपके पास होंगे ये तीन विकल्प
1. रिफाइनेंस करें
होम लोन रिफाइनेंस यानी बैलेंस ट्रांसफर का विकल्प तब अपनाया जाता है जब आपके लोन की दर और मार्केट रेट में बड़ा (0.25-0.50%) अंतर हो। मान लीजिए कि आपका रेट 7.50% है और बाजार में 7% पर लोन मिल रहा है। ऐसे में बैलेंस ट्रांसफर फायदेमंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में यदि आपके लोन के 20 साल बाकी हों तो हर 1 लाख रुपए के लोन पर करीब 7,400 रुपए की बचत होगी। लेकिन बैलेंस ट्रांसफर तभी सही फैसला होगा, जब आधी से ज्यादा लोन अवधि बाकी हो। ट्रांसफर के खर्चे भी होते हैं, मसलन प्रोसेसिंग फीस और एमओडी चार्जेस।
2. ईएमआई बढ़ाएं
समय के साथ आपकी आय बढ़ेगी, लेकिन ईएमआई स्थिर रहेगी। पर आप स्वेच्छा से ईएमआई बढ़वा सकते हैं। अतिरिक्त ईएमआई लोन की मूलधन कम करेगी। इससे आपका लोन जल्द चुकेगा। लोन की अवधि कम होने लगेगी। यह तरीका छोटे-छोटे प्री-पेमेंट की तरह है। उदाहरण के लिए 7% ब्याज पर 20 साल के लिए 30 लाख रुपए के लोन की ईएमआई करीब 23,000 रुपए होगी। यदि आप दूसरे साल से इसे बढ़ाकर 26,000 रुपए कर देंगे तो 3 ईएमआई कम हो जाएगी। ब्याज भी 25.96 लाख रुपए से घटकर 25.10 लाख रुपए रह जाएगा।
3. प्री-पेमेंट करें
ब्याज दर बढ़ने की सूरत में अगर आप ईएमआई बढ़ाना नहीं चाह रहे तो आपके पास तीसरा विकल्प है। आप साल में कम से कम एक बार प्री-पेमेंट कर सकते हैं और लोन का मूलधन घटा सकते हैं। ज्यादातर बैंक और फाइनेंस कंपनियां चाहेंगी कि आप ईएमआई की कम से कम 1-2 गुनी रकम का प्री-पेमेंट करें। उदाहरण के लिए यदि आपने 7% की दर पर 20 साल के लिए 30 लाख रुपए का होम लोन ले रखा है और शुरुआत में ही 50,000 रुपए का प्री-पेमेंट कर देते हैं तो 7 ईएमआई कम हो जाएंगी और ब्याज 25.96 लाख से घटकर 24.48 लाख रुपए रह जाएगा।

छतीसगढ़
देश में फिर डरा रहा है कोरोना : अचानक केस बढ़ने के कारण हो सकते है स्कूल बंद

देश में बढ़ते कोरोना मामलों को देखते हुए केंद्र ने दिल्ली समेत 5 राज्यों को आगाह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बढ़ते पॉजिटिविटी रेट पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मिजोरम को लेटर लिखा। इस लेटर में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय और निगरानी करने को कहा गया है।
वहीं, राजधानी में कोरोना को लेकर दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) ने आज बैठक बुलाई है। उप-राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में CM केजरीवाल और AIIMS डायरेक्टर भी मौजूद रहेंगे। बैठक में स्कूलों को बंद करने पर भी फैसला हो सकता है। दिल्ली में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। वहीं, पॉजिटिविटी रेट 4.42% दर्ज किया गया।
आगे बढ़ने से पहले नीचे दिए पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दे सकते हैं...
