Lifestyle
Health Tips: क्या आपको भी दिखते है आंखो में धूधलेपन, तो हो जाइये सावधान… जाने इसे ठीक करने का छोटा सा उपाये…

कंप्यूटर पर ज्यादा काम करने वालों में बढ़ रही हैं आंखों की समस्याएं, जरूर करें ये उपायमोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन पर बढ़ता समय, हमारी आंखों के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। कंप्यूटर पर ज्यादा काम करने वालों में कई तरह की आंखों से संबंधित समस्याएं देखने को मिलती रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं, स्कीन से निकलने वाली नीली रोशनी सीधे आंखों को नुकसान पहुंचाती है, जिसके कारण आंखों में दर्द, लालिमा, जलन और समस्या बढ़ने के साथ लोगों में ड्राई आइज की दिक्कत बढ़ती जा रही है। ऑफिस में काम करने वाले या ऑनलाइन आपना समय ज्यादा बिताने वाले लोगों को आंखों की सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्क्रीन पर बीतने वाले अधिक समय के कारण होने वाली आंखों की समस्या को मेडिकल की भाषा में ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर इस समस्या पर हम ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन एक बार जब यह बढ़ने लगती है तो इसके कारण कई तरह की गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
जिन लोगों का रोजाना कंप्यूटर पर अधिक समय बीतता है उन्हें अपनी आंखों के विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। कुछ बेहद सरल से उपाय इसमें आपकी मदद कर सकते हैं, जिसे हर किसी को प्रयोग में लाते रहना चाहिए। ये उपाय आपकी आंखों को होने वाली गंभीर समस्याओं से बचाने में काफी मददगार हो सकते हैं। आइए आगे इस बारे में विस्तार से जानते हैं। डिजिटल आई स्ट्रेन के कारण होने वाली दिक्कतें
डिजिटल आई स्ट्रेन आज के समय से, पहले से कहीं अधिक आम समस्या है, क्योंकि लगभग हर कोई दैनिक जीवन में स्क्रीन का उपयोग करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 50 फीसदी लोगों में इस तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है। वैसे तो इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं है कि दीर्घकालिक तौर पर यह आपकी आंखों की रोशनी को खराब कर देता है, लेकिन यह आंखों से संबंधित कई तरह की असहज करने वाली समस्याओं का कारण जरूर बन सकती है, जिसमें आंखों में दर्द, लालिमा, चुभन और आंखों के सूखापन की समस्या काफी सामान्य है।20/20/20 नियम का पालन करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारी आंखें पूरे दिन सीधे किसी भी चीज को लगातार देखने के लिए डिज़ाइन नहीं की गई हैं। यही कारण है कि लगातार स्क्रीन देखते रहने वाले लोगों में इससे संबंधित कई तरह की दिक्कतें हो सकती है। इससे बचाव के लिए 20/20/20 नियम आपके लिए काफी मददगार है। इसके मुताबिक यदि आप स्क्रीन को 20 मिनट तक लगातार देखते हैं, तो आपको 20 सेकंड के लिए अपने से कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज को देखते रहना चाहिए। यह आपके लिए काफी मददगार अभ्यास है।
पलकों को झपकाते रहें
कंप्यूटर पर काम करते समय, थोड़ी-थोड़ी देर पर अपने पलकों को झपकाते रहने की आदत डालें। इससे आंखों में पर्याप्त नमी बनी रहती है और ड्राई आइज की समस्या का जोखिम कम हो जाता है। पलकों को झपकाते रहने से आंखों को आराम भी मिलता है जिससे मांसपेशियों पर पड़ रहा अतिरिक्त दबाव कम हो जाता है।
नीली रोशनी को कम करें
