Lifestyle
ये 5 फूल करेंगे आपके दु:ख भरी तनाव को दूर,आएंगी अपार खुशियां..

Vastu tips: फूल न सिर्फ हमारे जीवन को सुंगधित कर देते है बल्कि इनमें वास्तुदोष मिटाने की भी शक्ति होती है.फूल उर्जा का संचार होते हैं इनसे वातावरण तो शुद्ध होता ही है, रिश्तों में भी तालमेल बना रहता है।पेड़, पौधे और फूल न सिर्फ हमारे जीवन को सुंगधित कर देते है बल्कि इनमें वास्तुदोष मिटाने की भी शक्ति होती है.घर में फूलों का होना तनाव से मुक्ति दिलाता है और मानसिक शांति मिलती है. फूल उर्जा का संचार होते हैं इनसे वातावरण तो शुद्ध होता ही है, रिश्तों में भी तालमेल बना रहता है.आइए जानते है जीवन में खुशहाली लाने वाले फूलों के बार में.
चमेली
अमूमन चमेली सभी जगह पाई जाती है लेकिन घर के आंगन इसका होना खुशियों की दस्तक देता है.इसके घर-आंगन में होने से आपके विचारों और भावों में सकारात्मक बदलाव होने लगते हैं.पॉजिटिव एनर्जी मिलती है.इस फूल की खुशबू से तनाव रहित माहौल पैदा होता है.
पारिजात
जिस घर में पारिजात के फूल होते हैं वहां हमेशा शांति और समृद्धि का निवास होता है. पारिजात के फूलों को हरसिंगार भी कहा जाता है.ये चमकारी फूल सिर्फ रात में ही खिलते हैं और सुबह अपने आप पेड़ से टूटकर गिर जाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार इसके फूलों में स्ट्रेस दूर करने की क्षमता और कई दिव्य औषधिय गुण पाए जाते हैं.
चम्पा
चम्पा के फूल पूजा के लिए भी उपयोगी होते है.चम्पा का पौधा वातावरण को शुद्घ करने के लिए लगाया जाता है.चम्पा के फूलों का उपयोग कई बीमारियों को दूर करने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
मोगरा
मोगरे के फूल गर्मियों में खिलते हैं. इसकी भीनी-भीनी सौगंध तन और मन को ठंडक का अहसास कराती है. मोगर के फूल की खुशबू दिमाग को तरोताजा बनाती है और गुस्से को शांत करती है.
गुलाब
गुलाब को प्रेम का प्रतीक माना जाता है. ये फूल औषधीय गुणों से भी भरपूर है. गुलाब की खुशबू से न सिर्फ मन शांत होता है बल्कि तनाव भी दूर हो जाता है और रिश्तों में मिठास बनी रहती है.

Lifestyle
अपने दिनचर्या में न करे ये गलती हो सकते है, अस्थमा, अटैक, जैसी बीमारियों का खतरा, बरते सावधानिया..

अस्थमा वैश्विक स्तर पर बढ़ती सांस की गंभीर समस्याओं में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, साल 2019 में अस्थमा ने अनुमानित 262 मिलियन (26.2 करोड़) लोगों को प्रभावित किया और इसके कारण 4.55 लाख लोगों की मृत्यु हुई। भारत में भी यह आंकड़ा साल दर साल बढ़ता जा रहा है। देश की कुल आबादी में लगभग 6% बच्चे और 2% वयस्कों को अस्थमा की समस्या है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ लोगों में अस्थमा की दिक्कत वंशानुगत हो सकती है, जबकि कुछ लोगों में समय के साथ भी इसके विकसित होने का खतरा रहता है।जीवनशैली के विभिन्न जोखिम कारक अस्थमा के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।
अस्थमा की स्थिति में आपके वायुमार्ग संकीर्ण और सूज जाते हैं, जिसके कारण अतिरिक्त बलगम का उत्पादन होने लगता है। इससे सांस लेना मुश्किल हो सकती है और जब आप सांस छोड़ते हैं तो खांसी, सीटी की आवाज (घरघराहट) आती है। दैनिक जीवन की कुछ चीजें अस्थमा की समस्या को बढ़ा देती हैं। सांस लेने में तकलीफ की इस दिक्कत से बचे रहने के लिए सभी लोगों को इसके जोखिम कारकों से बचाव करते रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि कौन सी आदतें अस्थमा के खतरे को ट्रिगर कर सकती हैं?
धूम्रपान से बढ़ता है खतरा
धूम्रपान, अस्थमा सहित सांस की समस्याओं को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जाता है। तंबाकू के धुंए के संपर्क में आने, भले ही आप न पी रहे हों, यह स्थिति भी सांस की दिक्कतों को बढ़ा सकती है, इससे बचकर रहना चाहिए। इसके अलावा यदि आप बच्चों के सामने भी धूम्रपान करते हैं तो इसके संपर्क में आने से बच्चों में अस्थमा के लक्षणों के बिगड़ने की आशंका हो सकती है। अस्थमा के शिकार लोगों को धूम्रपान से बिल्कुल परहेज करना चाहिए।
एलर्जी कारकों से बनाए दूरी
कुछ एलर्जी बढ़ाने वाले कारक जैसे धूल, प्रदूषण आदि भी अस्थमा अटैक का कारण बन सकते हैं। ऐसे कारकों के संपर्क में आने से आपके वायुमार्ग में सूजन बढ़ जाती है, जिससे अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि जिन लोगों को अस्थमा या सांस की समस्या है उन्हें बाहर जाते समय सुरक्षात्मक मास्क पहनने की सलाह दी जाती है, जिससे ऐसे एलर्जी बढ़ाने वाले कारकों से बचाव किया जा सके।
कुछ प्रकार की दवाइयों का सेवन
अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ लोगों में नॉन स्टेरॉइडल एंटी इंफ्लामेटरी (एनएसएआईडी) दवाओं के सेवन के कारण भी वायुमार्ग की सूजन और अस्थमा के लक्षण बिगड़ सकते हैं। शोधकर्ता इसके कारणों को जानने के लिए अध्ययन कर रहे हैं। यदि आपको भी किसी दवा के सेवन के बाद सांस की तकलीफ महसूस होती है तो इसे तुरंत बंद कर दें और संबंधित डॉक्टर से जरूर सलाह ले लें।
कुछ प्रकार के खाद्य पदार्थ
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ लोगों में प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन के बाद भी अस्थमा अटैक की समस्या देखने को मिली है। ऐसे खाद्य पदार्थों में सल्फर डाइऑक्साइड और सोडियम मेटाबिसल्फाइट में जैसे तत्व हो सकते हैं जो आपकी समस्या को बढ़ा देते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ अस्थमा के रोगियों को आहार में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज आदि को शामिल करने की सलाह देते हैं।
Lifestyle
BEAUTY CARE TIPS: क्या आप भी आँखों के नीचे झुर्रियो से है परेशान, तो आजमाये ये छोटा सा उपाये…