भारत में रोजाना आने वाले नए केसेस में राजधानी दिल्ली समेत इन 4 राज्यों का योगदान काफी अधिक है। यहां पॉजिटिविटी रेट में लगातार इजाफा देखा गया है। केंद्र ने वैक्सीनेशन और प्रिकॉशन डोज को लेकर भी तेजी लाने को कहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों को फाइव फोल्ड स्ट्रैटजी पर काम करने को कहा है। इसमें टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, वैक्सीनेशन और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर फॉलो करने की सलाह दी गई है।
इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग करें
संक्रमण बढ़ने के शुरुआती संकेतों का पता लगाने के लिए सभी हेल्थ फैसिलिटीज को इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी की नियमित निगरानी, इंटरनेशनल पैसेंजर्स के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग की भी सलाह दी गई है। मेडिकल फैसिलिटीज के साथ-साथ सीवेज के सैंपल भी जांचने की सलाह दी गई है।
दिल्ली में वीकली केस में 170% का इजाफा
स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक, दिल्ली में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 998 थी, जो 19 अप्रैल को बढ़कर 2,671 हो गई है। यहां कोविड पॉजिटिविटी रेट में भी 1.42% की बढ़ोतरी देखी गई है। यह आंकड़ा पिछले हफ्ते 3.49% था।
हरियाणा में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में 521 नए मामले मिले थे, जो कि 19 अप्रैल तक से बढ़कर 1,299 हो गए। पिछले हफ्ते पॉजिटिविटी रेट 1.22% से बढ़कर 2.86% हो गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 12 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में नए मामलों की संख्या 217 थी, जो 19 अप्रैल तक बढ़कर 637 हो गई। यहां पॉजिटिविटी रेट पिछले हफ्ते 0.03% था, जो बढ़कर 0.09% हो गया है।
छतीसगढ़
12वीं के छात्रों के कम अंक आये है फिर भी CUET के जरिए DU में मिल सकता है एडमिशन

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CUET परीक्षा को लेकर कुछ दिनों से काफी चर्चा हो रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के वाइस चांसलर योगेश सिंह ने एडमिशन की पॉलिसी जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अब CUET की परीक्षा देना जरूरी है। इसी के अंकों के आधार पर एडमिशन की मेरिट लिस्ट तैयार होगी।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ-साथ देश की अन्य 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में भी एडमिशन CUET परीक्षा के जरिए होंगे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पहले एडमिशन कैसे होता था?
12वीं क्लास के पर्सेंटेज देखे जाते थे।
12वीं के अंकों के आधार पर कट-ऑफ मार्क्स तय होते थे और फिर एडमिशन होता था।CUET के रजिस्ट्रेशन के लिए कौन से डॉक्युमेंट्स हैं जरूरी?
10वीं और 12वीं की मार्कशीट
फोटो
सिग्नेचर (स्कैन की गई कॉपी)
फोटो के साथ ID प्रूफ (आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि)
जाति प्रमाण पत्र, नॉन क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट (OBC सर्टिफिकेट)कब खुलेगी CUET की ऑफिशियल वेबसाइट?
NTA ने यह जानकारी दी थी कि CUET की ऑफिशियल वेबसाइट 2 अप्रैल से खुलने वाली थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब NTA ने कहा है कि वेबसाइट 6 अप्रैल से 6 मई तक ओपन रहेगी। वेबसाइट ओपन करने पर एप्लिकेशन फॉर्म अपलोड नहीं हुआ है। -
CUET 2022 का रजिस्ट्रेशन कैसे कर सकते हैं?
ऑफिशियल वेबसाइट cuet.samarth.ac.in पर जाएं।
रजिस्ट्रेशन लिंक सामने आएगा, उस पर क्लिक करें।
अपना और माता-पिता का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल सहित सभी जानकारी डालकर सबमिट कर दें।
अब पेज पर वापस जाएं और लॉग इन करें।
लॉग इन करने के बाद एप्लिकेशन फॉर्म सामने आएगा, इसे भरें।
अपनी फोटो और साइन अपलोड करें।
लास्ट में एप्लिकेशन फीस भर दें।
प्रोसेस कम्पलीट हो गई है, अब आप एप्लिकेशन का प्रिंट ले लें।क्या है CUET?
2022-23 शैक्षणिक सत्र से ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने का सिस्टम बदल दिया गया है। अब देश के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए आपको 12वीं के अंकों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। एक ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट, यानी CUET देना होगा। इसके स्कोर के हिसाब से ही आपको कॉलेज में एडमिशन मिलेगा।CUET 2022 का एग्जाम NTA यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कंडक्ट करेगी। इससे पहले CUET के अंतर्गत सिर्फ देश की 14 यूनिवर्सिटी आती थीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी, जामिया, JNU जैसे कई बड़े संस्थान अपने यहां अलग से कट-ऑफ मार्क्स या फिर एंट्रेंस एग्जाम लेकर एडमिशन देते थे।
सवाल यह है कि
आखिर क्यों पड़ी CUET की जरूरत?