विशेषज्ञों के मुताबिक कंप्यूटर-मोबाइल के कारण आंखों को होने वाले दुषप्रभावों को कम करने के लिए इससे निकलने वाली नीली रोशनी को कम रखें। आजकल सेटिंग्स में रीडिंग मोड का विकल्प होता है जो स्वत: इस रोशनी को कम कर देता है। रीडिंग मोड में काम करने से आंखों पर दुष्प्रभाव का जोखिम कम हो जाता है। आंखों की सेहत का ख्याल रखना सभी के लिए बहुत आवश्यक है।
मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन पर बढ़ता समय, हमारी आंखों के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। कंप्यूटर पर ज्यादा काम करने वालों में कई तरह की आंखों से संबंधित समस्याएं देखने को मिलती रही हैं। विशेषज्ञ बताते हैं, स्कीन से निकलने वाली नीली रोशनी सीधे आंखों को नुकसान पहुंचाती है, जिसके कारण आंखों में दर्द, लालिमा, जलन और समस्या बढ़ने के साथ लोगों में ड्राई आइज की दिक्कत बढ़ती जा रही है। ऑफिस में काम करने वाले या ऑनलाइन आपना समय ज्यादा बिताने वाले लोगों को आंखों की सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्क्रीन पर बीतने वाले अधिक समय के कारण होने वाली आंखों की समस्या को मेडिकल की भाषा में ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर इस समस्या पर हम ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन एक बार जब यह बढ़ने लगती है तो इसके कारण कई तरह की गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं।
जिन लोगों का रोजाना कंप्यूटर पर अधिक समय बीतता है उन्हें अपनी आंखों के विशेष ख्याल रखने की जरूरत होती है। कुछ बेहद सरल से उपाय इसमें आपकी मदद कर सकते हैं, जिसे हर किसी को प्रयोग में लाते रहना चाहिए। ये उपाय आपकी आंखों को होने वाली गंभीर समस्याओं से बचाने में काफी मददगार हो सकते हैं। आइए आगे इस बारे में विस्तार से जानते हैं। डिजिटल आई स्ट्रेन के कारण होने वाली दिक्कतें
डिजिटल आई स्ट्रेन आज के समय से, पहले से कहीं अधिक आम समस्या है, क्योंकि लगभग हर कोई दैनिक जीवन में स्क्रीन का उपयोग करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 50 फीसदी लोगों में इस तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है। वैसे तो इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं है कि दीर्घकालिक तौर पर यह आपकी आंखों की रोशनी को खराब कर देता है, लेकिन यह आंखों से संबंधित कई तरह की असहज करने वाली समस्याओं का कारण जरूर बन सकती है, जिसमें आंखों में दर्द, लालिमा, चुभन और आंखों के सूखापन की समस्या काफी सामान्य है।20/20/20 नियम का पालन करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारी आंखें पूरे दिन सीधे किसी भी चीज को लगातार देखने के लिए डिज़ाइन नहीं की गई हैं। यही कारण है कि लगातार स्क्रीन देखते रहने वाले लोगों में इससे संबंधित कई तरह की दिक्कतें हो सकती है। इससे बचाव के लिए 20/20/20 नियम आपके लिए काफी मददगार है। इसके मुताबिक यदि आप स्क्रीन को 20 मिनट तक लगातार देखते हैं, तो आपको 20 सेकंड के लिए अपने से कम से कम 20 फीट दूर किसी चीज को देखते रहना चाहिए। यह आपके लिए काफी मददगार अभ्यास है।
पलकों को झपकाते रहें
कंप्यूटर पर काम करते समय, थोड़ी-थोड़ी देर पर अपने पलकों को झपकाते रहने की आदत डालें। इससे आंखों में पर्याप्त नमी बनी रहती है और ड्राई आइज की समस्या का जोखिम कम हो जाता है। पलकों को झपकाते रहने से आंखों को आराम भी मिलता है जिससे मांसपेशियों पर पड़ रहा अतिरिक्त दबाव कम हो जाता है।