Beauty Tips: अक्सर त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं जो उन चीजों के कारण विकसित होती हैं जो हम अवचेतनरूप से करते हैं। आपने देखा होगा कि जब आप धूप में घड़ी पहनते हैं तो आपके हाथ पर टैन लाइन नजर आने लग जाती है? अक्सर ऐसी चीजें होती हैं जो हम जानबूझ कर करते भी नहीं, लेकिन फिर भी आपकी त्वचा पर भारी पड़ती हैं। कई बार आपके चेहरे पर झुर्रियां नजर आने लग जाती हैं, आज अपनी इस स्टोरी में हम इसी पर बात करेंगे… कैसे होती हैं झुर्रियां आपके चेहरे पर झुर्रियां तब विकसित होती हैं जब त्वचा ढीली होने लगती है। वे सबसे पहले लगातार गति के कारण आंखों और मुंह के आसपास विकसित होते हैं। मुंह खोलने और बंद करने के परिणामस्वरूप त्वचा में कसाव और ढीलापन आ सकता है जो जब आप बूढ़े हो जाते हैं तो झुर्रियां विकसित करने वाला पहला स्थान बन जाता है।
क्यों होती हैं झुर्रियां जब आप आईलाइनर लगाती हैं या वाइप या कॉटन बॉल से अपना मेकअप उतारने की कोशिश करती हैं, तो आप उस त्वचा को खींचती हैं जो पहले से ही बहुत संवेदनशील है। आंखों के आसपास की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और जब आप इसे खींचते हैं, तो आप इसे ढीला कर देते हैं। इस समय त्वचा की देखभाल करने के महत्व को कोई नहीं समझता है, लेकिन समय के साथ, इसके परिणामस्वरूप झुर्रियां पड़ जाती हैं। कैसे करें बचाव जब आप आईलाइनर लगा रही हों, तो सुनिश्चित करें कि आप अपनी त्वचा को ऊपर की ओर न खींचे। यही हाल मेकअप रिमूवर का भी है। एक सौम्य माइक्रो-फाइबर कपड़े का प्रयोग करें और धीरे-धीरे अपनी आंखों से मेकअप को हटाएं। अपनी त्वचा को इधर-उधर रगड़ना सबसे बुरा काम है जो आप करती हैं। मॉइस्चराइजर या अंडर आई क्रीम लगाते समय अपनी अनामिका का उपयोग करें। यह एकमात्र उंगली है जो सबसे कोमल है और कम दबाव का उपयोग करती है।
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HEALTH CARE TIPS: एसिडिटी की समस्या को चुटकी में दूर करेगा ये उपाये…

बार-बार एसिडिटी और सूजन की समस्या होने के पीछे कई कारण होते हैं, जिनमें बहुत अधिक कैफीनयुक्त पेय, खाने के तुरंत बाद लेटना या बहुत अधिक मसालेदार भोजन करना शामिल है। खुद को एक्टिव रखने और लाइट मील लेने से आपको इसमें कुछ राहत मिल सकती है। इन कुछ आसान घरेलू उपचारों से आप एसिडिटी को दूर रख सकते हैं।
सौंफ का पानी: 1 चम्मच सौंफ को गर्म पानी के साथ लेने से एसिडिटी और सीने में जलन जैसे लक्षणों से राहत मिलती है।
गुड़: इसमें पोटेशियम और मैग्नीशियम दोनों होते हैं। PH संतुलन बनाए रखने के लिए पोटेशियम बहुत अच्छा है, दूसरी ओर आपके पाचन तंत्र को ठीक से काम करने के लिए मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है, तो बस एक छोटा सा गुड़ का टुकड़ा रोजाना जरूर खाएं।
काला जीरा: एसिडिटी से राहत पाने के लिए आप जीरा चबा सकते हैं या एक गिलास पानी में 1 चम्मच उबाल कर भी पी सकते हैं।
अजवाइन: यह एसिडिटी और पेट फूलने की समस्या से निजात दिलाने के लिए बहुत अच्छा स्त्रोत है, यह पाचन के लिए बहुत अच्छा है और एक अच्छा एंटी-एसिड एजेंट है।
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