पिछले कई वर्षों से इस बात के प्रयास जारी थे कि ढेरों एंट्रेंस टेस्ट के बजाय एक ही एंट्रेंस टेस्ट लेने की व्यवस्था की जाए, जिससे हायर एजुकेशन के दौरान स्टूडेंट्स पर एंट्रेंस टेस्ट का बोझ कम हो।
सरकार यूनिवर्सिटी के एडमिशन के लिए बोर्ड के नंबरों को इस्तेमाल करने के पक्ष में नहीं थी। इसकी वजह यह थी कि देश के अलग-अलग बोर्ड में कॉपियों के जांचने का तरीका अलग है। - कुछ बोर्ड मार्किंग में अन्य बोर्ड की तुलना में आसानी से मार्क्स दे देते हैं। इससे कुछ बोर्ड के स्टूडेंट्स को 12वीं में ज्यादा नंबर मिलने की वजह से UG कोर्स में एडमिशन में अनुचित फायदा मिलता है।
UGC प्रमुख एम. जगदीश कुमार का कहना है कि कुछ टॉप यूनिवर्सिटीज के ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए 100 पर्सेंट का कट-ऑफ देना हास्यास्पद है। कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट देश के सभी स्टूडेंट्स को एक समान अवसर देगा। - कुमार का कहना है कि उम्मीद है कि CUET के आने से छात्र अब 12वीं की परीक्षा में ज्यादा अंक लाने की कोशिश करने के बजाय ज्यादा ध्यान सीखने पर दे पाएंगे।
UGC के चेयरमैन क्या कहते हैं
UGC के चेयरमैन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार बताते हैं कि साढ़े तीन घंटे की कम्प्यूटर बेस्ड CUET परीक्षा में 12वीं की NCERT के किताबों पर आधारित मल्टिपल चॉइस सवाल आएंगे। चूंकि एग्जाम NCERT के सिलेबस पर आधारित होगा, इसलिए छात्रों को कोचिंग की जरूरत नहीं होगी। -
हालांकि, एक चिंता ये भी है कि ऐसे में स्टेट बोर्ड से पढ़कर आने वाले छात्र NCERT से पढ़े छात्रों से कैसे कंपीट कर सकेंगे। इस पर UGC का मत है कि देश के अधिकतर राज्यों में NCERT सिलेबस अपनाया जा चुका है पर स्टेट बोर्ड से पढ़ाई करने वालों छात्रों का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। CUET एग्जाम IIT परीक्षाओं की तरह नहीं होगी। विशेषज्ञ छात्रों के डिफिकल्ट लेवल को मॉडरेट करेंगे और एग्जाम पेपर को सिर्फ 12वीं कक्षा के सिलेबस तक ही सीमित रखेंगे।
परीक्षा कितने भाषाओं में कंडक्ट की जाएगी?
CUET एग्जाम 13 अलग-अलग भाषाओं में आयोजित होगा, ताकि देशभर के सभी छात्र अपनी पसंद की भाषा चुन सकें। इनमें इंग्लिश, हिंदी, असमी, बंगाली, मराठी, पंजाबी, गुजराती, मलयालम, कन्नड़, ओड़िया, उर्दू, तमिल और तेलुगू शामिल हैं।CUET के आधार पर सेंट्रल यूनिवर्सिटीज मेरिट लिस्ट कैसे तैयार करेंगी और छात्रों को कैसे एडमिशन मिलेगा?
CUET स्टूडेंट्स को रैंक नहीं देगा, यह केवल उन्हें मार्क्स देगा। इन मार्क्स के आधार पर प्रक्रिया में शामिल यूनिवर्सिटीज अपनी कट-ऑफ तय करेंगी। एग्जाम में गलत जवाब देने वालों की नेगेटिव मार्किंग होगी। कट-ऑफ तय करने में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में मिले अंकों का कोई वेटेज नहीं होगा।नया नियम क्या है?
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन में एडमिशन लेने के लिए एक ही कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET देना होगा।
2022-23 शैक्षणिक सत्र से CUET का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी करेगी।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के लिए अप्लाई करने के लिए अप्रैल के पहले हफ्ते से आवेदन लिए जाएंगे। वहीं, छात्रों को जुलाई के पहले हफ्ते में CUET एग्जाम देना होगा।
छात्र सेंटर पर जाकर एग्जाम देंगे। परीक्षा में मल्टीपल चॉइस सवाल आएंगे, जिनका जवाब स्टूडेंट्स कम्प्यूटर की मदद से अटैम्पट करेंगे।
NCERT के 12वीं का सिलेबस और CUET एग्जाम का सिलेबस आपस में मिलता-जुलता हो सकता है।
एक स्टूडेंट ज्यादा से ज्यादा 6 विषयों के लिए ही परीक्षा दे सकता है।
12वीं के अंकों के आधार पर दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत 45 सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एडमिशन की लिस्ट नहीं तैयार होगी।CUET एग्जाम से छात्रों को क्या फायदा मिलेगा?