नीली रोशनी को कम करें
विशेषज्ञों के मुताबिक कंप्यूटर-मोबाइल के कारण आंखों को होने वाले दुषप्रभावों को कम करने के लिए इससे निकलने वाली नीली रोशनी को कम रखें। आजकल सेटिंग्स में रीडिंग मोड का विकल्प होता है जो स्वत: इस रोशनी को कम कर देता है। रीडिंग मोड में काम करने से आंखों पर दुष्प्रभाव का जोखिम कम हो जाता है। आंखों की सेहत का ख्याल रखना सभी के लिए बहुत आवश्यक है।

Lifestyle
देश के 2 लाख बच्चो को दिल की बीमारी हो रही है इसकी वजह, लक्षण और बचाव के तरीके
देश में नवजात और छोटे बच्चों में जन्मजात बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन्हीं में से एक बीमारी है कॉन्जेनिटल हार्ट डिसीज (CHD)। जब बच्चे को गर्भ में ही दिल से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं, तब उसे CHD का मरीज माना जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल लगभग 2 लाख बच्चे CHD के साथ पैदा होते हैं। इलाज की बात करें तो AIIMS के अनुसार, उत्तर भारत में 17%, दक्षिण भारत में 72% और उत्तर पूर्वी भारत में 0% बच्चों को ही उपचार मिल पाता है।
CHD के लक्षण, रिस्क फैक्टर्स और बचाव के तरीके जानने के लिए हमने मेदांता हॉस्पिटल गुरुग्राम के सीनियर कंसल्टेंट- पीडियाट्रिक्स कार्डियोलॉजी डॉ अमित मिसरी से बात की।
सवाल: CHD के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?
जवाब: डायबिटीज, प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले संक्रमण, एक्सरे रेडिएशन और प्रेग्नेंसी के वक्त गलत दवाओं का इस्तेमाल CHD के कुछ रिस्क फैक्टर्स हैं। इनके अलावा यदि गर्भवती महिला को स्मोकिंग और शराब की लत लगी है, तो वह बच्चे के दिल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। CHD आनुवंशिक बीमारी भी हो सकती है।
सवाल: समय पर CHD का इलाज न होने से बच्चा कैसे प्रभावित हो सकता है?
जवाब: CHD का सही वक्त पर इलाज न हो तो बच्चे को सांस संबंधित परेशानियां हो सकती हैं। इसके साथ ही वजन न बढ़ना भी CHD का एक कॉम्प्लिकेशन है। इस बीमारी के कारण बच्चों के विकास पर भी असर पड़ता है। CHD के मरीजों के दिल की धड़कन कभी तेज तो कभी धीमी चलती है। उन्हें दिल में खून के थक्के जमने का भी खतरा होता है।
CHD का असर बच्चों की फिजिकल हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है। उन्हें लगातार मूड स्विंग्स होते हैं। शारीरिक विकास न होने की वजह से वो इनसिक्योरिटी के शिकार हो
Lifestyle
जंक फूड हो सक़ता आपके लिए नुक्सानदायक फैटी लिवर का शिकार होने से बचे

वर्ल्ड लिवर डे 19 अप्रैल काे है। लिवर को लेकर अमेरिका में परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इन दिनों हर 4 में एक अमेरिकी फैटी लिवर की परेशानी से जूझ रहा है। अमेरिका की 26 करोड़ से अधिक वयस्क आबादी में से नॉन अल्कोहलिक करीब 6.4 करोड़ युवा फैटी लिवर के कारण संकट का सामना कर रहे हैं। यह दिक्कत उन्हें जंक फूड और अनहेल्दी फूड ज्यादा खाने की आदत के कारण हुई है। इसे नॉन अल्कोहल फैटी लिवर डिसीज (NAFLD) नाम दिया गया है।
इस बीमारी का पता रूटीन हेल्थ चेकअप में नहीं लग पाता है। वहीं प्रारंभिक तौर पर कोई विशेष लक्षण भी नहीं दिखते है, लेकिन कुछ साल बाद पेट का दाहिना हिस्सा सूजने लगता है। यह इतनी खतरनाक है कि लिवर फेल के साथ जान जाने का खतरा रहता है। अमेरिकन हेल्थ एसोसिएशन ने इस बारे में बताया है। इसमें बीमारी का पता लगाने के लिए मेथड बताई गई है।