कॉमन टेस्ट से सभी बच्चों को एक समान मौका मिलेगा।
हर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए अलग-अलग एग्जाम नहीं देना होगा।
12वीं में कम अंक आने के बाद भी फेवरेट सेंट्रल यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल सकता है।
छतीसगढ़
महंगी हो गई है बीपी, शुगर और अस्थमा जैसी बीमारियां की दवाइयां, आइये जानते है कहा मिलेगी सस्ती दवाइयां
1 अप्रैल से बुखार, खांसी-जुकाम, शुगर, बीपी, अस्थमा,इन्फेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर और एनीमिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां महंगी हो गई। पैरासिटामॉल, फेनोबार्बिटोन, फिनाइटोइन सोडियम, एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड और मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाओं की कीमतें भी बढ़ गईं। इस तरह से 800 दवाइयों के दाम 11% तक बढ़ गए।
नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने शेड्यूल दवाओं में 10.9 प्रतिशत दाम बढ़ने की घोषणा की है। जिन दवाओं के दाम बढ़ने की घोषणा की गई है इन्हें जरूरी दवाओं की कैटेगरी में गिना जाता है। एंटीबायोटिक्स, एंटी-इंफ्लेमेट्री ड्रग्स, कान-नाक और गले की दवाएं, एंटीसेप्टिक्स, पेन किलर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल मेडिसिन और एंटी फंगल दवाएं शामिल हैं।
बढ़ती दवाइयों का रेट पता करने जब हम मेडिकल स्टोर पर गए तब हमारी मुलाकात दवाई लेने आए राम कृपाल से हुई। वो बताते हैं कि उन्हें शुगर और बीपी की समस्या है और उनकी पत्नी को न्यूरो की प्रॉब्लम है जिसके चक्कर में दवाई पर ज्यादा खर्च आता है। वो दस-दस दिन की दवाई लेते जो उन्हें 700 की पड़ती हैं और उनकी पत्नी की 900 की पड़ती हैं। इस हिसाब से देखें तो दोनों की दवाई का महीने का खर्च 4800 तक चला जाता है।
वे कहते हैं कि दवाई के रेट तो हमेशा कुछ न कुछ बढ़ते रहते हैं ऐसे में 11 प्रतिशत और बढ़े तो उनको घर खर्च चलाना मुश्किल होगा।
हर महीने जैसे ही सैलरी आती है उसका एक हिस्सा ज्यादातर परिवारों में दवाइयों के लिए रख दिया जाता है। ऐसे में दवाइयों की बढ़ती कीमत के बारे में पढ़कर आप अपने बजट को लेकर चिंतित होंगे। अगर आप भी इस महीने दवाई लेने जाएं तो राम कृपाल की तरह बढ़ते दाम की टेंशन न लें। हम यहां सॉल्यूशन दे रहे हैं उसे जरूर पढ़ें, यह आपके काम की है।
800 दवाओं में ये भी शामिल हैं-
एजिथ्रोमाइसिन – ₹120
सिप्रोफ्लोक्सासिन – ₹41
मैट्रोनिडाजोल – ₹22
पैरासिटामोल- (डोलो 650) – ₹31
फेनोबार्बिटोन – ₹19.02
फिनाइटोइन सोडियम – ₹16.90
अब चलिए जानते हैं कि
सस्ती दवा कहां से मिलेगी?
कुछ मेडिकल स्टोर वाले 15% से 20% तक छूट देते हैं तो ऐसी दुकान को चुनें जो आपको ज्यादा छूट दें।
ऑनलाइन 1mg, NetMeds, PharmEasy, LifCare, MyraMed जैसी कई वेबसाइट हैं जो दवाइयां डिस्काउंट रेट पर देती हैं। आप वहां से खरीद सकते हैं। आप इन वेबसाइट पर सस्ते विकल्प देख सकते हैं।
मोटे फायदे के लिए आजकल डॉक्टर अपना ही मेडिकल स्टोर खोल देते हैं और बिना किसी छूट के दवाई बेचते हैं तो ऐसे में वहां से दवाई लेने से बचें।
सरकारी अस्पताल से सस्ती दवाई ले सकते हैं।
मेडिकल स्टोर पर भी दो तरह की दवाइयां होती है एक ब्रांडेड दवाई होती है और एक सामान्य (जेनेरिक) दवाई होती है तो आप सामान्य दवाई ले सकते हैं।
सरकार ने सस्ती दवा के लिए हर जिले में जन औषधि केंद्र खोले हैं जिससे आप सस्ती दवाई ले सकते हैं।
सस्ती दवाई लेने का ऑप्शन जानने के बाद आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि जब हम ब्रांडेड की जगह जेनेरिक दवाई लेंगे तो क्या वह सही तरह से असर करेगी?
आपके दिमाग में आने वाले ऐसे की कुछ सवालों का जवाब देने के लिए हमने डॉ. बाल कृष्ण श्रीवास्तव से बात की।
सवाल: क्या होती हैं शेड्यूल दवाई? जिसका जिक्र बार-बार खबरों में किया जाता है।
डॉ. बालकृष्ण श्रीवास्तव: उन दवाइयों को शेड्यूल दवाई कहा जाता है जिसे आप डॉक्टर की सलाह और प्रेसक्रिप्शन के बिना खरीद नहीं सकते हैं। किस मात्रा में दवाई लेनी है यह डॉक्टर ही बताते हैं। इसकी कीमत केंद्र सरकार की अनुमति के बगैर नहीं बढ़ाई जा सकती है। यानी 1 अप्रैल से दवाई के दाम 11% तक बढ़े हैं। इसकी परमिशन केंद्र सरकार से मिली है।
सवाल: कम रेट वाली दवा का कितना असर होता है?
डॉ. बालकृष्ण श्रीवास्तव: एक डॉक्टर के लिए मरीज की कांउसिलिंग सबसे जरूरी होती है। उसके बाद आप उसे सामान्य (Generic) दवा भी दे दो वह भी काम करेगी। आपको पता होना चाहिए कि ज्यादातर बड़ी कंपनी एक ही दवा को जेनेरिक भी बनाती हैं और उसे महंगी भी बनाती है। असरदार दोनों बराबर होती हैं, बस उसके साथ लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी है।
यह भी समझ लें कि जेनेरिक दवाइयों से वह बीमारी नहीं जुड़ी है जो क्रिटिकल है। इसे ऐसे समझें– किसी की कीमो थैरेपी चल रही है। तो आप उसकी दवाई के साथ अपने मन से कोई बदलाव नहीं कर सकते हैं।
सवाल: जन औषधि केंद्र का कैसे पता करें?
डॉ. बालकृष्ण श्रीवास्तव: देश में अभी तक लगभग 600 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, ऐसे में आप गूगल सर्च करके पता कर सकते हैं आपके घर के पास कौन सा जन औषधि केंद्र है। यह जन औषधि अभियान सरकार ने पब्लिक को अवेयर करने के लिए शुरू किया है। इसका मकसद लोगों को समझाना है कि जेनेरिक मेडिसिन कम प्राइस में मिलती है, लेकिन इसमें क्वालिटी से कोई समझौता नहीं किया जाता।
सवाल: इसके अलावा भी कहीं से सस्ती दवा मिल सकती है?
डॉ. बालकृष्ण श्रीवास्तव: हां बिल्कुल आज कल काफी एनजीओ भी इस तरह का काम कर रहे हैं। ये NGO फ्री में दवाई दिलाने में मदद करती है। आप अपने शहर में ऐसे NGO की तलाश कर सकते हैं। इसके साथ ही Indiamart, 1 mg ऐसी कई वेबसाइट भी हैं जो सस्ते में दवाई बेचती हैं।
सारी जानकारी मिलने के बाद भी आपके मन में एक सवाल अभी भी आ रहा होगा वह यह कि आखिर ये नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) क्या है?
क्या है नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA)?
राष्ट्रीय औषधि उत्पाद मूल्य प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority-NPPA) को 29 अगस्त, 1997 में स्थापित की गई थी। यह फार्मास्युटिकल दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है। यह औषधि उत्पाद विभाग (DoP), Ministry of Chemical Products and Fertilizers के अधीन स्वतंत्र कार्यालय के रूप में काम करता है।
चलते-चलते बताते हैं कि दवाई का रेट आखिर क्यों बढ़ा?
रॉ मटेरियल महंगा होने की वजह से नॉन शेड्यूल दवाई जिसका रेट तय करना सरकार के हाथ में नहीं होता वो पहले से ही महंगी हैं। जो शेड्यूल दवाइयां होती हैं इसका रेट सरकार होल सेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर तय करती है। शेड्यूल दवाइयों के रेट पर सरकार का कंट्रोल होता है। पिछली साल का होल सेल प्राइस इंडेक्स 10.7 था। इस वजह से इस बार 800 दवाइयों पर 10% से 12% तक की बढ़ोत्तरी की गई। सरकार जो रेट तय करती है वह एक साल तक ही फिक्स रहता है।
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