अमेरिका के 10 करोड़ युवाओं में से 40% NAFLD के शिकार
रिजन यूनिवसिर्टी के डायबिटीज के एक्सपर्ट डॉ पॉल डुले ने बताया कि यह लिवर की सबसे सामान्य बीमारी है, जो लाखों मौत का कारण बन रही है। अमेरिका के 10 करोड़ युवाओं में से 40% ओवरईटिंग के कारण नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं।
डॉक्टरों का तर्क है कि ऐसे लोग जिन्हें पहले से ही डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां हैं, उन्हें इससे ज्यादा खतरा है। कई लोगों को यह बीमारी आनुवंशिक रूप से भी हो सकती है। खाना न पचना, टाइप-2 डायबिटीज और अनहेल्दी फूड खाने की वजह से NAFLD तेजी से विकसित हो रहा है।
फैटी लिवर के मरीज वजन 10 किलो तक घटाएं
NAFLD से पीड़ित लोगों को बायोप्सी के बाद लिम्पोसक्शन सर्जरी कराने की सलाह दी जाती है। यही एक मात्र उपचार है, लेकिन यह महंगी होती है। वहीं कम से कम 10 किलो वजन कम करने व हेल्दी फूड और रोज एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है। बीमारी का जल्दी पता लगाना जरूरी है, क्योंकि यह हार्ट अटैक का कारण भी बन सकती है।
Lifestyle
Heart Attack Treatment : हार्ट अटैक से बचना है तो करें,ये 5 काम..नहीं आयेगा अटैक

Heart Attack Treatment: बदलती लाइफस्टाइल और खान-पान के चलते आज के समय में अपने आपको फिट रख पाना मुश्किल होता जा रहा है. तो आइए जानते हैं कि आपको ऐसे कौन-से काम करने चाहिए, जिससे हार्ट अटैक के जोखिम को कम किया जा सके.
Heart Attack Treatment For Healthy life: फिट रहने के लिए हार्ट को भी फिट रखना बेहद जरूरी है. सभी जानते हैं कि देश में ज्यादातर लोगों की जान हार्ट अटैक से जाती है. ऐसे में अपने आपको हेल्दी रखने के लिए विशेष ध्यान रखना पड़ता है. आइए जानते हैं कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए आपको ऐसे कौन-से 6 काम करने चाहिए, जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है.
1. धूम्रपान न करें
धूम्रपान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से आपका हार्ट अटैक का जोखिम कम हो जाता है. यदि आपको धूम्रपान की बहुत ज्यादा आदत हो चुकी है तो धीरे-धीरे इस आदत को छोड़ दें.
2. रोज करें मेडिटेशन
मेडिटेशन को अपनी अपनी लाइफ में शामिल कर लें. क्योंकि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए मेडिटेशन करना बेहद जरूरी है. योग की मदद से स्ट्रेस लेवल कम होता है. रोजाना मेडिटेशन करने से माइंड भी शांत रहता है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम भी कम होता है.
3. नींद पूरी लें
अगर आप नींद पूरी लेंगे तो आपको हार्ट अटैक का रिस्क कम हो जाता है. दरअसल, हार्ट को हेल्दी रखने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद पूरी करना चाहिए. नींद पूरी नहीं होने से भी तनाव बढ़ता है, जिससे हार्ट अटैक रिस्क भी बढ़ जाता है. ऐसे में कोशिश करें कि आप नींद पूरी लें.
4.वजन रखें कंट्रोल
वजन कंट्रोल करना भी बेहद जरूरी है. क्योंकि वजन बढ़ने से आपको कई तरह की बीमारियां घेरने लगती हैं. ऐसे में कोशिश करें कि एक्स्ट्रा शुगर का सेवन न करें.
5. बीएमआई और हार्ट रेट नोट करें
इसके साथ ही बीएमआई और हार्ट रेट को नोट करते रहें. अगर आपका बीएमआई 25 से ज्यादा है और कमर 35 इंच से ज्यादा है तो आपको हार्ट हेल्थ का खतरा हो सकता है. ऐसे में आपको एक्सरसाइज करनी की आदती डालनी होगी.
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